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धमतरी में प्रकाश आडवाणी और कौवों का 24 साल पुराना दोस्ताना, छत पर जुटते हैं सैकड़ों पक्षीछत्तीसगढ़
5 अक्तू॰ 2026, 2:16 pm (11 मिनट पहले)· 0

धमतरी में प्रकाश आडवाणी और कौवों का 24 साल पुराना दोस्ताना, छत पर जुटते हैं सैकड़ों पक्षी

धमतरी के कपड़ा कारोबारी प्रकाश आडवाणी पिछले 24 वर्षों से रोजाना अपनी छत पर सैकड़ों कौवों को दाना खिला रहे हैं। पितृपक्ष के दौरान दूरदराज से आने वाले काले कौवे भी महीनों तक उनके घर डेरा डालते हैं।

इंसानों और बेजुबान परिंदों के बीच स्नेह की कहानियां अक्सर दिल को छू जाती हैं। छत्तीसगढ़ के धमतरी में एक ऐसा ही अनूठा रिश्ता देखने को मिल रहा है, जहां एक सामान्य दुकानदार और पक्षियों के बीच का लगाव पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। धमतरी शहर के निवासी प्रकाश आडवाणी बीते 24 वर्षों से लगातार पक्षियों की सेवा में जुटे हैं। उनकी सुबह किसी औपचारिक दिनचर्या से नहीं, बल्कि अपनी छत पर जुटने वाले सैकड़ों कौवों के साथ शुरू होती है। यह सिलसिला ढाई दशक से चला आ रहा है और समय के साथ यह बंधन और अधिक गहरा होता गया है।

कपड़ा दुकान की कमाई और परिंदों की सेवा

धमतरी नगर के गणेश चौक क्षेत्र में रहने वाले प्रकाश आडवाणी गोल बाजार में कपड़े की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। इसी दुकान के कारोबार से वह अपने पूरे परिवार का भरण पोषण करते हैं। सीमित आमदनी होने के बावजूद, वह अपनी कमाई का एक तय हिस्सा रोजाना इन पक्षियों के खानपान पर खर्च करते हैं। हर सुबह प्रकाश समय से पहले तैयार हो जाते हैं ताकि छत पर आने वाले अपने पंखदार साथियों को उनकी पसंदीदा चीजें खिला सकें। वे अपने हाथों से परिंदों को दाना चुगाते हैं, और पक्षी भी बिना किसी डर के उनके बेहद करीब आकर दाना खाते हैं।

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पितृपक्ष में परदेसी काले कौवों का आगमन

इस अटूट दोस्ती का सबसे अनोखा पहलू साल के एक खास समय में सामने आता है। हर वर्ष जब पितृपक्ष का समय शुरू होता है, तब प्रकाश की छत पर स्थानीय पक्षियों के अलावा परदेसी काले कौवे भी बड़ी तादाद में पहुंचने लगते हैं। ये प्रवासी कौवे करीब दो से तीन महीने तक धमतरी में प्रकाश के घर के आसपास ही डेरा डाले रहते हैं। इस पूरी अवधि में वे नियमित रूप से दाना चुगते हैं और फिर समय पूरा होने पर कहीं दूर चले जाते हैं। स्थानीय लोग इस नियमित आवाजाही और पंछियों के सटीक समय चक्र को देखकर दंग रह जाते हैं।

परिवार का विरोध बदला सम्मान में, पर्यावरण की चिंता

शुरुआती दिनों में प्रकाश के इस शौक और खर्च को लेकर घर के सदस्यों में थोड़ी नाराजगी देखने को मिली थी। परिजनों को लगता था कि सीमित आय का एक हिस्सा इस तरह नियमित खर्च करना सही नहीं है। हालांकि, प्रकाश के अटूट समर्पण और पक्षियों के प्रति उनके सच्चे प्रेम को देखकर धीरे-धीरे परिवार की सोच बदल गई। अब पूरा परिवार उनकी भावनाओं का आदर करता है और इस नेक काम में उनका साथ देता है। प्रकाश अक्सर बढ़ते प्रदूषण को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करते हैं। धमतरी शहर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर की वजह से आम तौर पर कौवे अन्य जगहों पर बहुत कम नजर आते हैं, लेकिन प्रकाश के घर की छत पर रोज सुबह सैकड़ों की संख्या में उनका जुटना पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों को गहरी प्रेरणा दे रहा है।

सवाल-जवाब

प्रकाश आडवाणी कौन हैं और वे कहां रहते हैं?
प्रकाश आडवाणी छत्तीसगढ़ के धमतरी शहर के गणेश चौक निवासी हैं और गोल बाजार में कपड़े की दुकान चलाते हैं।
प्रकाश आडवाणी और कौवों के बीच यह दोस्ती कितने वर्षों से चल रही है?
यह सिलसिला और पक्षियों से उनका दोस्ताना पिछले 24 सालों से लगातार चल रहा है।
प्रकाश आडवाणी पक्षियों के भोजन का खर्च कैसे उठाते हैं?
वे अपनी कपड़े की छोटी दुकान से होने वाली आमदनी का एक हिस्सा पक्षियों के खानपान पर खर्च करते हैं।
पितृपक्ष के दौरान प्रकाश के घर पर क्या विशेष बदलाव देखा जाता है?
पितृपक्ष में परदेसी काले कौवे भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और दो से तीन महीने तक वहीं रहकर दाना चुगते हैं।
शुरुआत में प्रकाश के परिवार की क्या प्रतिक्रिया थी?
शुरुआत में परिवार वाले इस खर्च पर नाराज हुए थे, लेकिन बाद में उनके समर्पण को देखकर उनकी भावनाओं का सम्मान करने लगे।
धमतरी शहर में कौवों की स्थिति को लेकर क्या बात सामने आई है?
प्रदूषण के कारण धमतरी में आम तौर पर कौवे अन्य जगहों पर दिखाई नहीं देते, लेकिन प्रकाश की छत पर सैकड़ों की संख्या में जुटते हैं।
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