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पश्चिम एशिया कूटनीति और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में सतर्कता, यूरो और वैश्विक मुद्राओं की चाल सुस्तबाज़ार
22 सित॰ 2026, 8:57 pm (35 मिनट पहले)· 0

पश्चिम एशिया कूटनीति और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख के बीच विदेशी मुद्रा बाजार में सतर्कता, यूरो और वैश्विक मुद्राओं की चाल सुस्त

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी और ईरानी नेतृत्व के बीच संभावित बातचीत के संकेतों तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती के अनुमानों के चलते मुद्रा बाजार में मिलाजुला रुख देखा जा रहा है। यूरो, जापानी येन, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और सोने के भाव पर वैश्विक नीतिगत फैसलों का व्यापक असर देखने को मिल रहा है।

वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय अनिश्चितता और सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जहां पश्चिमी एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रम और प्रमुख केंद्रीय बैंकों के मौद्रिक नीतिगत दृष्टिकोण विनिमय दरों की दिशा तय कर रहे हैं। विदेशी मुद्रा बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। अमेरिका और ईरान के बीच नए कूटनीतिक संपर्कों के संकेतों ने अमेरिकी डॉलर की आक्रामक मांग को कुछ हद तक धीमा किया है, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में अतिरिक्त वृद्धि की संभावनाओं ने अमेरिकी मुद्रा को मजबूत समर्थन प्रदान कर रखा है। दूसरी ओर, यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सख्त नीतिगत रुख के बावजूद यूरो मजबूत बढ़त हासिल करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहा है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा और अमेरिका-ईरान कूटनीतिक संकेत

वित्तीय बाजार के विश्लेषक और निवेशक न्यूयॉर्क में आयोजित हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा पर पैनी नजर रखे हुए हैं। इस वैश्विक मंच पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दोनों ही उपस्थित हैं। राजनयिक स्तर पर चल रही सुगबुगाहट के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन संयुक्त राष्ट्र के मंच पर ईरान के साथ किसी भी सकारात्मक बैठक के लिए तैयार और खुला है। हालांकि, मार्को रुबियो ने इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच किसी औपचारिक बैठक का कोई पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम तय नहीं है। इस तरह के संभावित संवाद के संकेतों ने भू-राजनीतिक जोखिमों को लेकर निवेशकों की चिंता को थोड़ा संतुलित किया है, जिससे डॉलर की सुरक्षित पनाहगाह मांग पर अस्थायी दबाव बना।

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ब्राउन ब्रदर्स हैरीमैन का मुद्रा दृष्टिकोण और डॉलर का दबदबा

मुद्रा बाजार के रणनीतिकारों और ब्राउन ब्रदर्स हैरीमैन के विशेषज्ञों के अनुसार, विश्व के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही मौद्रिक सख्ती फेडरल रिजर्व के साथ नीतिगत अंतर को सीमित कर रही है। इससे संकेत मिलता है कि अमेरिकी डॉलर के लिए नए चक्रीय उच्च स्तर को छूना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। इसके बावजूद, अमेरिकी मुद्रा का अंतर्निहित ढांचा काफी मजबूत बना हुआ है। रणनीतिकारों का रेखांकित करना है कि अन्य प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अमेरिका की विकास दर का लाभ कहीं अधिक स्पष्ट है, जो अमेरिकी डॉलर के जोखिम को ऊपर की दिशा में बनाए रखता है। जब तक अमेरिकी अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन अन्य विकसित देशों से बेहतर रहेगा, तब तक डॉलर की गिरावट सीमित रहने की संभावना है।

यूरोपीय सेंट्रल बैंक का ढांचा और मौद्रिक नीति की कार्यप्रणाली

यूरोपीय अर्थव्यवस्था के केंद्र जर्मनी के फ्रैंकफर्ट शहर में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन के लिए रिज़र्व बैंक के रूप में कार्य करता है। यह बैंक पूरे क्षेत्र के लिए ब्याज दरें निर्धारित करने के साथ-साथ मौद्रिक नीति का संपूर्ण प्रबंधन संभालता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक का प्राथमिक वैधानिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका व्यावहारिक अर्थ मुद्रास्फीति की दर को 2% के आसपास सीमित रखना होता है। मूल्य स्थिरता के इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक मुख्य उपकरण के रूप में ब्याज दरों को बढ़ाने अथवा घटाने की व्यवस्था अपनाता है। आमतौर पर जब ब्याज दरें अपेक्षाकृत उच्च स्तर पर रखी जाती हैं, तो उससे यूरो को मजबूती मिलती है, जबकि दरों में कटौती से यूरो कमजोर होता है।

