चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में उस रविवार सुबह माहौल बेहद अलग था। तमिलनाडु क्रिकेट संघ ने स्टेडियम के सी, डी और ई ब्लॉक के स्टैंड्स दर्शकों के लिए मुफ्त किए थे, लेकिन प्रबंधन को शायद यह अंदाजा नहीं था कि पंद्रह साल के एक युवा खिलाड़ी की महज एक झलक पाने के लिए लगभग बारह हजार लोग मैदान की तरफ खिंचे चले आएंगे। जब वह खिलाड़ी बाउंड्री लाइन के पास दर्शकों का अभिवादन करने पहुंचे, तो स्टैंड्स में गूंजता ‘वैभव भाई, वैभव जी, वैभव’ का शोर पूरे मैदान पर छा गया। घरेलू क्रिकेट में इस तरह का जनसैलाब और दीवानगी अब दुर्लभ मानी जाती है। इससे पहले ऐसा नजारा तीस जनवरी दो हजार पच्चीस को देखा गया था, जब विराट कोहली पूरे बारह साल के लंबे अंतराल के बाद रणजी ट्रॉफी में दिल्ली की ओर से खेलने उतरे थे। उससे भी पीछे जाएं, तो दो हजार तेरह में लाहली के मैदान पर सचिन तेंदुलकर के आखिरी प्रथम श्रेणी मैच की याद ताजा हो जाती है, जहां अपने आदर्श की एक आखिरी झलक पाने के लिए करीब पंद्रह हजार प्रशंसक पहुंचे थे। हालांकि अभी वह उन दिग्गज खिलाड़ियों की श्रेणी में नहीं पहुंचे हैं, लेकिन आईपीएल के मुकाबलों में उनके बल्ले से निकली तूफानी पारियों ने उन्हें रातों-रात उस मुकाम पर पहुंचा दिया है जो बेहद चुनिंदा खिलाड़ियों को ही नसीब होता है।
क्रिकेट जगत के दिग्गजों की जुबानी
वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा के कायल दुनिया भर के बड़े खिलाड़ी हो चुके हैं। इंग्लैंड के धाकड़ बल्लेबाज जोस बटलर का मानना है कि यह युवा खिलाड़ी टी-आठ (T20) क्रिकेट के तमाम पुराने रिकॉर्ड्स को तोड़ने के इरादे से ही मैदान पर उतरता है। वहीं, भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज कृष्णमाचारी श्रीकांत को पूरा भरोसा है कि बिहार का यह उभरता हुआ सितारा आने वाले समय में टेस्ट क्रिकेट को एक नई ऊर्जा और दिशा देगा। इसके अलावा पूर्वी क्षेत्र के कप्तान इशान किशन भी मानते हैं कि यह पंद्रह साल का लड़का अपनी उम्र से कहीं ज्यादा समझदार है और अपने करियर के उतार-चढ़ाव को भली-भांति समझता है। मैदान के बाहर शांत और सरल दिखने वाले इस खिलाड़ी के भीतर एक बेहद निडर और आक्रामक बल्लेबाज छिपा है, जिसकी झलक अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों के सामने साफ दिखाई देती है।
मोहम्मद सिराज के खिलाफ आक्रामक तेवर
मुकाबले के शुरुआती सत्र में अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज और एमडी निधीश की जोड़ी ने वैभव को अपनी तेज और उछाल भरी गेंदों से आजमाने की पूरी कोशिश की। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने बेहद परिपक्वता दिखाते हुए शुरुआत में उन खतरनाक गेंदों को या तो जाने दिया या रक्षात्मक तरीके से खेला। जब शुरुआती रणनीति कारगर साबित नहीं हुई, तो हैदराबाद के अनुभवी गेंदबाज सिराज ने अपनी गेंदबाजी के आक्रामकता को बदलते हुए थोड़ा आगे गेंद डालनी शुरू की। यह वही क्षेत्र था जहां यह युवा बल्लेबाज अपने शॉट खेलना पसंद करता था। इसका पूरा फायदा उठाते हुए उन्होंने सिराज के एक ही ओवर में दो शानदार चौके और एक लंबा छक्का जड़ दिया। जो खिलाड़ी शुरुआती चौदह गेंदों में केवल ग्यारह रन बनाकर संभल कर खेल रहा था, उसने तेजी से हाथ खोलते हुए मात्र चौबीस गेंदों में चौंतीस रन बना डाले। मैदान पर उनका यह नब्बे मिनट से ज्यादा का जादुई सफर आखिरकार तब रुका जब सीवी मिलिंद की गेंद पर पुल शॉट खेलने के प्रयास में वह डीप में तैनात स्थानापन्न खिलाड़ी तनय त्यागराजन को कैच दे बैठे।
मैदान के बाहर और खेल के बाद का क्रेज
वैभव के आउट होकर पवेलियन लौटने के बाद भी दीवाने फैंस अपनी जगह से हिलने को तैयार नहीं थे। पूरे दिन का खेल समाप्त होने तक दर्शक लगातार उनका नाम लेकर नारे लगाते रहे। मैच खत्म होने के बाद इस युवा खिलाड़ी ने भी निराश नहीं किया और खुद बाउंड्री के पास जाकर उन उत्साहित प्रशंसकों के साथ कुछ खास पल साझा किए। घरेलू सर्किट में इस तरह का उत्साह इस बात का गवाह है कि आने वाले समय में यह युवा खिलाड़ी भारतीय क्रिकेट का एक बड़ा चेहरा बनने की पूरी क्षमता रखता है।


















