उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में जितिया पर्व की पारंपरिक तैयारियों के दौरान एक बड़ा खाद्य विषाक्तता का मामला सामने आया है। व्रत से पूर्व मडुआ यानी रागी के आटे से तैयार पकवान खाने के बाद दर्जनों लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हैं, साथ ही पुरुष और बच्चे भी इसकी चपेट में आए हैं। प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक कुल 49 लोगों को अलग-अलग स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जिनमें से तीन महिलाओं की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। घटना की गंभीरता को देखते हुए जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने तुरंत अस्पतालों और प्रभावित गांवों का मुआयना किया।
स्वास्थ्य केंद्रों में भर्ती मरीजों का ब्योरा और इलाज की व्यवस्था
प्रशासनिक अधिकारियों ने चिकित्सालयों का दौरा कर मरीजों को दी जा रही आपातकालीन सुविधाओं की समीक्षा की। कुल 49 बीमार लोगों में से 43 मरीजों को सीधे जिला अस्पताल में दाखिल कराया गया है। इसके अलावा तीन मरीजों का इलाज बांसडीह स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रहा है, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को जिला मुख्यालय के एक निजी अस्पताल में उपचार दिया जा रहा है। सूचना विभाग की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, नाजुक हालत वाली तीन महिलाओं की लगातार निगरानी के लिए चिकित्सकों का एक विशेष दल तैनात किया गया है।
शुरुआती दौर में मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एस. के. यादव ने स्थिति की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया था कि प्रभावित महिलाओं को तुरंत आवश्यक उपचार मुहैया कराया जा रहा है। उस वक्त जिला अस्पताल में करीब 20 महिलाओं की देखरेख की जा रही थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मेडिकल टीम पूरी तरह सतर्क है और मरीजों की स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए लगातार काम कर रही है।
परंपरा, प्रसाद वितरण और अचानक बिगड़ी तबीयत
यह मामला मुख्य रूप से बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले छाता गांव और बांसडीह तहसील के चोकन एवं आसचौरा गांवों से जुड़ा हुआ है। हिंदू पंचांग के अनुसार जितिया अथवा जीवित्पुत्रिका व्रत का माताओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व है। इस दिन महिलाएं अपनी संतानों की लंबी आयु, बेहतर सेहत और मंगलमय जीवन की कामना के साथ कठिन निर्जला उपवास रखती हैं। इस व्रत की शुरुआत से पहले पारम्परिक रूप से मडुआ या रागी के आटे की रोटियां बनाकर सतपुतिया की सब्जी के साथ ग्रहण करने का चलन है। इसी रीति के तहत ग्रामीणों ने भोजन और प्रसाद तैयार किया था।
परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित परिवारों ने मडुआ का आटा स्थानीय दुकानदार सोनू वर्मा के यहां से खरीदा था। इसी सामग्री से घरों में रोटियां और अन्य व्यंजन बनाए गए और आस-पड़ोस में प्रसाद स्वरूप वितरित किए गए। भोजन करने के कुछ ही देर बाद लोगों को शारीरिक असहजता और तेज दर्द की शिकायत होने लगी। छाता गांव के निवासी पंकज कुमार ने बताया कि लगभग 30 से 35 महिलाओं और पांच बच्चों ने रागी के बने उत्पाद खाए थे, जिसके फौरन बाद उनके शरीर में असामान्य कंपन और कंपकंपी शुरू हो गई। देखते ही देखते कई महिलाएं अचेत होकर गिर पड़ीं। अस्पताल के बिस्तर पर उपचाराधीन महिला माधुरी ने भी पुष्टि की कि मडुआ से बनी सामग्री खाते ही उनकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी थी।
अधिकारियों का दौरा और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण
मामले की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह जिला अस्पताल पहुंचे और वार्डों में जाकर पीड़ित मरीजों का हालचाल जाना। जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद चिकित्सकों को स्पष्ट हिदायत दी कि प्रत्येक मरीज को उच्च गुणवत्ता वाला उपचार मिलना चाहिए और किसी भी स्तर पर चिकित्सीय लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह और पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह सीधे प्रभावित गांवों में पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों और ग्रामीणों से सीधे बातचीत कर भोजन पकाने, आटा खरीदने और लक्षण उभरने के पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी एकत्र की।
खाद्य सुरक्षा विभाग का छापा और नमूनों की जांच
विषाक्तता का सही स्रोत तलाशने के लिए जिला प्रशासन ने खाद्य सुरक्षा विभाग की विशेष टीम को संबंधित क्षेत्र में रवाना किया। जांच अधिकारियों ने सोनू वर्मा की दुकान समेत प्रभावित घरों से मडुआ के आटे और तैयार खाद्य पदार्थों के नमूने जब्त कर प्रयोगशाला विश्लेषण के लिए भेजे हैं। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि यह दूषित खाद्यान्न का मामला है और जांच में जो भी व्यक्ति अथवा व्यापारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विधिक प्रावधानों के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन पूरे इलाके पर कड़ी निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी अन्य व्यक्ति में लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सीय सहायता दी जा सके।
मरीजों के आंकड़ों पर सामने आया अंतर
अस्पताल में भर्ती मरीजों से मिलने पहुंचीं बांसडीह विधानसभा क्षेत्र की बीजेपी विधायक केतकी सिंह ने भी पीड़ितों की सुध ली। मरीजों और उनके तीमारदारों से मुलाकात के बाद विधायक ने यह आशंका जताई कि विषाक्त भोजन से प्रभावित होने वाले ग्रामीणों की कुल तादाद 70 तक पहुंच सकती है। हालांकि जिला प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में केवल 49 लोग ही पंजीकृत और भर्ती हैं। प्रशासन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग पूरी सूची पर नजर बनाए हुए है और प्राथमिक उपचार के बाद घर लौटने वालों की भी जांच की जा रही है। प्रयोगशाला से आटे की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस विषाक्तता के वास्तविक रासायनिक या जैविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।





















