छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में कंपनी गार्डन के समीप लगने वाली एक चाय की दुकान इन दिनों स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले मुसाफिरों के बीच जबरदस्त चर्चा का केंद्र बनी हुई है। यहां राजेश गुप्ता उर्फ गुड्डू भैया के स्टॉल पर मिलने वाली गरमा-गरम चाय का स्वाद चखने के लिए रोजाना सुबह और शाम के समय बड़ी तादाद में चाय प्रेमी जुट रहे हैं। इस दुकान की सबसे अहम खासियत यह है कि यहां पहले से बड़े बर्तनों में चाय बनाकर या उबालकर नहीं रखी जाती, बल्कि जब भी कोई ग्राहक पहुंचता है तो उसके आर्डर के हिसाब से बिल्कुल ताजा चाय चूल्हे पर चढ़ाई जाती है।
हर कप पर ताजगी और खड़े-खड़े तैयार होती चाय
राजेश गुप्ता उर्फ गुड्डू भैया के अनुसार, उनके काम करने का तरीका बेहद सीधा और पारदर्शी है। वह पहले से थर्मस या केतली में चाय भरकर रखने की व्यवस्था से पूरी तरह परहेज करते हैं। उनका मुख्य ध्येय यही रहता है कि दुकान पर आने वाले हर शख्स को खौलती हुई, एकदम ताजा और भाप उड़ाती चाय का घूंट मिले। चाहे सुबह का पहर हो या ढलती शाम, जैसे ही ग्राहक चाय मांगते हैं, उसी समय नए सिरे से दूध, पानी, चायपत्ती और शक्कर का अनुपात बैठाकर चाय पकाई जाती है।
चार बुनियादी चीजें और पूरे साल अदरक का कड़कपन
इस चाय के नुस्खे में कोई गुप्त या कृत्रिम मसाला शामिल नहीं किया जाता है। गुड्डू भैया बताते हैं कि उनकी चाय में सिर्फ चार बुनियादी सामग्रियां ही काम में लाई जाती हैं, जिनमें शुद्ध दूध, शक्कर, उम्दा चायपत्ती और ताजी अदरक शामिल हैं। कई दुकानों पर अदरक केवल सर्दियों के मौसम में डाली जाती है, लेकिन यहां साल के बारहों महीने हर मौसम में अदरक वाली चाय ही तैयार की जाती है। ग्राहक की नजरों के ठीक सामने ताजी अदरक को कूटकर या घिसकर पतीले में डाला जाता है, जिससे चाय में एक प्राकृतिक कड़कपन और सोंधापन उतर आता है। यही ताजा अंदाज लोगों को नियमित ग्राहक बना देता है।
सुबह-शाम का तय समय और रोजाना 40 लीटर दूध की खपत
दुकान के दैनिक संचालन को लेकर गुड्डू भैया बताते हैं कि उनका स्टॉल दिन में दो पारियों में खुलता है। भोर के समय सुबह करीब 4:30 बजे से दुकान शुरू होकर सुबह 11 बजे तक चलती है। इसके बाद दोपहर का विश्राम लेकर शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक दोबारा दुकान पर चाय का दौर चलता है। इन दोनों ही पारियों में चाय प्रेमियों की अच्छी-खासी रौनक बनी रहती है। चाय की भारी मांग का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोज करीब 40 लीटर दूध की खपत चाय बनाने में हो जाती है।
कॉलेज छात्रों से लेकर दूर-दराज के शहरों तक चर्चा
कंपनी गार्डन की हरियाली में टहलने आने वाले आम नागरिकों के अलावा यहां बिलासपुर के विभिन्न कॉलेजों और सिम्स (SIMS) से जुड़े छात्र-छात्राएं भी नियमित रूप से चाय की चुस्की लेने पहुंचते हैं। गुड्डू भैया का कहना है कि लॉकडाउन के बाद के दौर से उनकी दुकान पर आने वाले ग्राहकों के सिलसिले में लगातार भारी इजाफा हुआ है। आलम यह है कि जबलपुर, इंदौर और मुंबई जैसे दूरदराज के बड़े शहरों से जब भी कुछ लोग बिलासपुर आते हैं और कंपनी गार्डन का रुख करते हैं, तो वे भी इस चाय का स्वाद चखते हैं और दोबारा शहर आने पर यहां जरूर खिंचे चले आते हैं।
रोजाना 1000 से 1500 रुपये तक की शुद्ध बचत
मेहनत और ईमानदारी से किए जा रहे इस काम से अच्छा रोजगार भी निकल रहा है। गुड्डू भैया ने बताया कि दूध, चायपत्ती, शक्कर, अदरक और गैस जैसे सभी रोजमर्रा के जरूरी खर्चों को काटकर उन्हें रोजाना करीब 1000 से 1500 रुपये तक की शुद्ध बचत हो जाती है। चाय की नियमित बिक्री उनके परिवार के भरण-पोषण और कमाई का मजबूत जरिया बन चुकी है, साथ ही साथ शहर भर में उनके स्टॉल का नाम भी प्रतिष्ठित हो रहा है।
ग्राहकों की जुबानी: क्यों खास है यह प्याली
कंपनी गार्डन में चाय का लुत्फ उठाने पहुंचे ग्राहक ओनकार का कहना है कि इस दुकान की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऑन-डिमांड तैयार होना है। ग्राहक जितनी प्याली चाय मांगता है, ठीक उतनी ही मात्रा तुरंत बनाई जाती है। ओनकार के अनुसार यही अनूठा ताजापन इस चाय को बाजार की बाकी चाय से अलग करता है। उनके कई दोस्तों ने भी यहां आकर चाय पी है और सभी इसके मुरीद हो चुके हैं। चाय में मौजूद ताजी अदरक का तीखा और कड़क स्वाद गले को तरोताजा कर देता है, जिसकी वजह से कंपनी गार्डन की सैर करने आने वाले लोग गुड्डू भैया के ठेले पर रुके बिना आगे नहीं बढ़ते।






















