हरियाणा में ऑनलाइन निवेश और क्रिप्टो के नाम पर करोड़ों की ठगी, रेहड़ी वाले से लग्जरी कारों के मालिक बने जालसाज समेत चार गिरफ्तारउत्तर प्रदेश के भदोही का नाम संत रविदास नगर भदोही करने का ऐलान, 1340 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की सौगातबिना जहर और रसायनों के घर से चूहों और छछूंदरों को कैसे रखें दूरक्रिप्टो पर रिजर्व बैंक का रुख बेहद सावधान, केंद्रीय बैंक गवर्नर ने टेक्नोलॉजी इनोवेशन और मौद्रिक संप्रभुता पर रखी स्पष्ट रायमुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर: साबरमती नदी पर 12 मंजिला इमारत जितना ऊंचा पुल बनकर तैयारमेटा ग्लासेस नोवा में कॉल नॉइज़ कैंसिलेशन दमदार, लेकिन एआई असिस्टेंट अब भी अधूराबिना पेटीकोट के साड़ी ड्रेप करने के आसान तरीके, वार्डरोब में मौजूद इन कपड़ों से पाएं शानदार स्टाइलगोपालपुरा के कोचिंग सेंटर में छात्र को पीटने पर फूटा गुस्सा, सड़क पर उतरे युवानीतू कपूर ने पैपराजी के बैक शॉट मांगने पर ली चुटकी, गाड़ी में बैठने से पहले पूछा तीखा सवालसंजय लीला भंसाली की 'देवदास' में चुन्नीलाल का रोल कई सितारों ने ठुकराया था, जैकी श्रॉफ ने बताई हामी भरने की वजह
जितिया पर सरगुजा में महकी पारंपरिक गुजिया, दो दशक से मिठास घोल रहा गुप्ता परिवारछत्तीसगढ़
4 अक्तू॰ 2026, 4:26 pm (30 मिनट पहले)· 0

जितिया पर सरगुजा में महकी पारंपरिक गुजिया, दो दशक से मिठास घोल रहा गुप्ता परिवार

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में जितिया पर्व के मौके पर पारंपरिक गुजिया की मांग काफी बढ़ गई है, जहां यश गुप्ता का परिवार बीते 20 से 25 वर्षों से घर पर ही इसे तैयार कर थोक व्यापारियों तक पहुंचा रहा है।

छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल में जितिया पर्व की दस्तक के साथ ही स्थानीय बाजारों में पारंपरिक मिठास की हलचल तेज हो चुकी है। इस लोकपर्व पर पारंपरिक पकवान गुजिया की भारी मांग निकलती है, जिसे पूरा करने के लिए एक स्थानीय परिवार बीते दो से ढाई दशकों से पूरी निष्ठा के साथ जुटा हुआ है। यश गुप्ता का परिवार पिछले 20 से 25 सालों से जितिया के आगमन पर अपने घर में ही पारंपरिक देशी विधि से गुजिया तैयार करने का काम कर रहा है। घरेलू स्तर पर तैयार होने वाली इस पारंपरिक मिठाई की मांग इतनी रहती है कि इसे इलाके के बड़े थोक व्यापारियों तक को आपूर्ति किया जाता है, जिससे पर्व के इस दौर में परिवार को एक बेहतर आय भी मिल जाती है।

पारंपरिक विधि और खास भरावन का तरीका

इस मिठाई को बनाने के पूरे हुनर और प्रक्रिया पर बात करते हुए यश गुप्ता ने बताया कि गुजिया तैयार करने की शुरुआत सबसे पहले पानी को हल्का गर्म करने से होती है। इसके बाद मैदे में डालडा और अन्य जरूरी सामग्री को सही अनुपात में मिलाकर उसे बहुत सलीके से गूंथा जाता है। जब मैदा पूरी तरह तैयार हो जाता है, तब उसकी छोटी-छोटी लोइयां काटी जाती हैं और उन्हें बेलकर पतली पूरियां बनाई जाती हैं। इसके बाद इन पूरियों के बीच में खोवा भरकर उन्हें पारंपरिक गुजिया का सुंदर आकार दिया जाता है।

