साउथ अफ्रीका दौरे पर टेस्ट श्रृंखला का आगाज करने जा रही ऑस्ट्रेलियाई टीम के सामने शुरुआती मुकाबले से ठीक पहले टीम संयोजन को लेकर बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। डरबन में 9 अक्टूबर से निर्धारित पहले टेस्ट मुकाबले से स्टार ऑलराउंडर कैमरून ग्रीन के बाहर होने की नौबत आ सकती है। पेट की मांसपेशियों में आए गंभीर खिंचाव के कारण वे वर्तमान में खेल से दूर हैं और फिटनेस हासिल करने की जद्दोजहद में जुटे हैं। मुकाबले के शुरू होने तक यदि वे शत-प्रतिशत मैच फिटनेस साबित नहीं कर पाते हैं, तो प्रबंधन को अंतिम एकादश में किसी अन्य विकल्प पर भरोसा जताना होगा। टीम संतुलन में ग्रीन की दोहरी भूमिका बेहद अहम रहती है, जिससे उनका उपलब्ध न होना टीम के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
तैयारी मैच से दूर रहे ऑलराउंडर, केवल हल्की ट्रेनिंग तक सीमित
ग्रीन की यह शारीरिक समस्या पिछले महीने साउथ अफ्रीका के विरुद्ध खेले गए तीसरे वनडे मुकाबले के दौरान सामने आई थी, जब एक हुक शॉट लगाते वक्त वे दर्द से कराह उठे थे। उस घटना के बाद से ही उनका पूरा ध्यान पहले टेस्ट तक खुद को मैदान पर उतारने लायक बनाने पर केंद्रित रहा है। इसके बावजूद वे पॉचेफस्ट्रूम में आयोजित टीम के दो दिवसीय अभ्यास मैच में भाग नहीं ले सके। वार्म-अप मैच के दौरान उन्हें मैदान पर केवल हल्की-फुल्की फिटनेस ड्रिल्स करते ही देखा गया, जो यह दर्शाता है कि वे अभी कड़े मुकाबले का भार उठाने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
यह फिटनेस समस्या ऐसे मोड़ पर आई है जब ऑस्ट्रेलियाई हरफनमौला खिलाड़ी बेहद शानदार लय में चल रहे थे। हाल ही में डार्विन में बांग्लादेश के विरुद्ध खेले गए टेस्ट मैच में उन्होंने बल्ले से एक यादगार शतकीय पारी खेली थी। इतना ही नहीं, उस पूरी श्रृंखला के दौरान वे अनुभवी बल्लेबाज स्टीव स्मिथ के साथ सबसे अधिक रन बटोरने वाले प्रमुख खिलाड़ियों में शुमार रहे थे। ऐसे में शीर्ष फॉर्म वाले खिलाड़ी का मैदान से बाहर बैठना टीम की बल्लेबाजी गहराई को सीधे प्रभावित करेगा।
चोट का तिहरा असर और कूपर कोनोली का उभरता विकल्प
पेट के इस खिंचाव से पहले भी ग्रीन पूरी तरह सहज नहीं थे। हालिया वनडे मुकाबलों के दौरान वे कंधे की तकलीफ से जूझ रहे थे, जिसके चलते वे अपनी सामान्य गति और पूरी ताकत के साथ गेंदबाजी के ओवर पूरे करने में असमर्थ दिखाई दे रहे थे। अब पेट की मांसपेशियों की चोट उनके खेल के तीनों प्रमुख पहलुओं को एक साथ चोट पहुंचा रही है, जिसमें आक्रामक बल्लेबाजी, तेज गेंदबाजी और मैदान पर डाइविंग फील्डिंग शामिल है।
यदि वे डरबन टेस्ट से बाहर बैठते हैं, तो उनकी खाली जगह को भरने के लिए युवा खिलाड़ी कूपर कोनोली को अंतिम एकादश में शामिल किए जाने की प्रबल संभावना है। ऐसी स्थिति में ग्रीन की नजरें पूरी तरह स्वस्थ होकर श्रृंखला के दूसरे या तीसरे टेस्ट मैच के जरिए मैदान पर वापसी करने पर टिकी रहेंगी।
डरबन की परिस्थितियों में कोनोली का ऑलराउंड कौशल
कूपर कोनोली ने अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी मौजूदगी पिछले साल की शुरुआत में श्रीलंका के विरुद्ध पहले मुकाबले से दर्ज कराई थी। डरबन के मैदान की पिच ऐतिहासिक रूप से धीमी गति के गेंदबाजों और स्पिनरों को टर्न कराने में खासी मददगार साबित होती है। इस संदर्भ में कोनोली की मौजूदगी ऑस्ट्रेलियाई दल को बेहतर रणनीतिक संतुलन दे सकती है। वे मध्यक्रम में ठोस बल्लेबाजी का विकल्प देने के अलावा बाएं हाथ की उपयोगी स्पिन गेंदबाजी कराने में सक्षम हैं। यदि 9 अक्टूबर को उन्हें टेस्ट कैप पहनने का अवसर मिलता है, तो वे गेंद और बल्ले दोनों से अपनी उपयोगिता सिद्ध करने का पूरा प्रयास करेंगे।



















