छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में हाई-प्रोफाइल राजनीतिक और कारोबारी हलकों में तब हड़कंप मच गया जब लॉरेंस बिश्नोई गिरोह का नाम लेकर एक बड़े नेता से भारी-भरकम रकम की मांग की गई। इस पूरे मामले में पुलिस की साइबर सेल और क्राइम ब्रांच ने लगातार चार दिनों तक तकनीकी निगरानी रखी। इसके बाद शराब कारोबारी और कांग्रेस से जुड़े अनवर ढेबर के बेटे शोएब ढेबर को शनिवार देर रात हिरासत में ले लिया गया। इस सनसनीखेज गिरफ्तारी ने राज्य के सियासी गलियारों में भारी हलचल पैदा कर दी है।
25 करोड़ रुपये की फिरौती का संदेश
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कांग्रेस नेता आनंद कुकरेजा के पास एक अज्ञात स्रोत से धमकी भरा संदेश आया। इस मैसेज में कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नाम का हवाला देते हुए उनसे 25 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई थी। इतनी बड़ी रकम और कुख्यात गिरोह का नाम सामने आने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए फौरन पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत मिलते ही पुलिस की साइबर यूनिट और अपराध शाखा ने विदेशी नंबरों और इंटरनेट प्रोटोकॉल की जांच शुरू कर दी।
पुराने धमकी भरे संदेश की नकल कर रची गई साजिश
तकनीकी जांच में जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच अधिकारियों ने पाया कि यह कोई नया तरीका नहीं था, बल्कि पहले से इस्तेमाल किए गए संदेश का ही एक बदला हुआ रूप था। इससे पहले शोएब ढेबर के चाचा और रायपुर के पूर्व महापौर एजाज ढेबर को भी इसी तरह की धमकी मिल चुकी थी। उस समय एजाज ढेबर से लॉरेंस बिश्नोई और अमन साव गिरोह के नाम पर 50 करोड़ रुपये मांगे गए थे। उस घटना के दौरान फोन कॉल और मैसेज के लिए विदेशी वर्चुअल नंबर का सहारा लिया गया था, जिसकी एफआईआर कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई थी।
पुलिस पड़ताल के मुताबिक, एजाज ढेबर को भेजे गए उसी पुराने धमकी भरे संदेश का मजमून हूबहू कॉपी किया गया था। उसमें केवल नाम और रकम में थोड़ा फेरबदल करके आनंद कुकरेजा को भेज दिया गया, ताकि जांच एजेंसियों का ध्यान भटकाया जा सके और इसे किसी संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का काम समझा जाए।
अदालत में पेशी और अन्य लोगों से पूछताछ
चार दिनों की गहन पड़ताल के बाद पुलिस ने शोएब ढेबर को गिरफ्तार किया और रविवार शाम उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया। पुलिस दल ने पूछताछ को आगे बढ़ाने और साजिश के अन्य पहलुओं को खंगालने के लिए आरोपी की रिमांड मांगी, लेकिन अदालत ने सुनवाई के बाद उसे जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
जांच का दायरा सिर्फ शोएब ढेबर तक सीमित नहीं है। पुलिस तंत्र इस मामले से जुड़े अन्य संभावित संपर्कों की भी पड़ताल कर रहा है। इसी सिलसिले में एक बीजेपी नेता के भांजे टीनू भारद्वाज और कुछ अन्य युवकों को भी थाने बुलाकर पूछताछ की गई है। पुलिस अब यह पुख्ता करने में जुटी है कि इस पूरी साजिश का असली सूत्रधार कौन था और क्या इसका मकसद केवल दहशत फैलाकर वसूली करना था या फिर यह किसी आपसी राजनीतिक और कारोबारी रंजिश का नतीजा है।





