ये भी पढ़ें

गुजिया के भीतर भरी जाने वाली मुख्य सामग्री विशुद्ध खोवा ही होती है। हालांकि, यश गुप्ता के अनुसार यदि किसी खरीदार को मेवे पसंद होते हैं, तो उसकी मांग पर भरावन में काजू भी मिलाया जाता है। इस पारंपरिक मिठास में क्या सामग्री शामिल की जाएगी, यह काफी हद तक ग्राहकों की व्यक्तिगत पसंद और उनके स्वाद पर निर्भर करता है।

त्योहारी सीजन में तैयारी और अच्छी आमदनी

मिठाई तैयार करने में लगने वाली मेहनत और समय को लेकर यश गुप्ता ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया तैयार की जाने वाली मात्रा पर टिकी होती है। यदि कम मात्रा में गुजिया बनानी हो तो यह काम करीब एक घंटे के भीतर पूरा हो जाता है, लेकिन जब ऑर्डर बड़े हों और थोक में तैयारी करनी हो, तो पूरा दिन भी लग जाता है। सबसे अधिक मांग तीज और जितिया पर्व के समय देखने को मिलती है, क्योंकि जितिया में गुजिया को अनिवार्य रूप से प्रसाद के तौर पर अर्पित किया जाता है। मांग के इसी दबाव को देखते हुए पर्व शुरू होने से लगभग 5 से 10 दिन पहले से ही गुजिया बनाने की तैयारी शुरू कर दी जाती है।

बीते 20 से 25 वर्षों से निरंतर यह कार्य कर रहे यश गुप्ता का एक खास व्यापारिक नियम भी है। उनका कहना है कि वे ग्राहकों को पहले गुजिया चखाते हैं, और जब उसका स्वाद खरीदार को भा जाता है, तभी बिक्री की जाती है। इस पर्व के पूरे सीजन में गुजिया की सफल बिक्री के जरिए परिवार 20 हजार रुपये तक की शुद्ध कमाई आसानी से कर लेता है।

सवाल-जवाब

सरगुजा में जितिया पर्व पर किस पारंपरिक पकवान की मांग सबसे ज्यादा रहती है?
सरगुजा में जितिया पर्व के मौके पर पारंपरिक मिठाई गुजिया की सबसे अधिक मांग रहती है।
यश गुप्ता का परिवार कितने समय से गुजिया बनाने का काम कर रहा है?
यश गुप्ता का परिवार पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार जितिया के सीजन में गुजिया तैयार कर रहा है।
गुजिया के भरावन में कौन-सी मुख्य सामग्री इस्तेमाल की जाती है?
गुजिया के भरावन में मुख्य रूप से खोवा इस्तेमाल होता है, और ग्राहक की मांग पर काजू भी डाला जाता है।
गुजिया बनाने का काम पर्व से कितने दिन पहले शुरू कर दिया जाता है?
भारी मांग को देखते हुए जितिया पर्व से लगभग 5 से 10 दिन पहले ही गुजिया बनाने की तैयारी शुरू कर दी जाती है।
गुजिया बनाने में कितना समय लगता है?
कम मात्रा में गुजिया करीब एक घंटे में बन जाती है, जबकि ज्यादा मात्रा होने पर पूरा दिन भी लग सकता है।
इस सीजन में गुजिया बेचकर परिवार कितनी कमाई कर लेता है?
सीजन के दौरान बिक्री के बाद परिवार 20 हजार रुपये तक की कमाई कर लेता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·16 मिनट पहले

जितिया पर ऐसी ताजी और शुद्ध गुजिया खाने को मिल जाए तो त्यौहार का मज़ा ही दोगुना हो जाता है। गुप्ता जी जिस तरह पहले चखाकर बेचते हैं, उससे भरोसा भी बढ़ता है और स्वाद भी याद रहता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 मिनट पहले

रोहन भाई, बात तो सही है पर बीस साल से एक ही घर में बन रही चीज़ पर सीधे आंख मूंदकर भरोसा कैसे कर लें? बिना जांचे-परखे किसी भी खाने पर यकीन करना थोड़ा मुश्किल है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp