कैलेंडर वर्ष में सर्वाधिक टेस्ट शतक ठोकने का रिकॉर्ड आज भी यूसुफ के नाम, पोंटिंग और सचिन भी रहे अव्वल2 अक्टूबर को चंद्रमा का बुध की राशि में गोचर, इन राशियों की खुलेगी किस्मतरायगढ़ में जलाशय के कैचमेंट क्षेत्र पर अवैध कॉलोनियों का निर्माण, 120 कब्जाधारियों को नोटिसश्राद्ध की थाली में कद्दू का खास स्थान, जानिए पितरों के भोज से जुड़ी सदियों पुरानी परंपराएंदिखने में एक जैसे लगने वाले परिधानों की असल पहचान, बनावट और अवसर के आधार पर समझें फर्कसोने के बढ़ते दामों के बीच दिल्ली के बाजारों में ₹30 से बिक रही बंगाली ज्वेलरी की मांग बढ़ीबदलते मौसम और स्मॉग के बीच चेहरे की चमक कैसे रखें बरकरार, त्वचा रोग विशेषज्ञ ने साझा किए जरूरी सुझावमैदान से बाहर भी जीत दिलाएंगे विराट कोहली के जीवन सिद्धांत, युवाओं के लिए बने 10 बड़े सबकसर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश के आरोपों पर पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा का कड़ा जवाब, प्रक्रिया के तहत सवाल उठाने की दी नसीहतसवाई माधोपुर में वन्यजीव प्रेमियों का तांता, तीन माह बाद शुरू हुई सफारी
खेतों की मेड़ पर बांस का अनोखा जाल लगाकर मछली पकड़ रहे बस्तर के किसान, पांच साल तक चलता है यह पारंपरिक औजारछत्तीसगढ़
1 अक्तू॰ 2026, 8:55 am (56 मिनट पहले)· 0

खेतों की मेड़ पर बांस का अनोखा जाल लगाकर मछली पकड़ रहे बस्तर के किसान, पांच साल तक चलता है यह पारंपरिक औजार

छत्तीसगढ़ के बस्तर में ग्रामीण सूखे बांस से पारंपरिक जाल 'दांदर' बनाकर बरसात के दिनों में खेतों से रोजाना एक किलो तक मछली पकड़ रहे हैं.

छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में मानसून की फुहारों के बीच धान के खेतों में एक अनूठी और पुरानी रिवायत देखने को मिलती है. यहां के किसान बारिश के मौसम में खेतों की मेड़ पर पानी के तेज बहाव के बीच मछली पकड़ने के लिए एक विशेष पारंपरिक उपकरण का इस्तेमाल करते हैं, जिसे स्थानीय भाषा में 'दांदर' कहा जाता है. पूरी तरह से सूखे बांस से तैयार की जाने वाली यह दांदर खेतों की मेड़ों पर ऐसे मुहाने पर बिठा दी जाती है जहां से पानी का निकास होता है. जब तेज बारिश का पानी ऊपर के खेतों से नीचे की ओर बहता है, तो पानी के साथ बहकर आने वाली मछलियां इस ढांचे में सीधी फंस जाती हैं. इस बेहद सादे और कारगर तरीके से ग्रामीण हर रोज आधा किलो से लेकर एक किलो तक ताजी मछलियां बिना किसी अतिरिक्त खर्च के हासिल कर लेते हैं.

कैसे बुनी जाती है गोल और लंबी दांदर

बरसात की शुरुआत होते ही बस्तर के गांव-देहातों में किसान अपने हाथों से दांदर तैयार करने के काम में जुट जाते हैं. पीढ़ियों से इस इलाके के बाशिंदे मछली के शिकार के लिए इसी देसी औजार पर भरोसा करते आए हैं. आकार में यह गोल और कुछ लंबाई लिए हुए एक जालीदार टोकरी जैसी संरचना होती है. इसकी बनावट में सबसे खास बात यह होती है कि इसके बारीक छिद्रों से होकर खेत का पानी तो बड़ी आसानी से पूरा का पूरा बाहर निकल जाता है, लेकिन अंदर दाखिल हुई मछलियां वापस नहीं लौट पातीं. बस्तर के बाशिंदे मछली पकड़ने के लिए बाजार में बिकने वाले नायलॉन के महंगे जालों अथवा प्लास्टिक के उपकरणों पर बिल्कुल निर्भर नहीं रहते, बल्कि अपने आसपास मौजूद प्राकृतिक संसाधनों से खुद ही अपनी जरूरत का सामान गढ़ते हैं.

