छत्तीसगढ़ के पेंड्रा-मरवाही वनक्षेत्र में एक मृत भालू के नाखून उखाड़ने के आरोप में वन विभाग ने दो युवकों को हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के बाद दोनों के कब्जे से भालू के चारों गायब नाखून बरामद कर लिए गए, और उनके खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर दिया गया है।
घटना कैसे सामने आई
वन अमला जब जंगल में शव की सूचना पर पहुंचा तो देखा कि भालू के चारों पंजों के नाखून नदारद थे। यह देखकर अधिकारियों को शक हुआ कि किसी ने जानबूझकर नाखून निकाले हैं, जिसके बाद तुरंत जांच शुरू कर दी गई। मामले की तह तक पहुंचने के लिए टीम ने खोजी कुत्ते की मदद ली, जिसने कुछ ही देर में सुराग पकड़कर टीम को सीधे आरोपियों के ठिकाने तक पहुंचा दिया। पूछताछ के दौरान दोनों ने नाखून निकालने की बात मान ली, जिसके बाद पुलिस टीम ने उनके पास से चारों नाखून बरामद कर लिए।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया
भालू के शव की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि उसकी मौत किसी हमले या शिकार से नहीं, बल्कि फेफड़ों में हुए संक्रमण के कारण हुई थी। यानी भालू स्वाभाविक कारणों से मरा था। हालांकि प्राकृतिक मौत होने के बावजूद, शव से नाखून निकाल लेना वन्यजीव कानून में उतना ही गंभीर अपराध माना जाता है जितना किसी जीवित वन्यजीव को नुकसान पहुंचाना। पोस्टमार्टम पूरा होने के बाद डीएफओ कुमार निशांत की देखरेख में भालू का अंतिम संस्कार वैदिक रीति-रिवाज के साथ संपन्न किया गया।
अंधविश्वास बना तस्करी की जड़
वनकर्मियों का कहना है कि भालू के नाखून, दांत और शरीर के अन्य हिस्सों की काला बाजारी के पीछे मुख्य वजह लोगों में फैला अंधविश्वास है। कुछ लोग मानते हैं कि इसे ताबीज़ बनाकर गले में डालने या तिजोरी में संभालकर रखने से सौभाग्य और सुरक्षा मिलती है, जबकि इसका कोई प्रामाणिक आधार नहीं है। यही गलत धारणा अवैध बाजार में इनकी कीमत और मांग बनाए रखती है, और तस्कर इसी कमजोरी का फायदा उठाकर कारोबार चलाते हैं।
कानून में सजा और विभाग की अपील
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भालू अनुसूची-1 के तहत संरक्षित प्रजाति है, इसलिए इसके शरीर का कोई भी हिस्सा अपने पास रखना, इसे बेचना या इसे खरीदना, तीनों कानूनन पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। ऐसा करते पकड़े जाने पर तीन से सात साल तक की कैद और आर्थिक जुर्माना दोनों हो सकता है। विभाग ने आम लोगों से गुज़ारिश की है कि वे अंधविश्वास में आकर ऐसी वस्तुएं न खरीदें, और वन्य जीवों को लेकर किसी भी तरह की संदिग्ध हरकत दिखे तो उसकी जानकारी तुरंत वन विभाग को दें।



















