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बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से पूछा, 14 मंत्रियों वाला मंत्रिमंडल कितना संवैधानिक?छत्तीसगढ़
5 सित॰ 2026, 8:05 pm (3 घंटे पहले)· 2

बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार से पूछा, 14 मंत्रियों वाला मंत्रिमंडल कितना संवैधानिक?

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल में 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चार सप्ताह में शपथपत्र के जरिए जवाब मांगा है।

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल में 14वें मंत्री की नियुक्ति अब अदालत की कसौटी पर है। बिलासपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस नियुक्ति को असंवैधानिक बताने वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर शपथपत्र के जरिए जवाब देने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद साय सरकार के लिए यह साबित करना जरूरी हो गया है कि उसका मंत्रिमंडल विस्तार संविधान के मुताबिक ही हुआ था।

पहले जानिए, विवाद शुरू कैसे हुआ

अगस्त 2025 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस विस्तार में तीन और विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इन तीनों के शपथ लेते ही छत्तीसगढ़ में कुल मंत्रियों की संख्या बढ़कर 14 पहुंच गई। यह आंकड़ा सामने आते ही सवाल उठने लगे कि क्या राज्य में इतनी बड़ी मंत्रिपरिषद संविधान के दायरे में है या नहीं।

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दो अलग-अलग लोगों ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा

मंत्रियों की संख्या 14 होने के फैसले को सबसे पहले सामाजिक कार्यकर्ता वासु चक्रवर्ती ने चुनौती दी। उन्होंने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर संविधान के प्रावधानों का हवाला देते हुए मंत्रिपरिषद की अधिकतम तय सीमा पर सवाल खड़े किए। उनकी दलील है कि छत्तीसगढ़ में 14 मंत्रियों की मौजूदा संख्या संवैधानिक नियमों से मेल नहीं खाती। इसके बाद कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने भी इसी मुद्दे पर अलग से याचिका दायर कर दी और 14वें मंत्री की नियुक्ति को गलत बताया।

हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं को जोड़ा

चूंकि वासु चक्रवर्ती और सुशील आनंद शुक्ला, दोनों की याचिकाओं में मुद्दा एक ही था यानी 14वें मंत्री की नियुक्ति की संवैधानिक वैधता, इसलिए बिलासपुर हाईकोर्ट ने दोनों मामलों को आपस में जोड़कर एक साथ सुनवाई करने का फैसला लिया। इसके बाद डिवीजन बेंच के सामने इस संयुक्त मामले पर विस्तार से सुनवाई हुई।

अब सरकार को देना होगा जवाब

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि राज्य सरकार को अपनी स्थिति चार सप्ताह के भीतर स्पष्ट करनी होगी। सरकार को शपथपत्र के माध्यम से अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। सरकार का जवाब आने के बाद ही इस मामले की अगली सुनवाई तय होगी। तब तक यह साफ नहीं है कि 14वें मंत्री का भविष्य क्या होगा और क्या मंत्रिमंडल में कोई फेरबदल करना पड़ेगा।

सवाल-जवाब

बिलासपुर हाईकोर्ट ने किस मामले में सुनवाई की?
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंत्रिमंडल में 14वें मंत्री की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की।
कोर्ट ने राज्य सरकार को क्या निर्देश दिया?
कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर शपथपत्र के जरिए अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
14वें मंत्री की नियुक्ति कब हुई थी?
अगस्त 2025 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रिमंडल का विस्तार करते हुए तीन और विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई, जिससे कुल मंत्रियों की संख्या 14 हो गई।
यह याचिका सबसे पहले किसने दायर की थी?
सामाजिक कार्यकर्ता वासु चक्रवर्ती ने सबसे पहले हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी।
दूसरी याचिका किसने दायर की?
कांग्रेस नेता सुशील आनंद शुक्ला ने भी इसी मुद्दे पर अलग याचिका दाखिल की थी।
हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाओं को अलग-अलग क्यों नहीं सुना?
चूंकि दोनों याचिकाओं में एक ही मुद्दा यानी 14वें मंत्री की नियुक्ति की संवैधानिक वैधता था, इसलिए कोर्ट ने दोनों मामलों को जोड़कर एक साथ सुना।
अगली सुनवाई कब होगी?
राज्य सरकार का जवाब आने के बाद ही इस मामले की अगली सुनवाई तय होगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

यह मामला सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 164(1ए) की व्याख्या से जुड़ा है, जो मंत्रिपरिषद की अधिकतम सीमा तय करता है। चूंकि राज्य विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत की गणना में दशमलव आने पर कानूनी पेंच फंसते हैं, इसलिए हाईकोर्ट का चार सप्ताह बाद आने वाला फैसला देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक बड़ा कानूनी दृष्टांत बन सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

संविधान के अनुच्छेद १६४(१ए) के तहत मंत्रिपरिषद की सीमा विधानसभा की कुल संख्या का १५ प्रतिशत तय है। छत्तीसगढ़ की नब्बे सीटों के लिहाज से यह गणित सीधे तौर पर साढे़ तेरह यानी चौदह मंत्रियों तक पहुँचने की छूट या सीमा का पेच पैदा करता है। अदालत का यह फैसला केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य छोटे आकार वाले राज्यों में भी मंत्रिमंडल के गठन और संख्या-बल को लेकर एक नया कानूनी मानक तय करेगा।

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