ये भी पढ़ें

सोनसाय ने साझा की दांदर बनाने की बारीकियां

दांदर तैयार करने में जुटे ग्रामीण सोनसाय ने इसकी बुनाई और लागत से जुड़े अनुभव साझा किए. सोनसाय के अनुसार, इस पूरे जाल को तैयार करने के लिए अच्छी तरह सूखे हुए बांस का इस्तेमाल किया जाता है. आर्थिक नजरिए से देखा जाए तो इसे बनाने में कोई बड़ा खर्च नहीं आता, क्योंकि बांस को पतले और छोटे टुकड़ों में काटकर बड़ी कुशलता से एक-दूसरे के साथ पिरोया जाता है. यदि रोजमर्रा के खेती-बाड़ी के कामों के बीच थोड़ा-थोड़ा फुर्सत का वक्त निकालकर इसे गढ़ा जाए, तो एक मुकम्मल दांदर तैयार करने में लगभग चार से पांच दिन का समय लग जाता है. सोनसाय का कहना है कि सूखी लकड़ी और मजबूत बांस की कमचियों से बनी एक दांदर इतनी टिकाऊ होती है कि वह करीब पांच साल तक बिना टूटे-फूटे लगातार काम करती रहती है.

बुजुर्गों से मिला परंपरागत हुनर और लगाने का तरीका

यह पारंपरिक शिल्प और खेत में इसे लगाने की कला कोई नई नहीं है, बल्कि सोनसाय ने इसे अपने पूर्वजों और परिवार के बड़े-बुजुर्गों को देखकर सीखा है. इस बांस के जाल का पूरा उपयोग केवल वर्षाकाल में ही किया जाता है, जब खेतों में पर्याप्त जलभराव रहता है. किसान इसे खेत के ऊपरी हिस्से या मेड़ के उस कटाव पर मजबूती से जमा देते हैं, जहां से पानी सीधे बहकर निकलता है. जैसे ही पानी की धारा एक खेत की सीमा लांघकर दूसरे निचले खेत में प्रवेश करती है, धार के साथ बहने वाली मछलियां दांदर के भीतर trapped हो जाती हैं और पानी स्वच्छंद होकर आगे निकल जाता है.

सवाल-जवाब

दांदर क्या है और इसका उपयोग किस काम में होता है?
दांदर बांस से बना एक पारंपरिक जालीदार उपकरण है, जिसका इस्तेमाल बस्तर के किसान खेतों की मेड़ पर मछली पकड़ने के लिए करते हैं.
दांदर बनाने में मुख्य रूप से किस सामग्री का उपयोग किया जाता है?
इसे बनाने के लिए पूरी तरह सूखे बांस की पतली और मजबूत कमचियों का उपयोग किया जाता है.
एक दांदर को तैयार करने में कितना समय लगता है?
यदि किसान थोड़ा-थोड़ा समय निकालकर काम करें, तो इसे बनाने में चार से पांच दिन का समय लगता है.
सूखे बांस से बनी एक दांदर कितने समय तक चलती है?
ग्रामीण सोनसाय के अनुसार, सूखे बांस से बनी दांदर लगभग पांच साल तक सुरक्षित और काम करने लायक रहती है.
इस जाल के जरिए एक दिन में कितनी मछली पकड़ी जा सकती है?
इसके माध्यम से किसान एक दिन में आधा किलो से लेकर एक किलो तक मछली आसानी से पकड़ लेते हैं.
दांदर को खेत में किस स्थान पर लगाया जाता है?
इसे खेत के ऊपरी हिस्से और मेड़ के मुहाने पर लगाया जाता है, ताकि बहता हुआ पानी इसके बीच से होकर निकले.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·2 मिनट पहले

बस्तर के किसानों का यह देसी जुगाड़ वाकई कमाल का है। बिना एक भी पैसा खर्च किए बांस से पांच साल तक चलने वाला जाल बना लेना लोकल इकॉनमी और सस्टेनेबिलिटी का बेहतरीन उदाहरण है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 मिनट पहले

रविकेश, बात तो तुम्हारी ठीक है पर क्या लगातार ऐसे इस्तेमाल से बस्तर के जंगलों में बांस की उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ता होगा?

Rohan Verma@rohan-verma·25 मिनट पहले

कम खर्च में पारंपरिक जुगाड़ से मछली पकड़ने का यह तरीका वाकई गजब है, बस्तर के किसानों की सोच कमाल की है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 मिनट पहले

रोहन भाई, एकदम सही कहा आपने। बस्तर के किसानों का यह पारंपरिक बांस का जुगाड़ बिना एक भी पैसा खर्च किए प्रकृति के साथ जीने का बेहतरीन उदाहरण है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp