भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की बेखौफ और आक्रामक बल्लेबाजी शैली की जमकर तारीफ की है। सहवाग का मानना है कि मैदान पर उतरते ही पहली ही गेंद पर प्रहार करने की सूर्यवंशी की मानसिकता सीधे तौर पर उनके अपने खेल के दिनों की याद दिलाती है। सहवाग के अनुसार यह निडर अंदाज ही इस युवा प्रतिभा को अन्य समकालीन खिलाड़ियों से अलग कतार में खड़ा करता है, और यदि यह लय बरकरार रही तो सूर्यवंशी लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर अपनी मजबूत छाप छोड़ सकते हैं।
युवा बल्लेबाज के खेल में सहवाग को दिखी अपनी आक्रामकता
पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के एक कार्यक्रम में 10 अक्टूबर को बातचीत के दौरान वीरेंद्र सहवाग ने वैभव सूर्यवंशी की वर्तमान फॉर्म और उनके खेल के दृष्टिकोण पर विस्तार से बात की। सहवाग ने स्पष्ट किया कि सूर्यवंशी इस समय अपने खेल के शीर्ष दौर से गुजर रहे हैं और उनकी आक्रामक सोच काफी हद तक उनकी खुद की बल्लेबाजी शैली से मेल खाती है। पहली गेंद से ही बड़े शॉट लगाने का इरादा रखना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए असाधारण आत्मविश्वास की निशानी है।
सहवाग ने कहा कि अब क्रिकेट प्रेमियों और चयनकर्ताओं के लिए यह देखना काफी दिलचस्प रहेगा कि इस युवा बल्लेबाज को राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनने का अवसर कब मिलता है। इसके साथ ही यह भी देखने वाली बात होगी कि वे अपने पूरे अंतरराष्ट्रीय सफर में कितने मुकाबले खेलने में सफल रहते हैं। सहवाग को विश्वास है कि अपनी स्वाभाविक ताकत और आक्रामकता के दम पर यह खिलाड़ी उच्च स्तर पर भी गेंदबाजों के लिए निरंतर चुनौती बना रह सकता है।
उम्र के मुकाबले केवल मैदान का प्रदर्शन ही तय करता है खिलाड़ी का स्तर
क्रिकेट में खिलाड़ियों की आयु को लेकर उठने वाली बहसों पर वीरेंद्र सहवाग ने दो टूक शब्दों में अपनी स्थिति साफ की। उनका मानना है कि आयु वर्ग की प्रतियोगिताओं में तो नियमों का पालन जरूरी होता है, लेकिन जब बात इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल या फिर सीनियर भारतीय राष्ट्रीय टीम की आती है, तब उम्र का कोई पैमाना मायने नहीं रखता। उच्च स्तर पर केवल और केवल खिलाड़ी का व्यक्तिगत प्रदर्शन ही चयन और सफलता का एकमात्र आधार बनता है।
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए सहवाग ने वर्तमान भारतीय क्रिकेट परिदृश्य का उदाहरण पेश किया। उन्होंने रेखांकित किया कि शीर्ष स्तर के पेशेवर क्रिकेट में एक तरफ जहां 38 से 40 वर्ष की आयु वाले विराट कोहली अपनी पूरी ऊर्जा के साथ खेल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महज 15 वर्ष के वैभव सूर्यवंशी भी मैदान पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। ऐसे में यह पूरी तरह सिद्ध होता है कि स्कोरबोर्ड पर रन बनाना और मैच जिताना ही अंतिम पैमाना है, न कि जन्म प्रमाण पत्र पर दर्ज साल।
शुभमन गिल के ऐतिहासिक रिकॉर्ड और बुमराह की महत्ता पर चर्चा
इसी आयोजन में सहवाग ने भारतीय कप्तान शुभमन गिल के हालिया असाधारण प्रदर्शन की भी सराहना की। गिल ने हाल ही में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलते हुए 223 रनों की तूफानी दोहरी शतकीय पारी खेली थी, जो वनडे इतिहास की सबसे तेज डबल सेंचुरी मानी गई। इसके अलावा उन्होंने पिछले साल इंग्लैंड के दौरे पर 700 से अधिक रन जुटाकर दिग्गज सुनील गावस्कर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया था। सहवाग ने कहा कि गिल इस समय अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ लय में हैं और इस निरंतरता के साथ इतना भारी स्कोर खड़ा करना किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान काम नहीं होता।
आगामी 2027 वनडे विश्व कप की संभावनाओं पर नजर डालते हुए सहवाग ने भारतीय टीम की खिताबी उम्मीदों को काफी मजबूत बताया। उन्होंने तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को टीम इंडिया का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज करार दिया। सहवाग का स्पष्ट आकलन है कि टूर्नामेंट जीतने के लिए मजबूत गेंदबाजी आक्रमण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि बुमराह 2027 के विश्व कप में पूरी तरह फिट होकर मैदान पर उतरते हैं, तो भारतीय टीम के चैंपियन बनने के अवसर काफी बढ़ जाएंगे।

