यूरोपीय सेंट्रल बैंक की गवर्निंग काउंसिल वर्ष में आठ बार औपचारिक बैठकें आयोजित करके मौद्रिक नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले लेती है। इन नीतिगत निर्णयों में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख शामिल होते हैं, साथ ही यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड सहित छह स्थायी सदस्य भी इस निर्णय प्रक्रिया का मुख्य हिस्सा होते हैं। गवर्निंग काउंसिल के नीतिगत दिशा-निर्देशों का सीधा असर यूरोप की आर्थिक गतिविधियों और विनिमय दरों पर पड़ता है।

क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का प्रभाव

अत्यधिक विषम या संकटपूर्ण आर्थिक परिस्थितियों में यूरोपीय सेंट्रल बैंक एक विशेष नीतिगत उपाय को लागू करता है, जिसे क्वांटिटेटिव ईजिंग कहा जाता है। यह एक ऐसी मौद्रिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत केंद्रीय बैंक नई यूरो मुद्रा जारी करता है और उसका उपयोग बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी ऋणपत्र या कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदने के लिए करता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग की इस व्यवस्था का स्वाभाविक परिणाम सामान्यतः यूरो के कमजोर होने के रूप में सामने आता है। केंद्रीय बैंक इस साधन का सहारा अंतिम विकल्प के तौर पर तब लेता है, जब केवल पारंपरिक रूप से ब्याज दरों को कम करके मूल्य स्थिरता का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं दिखता। यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने इस अपरंपरागत उपाय का उपयोग वर्ष 2009 से 2011 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान किया था। इसके उपरांत वर्ष 2015 में जब मुद्रास्फीति की दर लगातार अवांछित रूप से निम्न स्तर पर बनी रही, तब भी इसे लागू किया गया था, और बाद में वैश्विक कोविड महामारी के गंभीर आर्थिक झटकों से निपटने के लिए भी इसका व्यापक उपयोग किया गया।

क्वांटिटेटिव टाइटनिंग पूरी तरह से क्वांटिटेटिव ईजिंग की विपरीत प्रक्रिया मानी जाती है। यह नीतिगत कदम क्वांटिटेटिव ईजिंग के बाद उस समय उठाया जाता है जब आर्थिक सुधार गति पकड़ लेता है और मुद्रास्फीति में अवांछित वृद्धि शुरू हो जाती है। क्वांटिटेटिव ईजिंग के दौरान जहां यूरोपीय सेंट्रल बैंक वित्तीय तंत्र में तरलता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वित्तीय संस्थानों से सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग के तहत बैंक नए बॉन्ड खरीदना पूरी तरह बंद कर देता है। इसके अतिरिक्त, जो बॉन्ड उसके पास पहले से मौजूद होते हैं और अपनी परिपक्वता अवधि पूरी कर लेते हैं, उनके मूलधन का दोबारा निवेश करना भी बंद कर दिया जाता है। वित्तीय बाजारों में यह नीतिगत कदम आमतौर पर यूरो मुद्रा के लिए सकारात्मक और तेजी लाने वाला माना जाता है।

एशियाई कारोबार में अन्य प्रमुख मुद्रा युग्मों की स्थिति

मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7100 के स्तर से ऊपर खरीदारी हासिल करने में सफल रहा। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को यह समर्थन रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की सहायक गवर्नर सारा हंटर और गवर्नर मिशेल बुलॉक की सख्त नीतिगत टिप्पणियों के बाद मिला। हालांकि, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक नीतिगत रुख ने अमेरिकी डॉलर में तेजी के माहौल को बनाए रखा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की बढ़त सीमित हो सकती है। बाजार की निगाहें इस सप्ताह के अंत में होने वाले ट्रंप और शी जिनपिंग के महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन पर भी टिकी हुई हैं।

इसी सत्र में अमेरिकी डॉलर जापानी येन के मुकाबले 157.50 के स्तर के करीब मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप की आशंकाओं ने जापानी येन की भारी गिरावट को रोकने में मदद की। बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% करने का फैसला 7-2 के बहुमत से लिया गया। यह कदम पिछले 31 वर्षों के उच्चतम स्तर पर ब्याज दरों को ले गया है और मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक अहम कदम है, जो कई हफ्तों से बाजार की उम्मीदों के अनुरूप ही रहा। फिर भी बैंक ऑफ जापान के समग्र रूप से नरम रुख ने येन के खरीदारों को रक्षात्मक स्थिति में बनाए रखा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की लंबी अवधि तक सख्त नीति के दृष्टिकोण और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने डॉलर-येन युग्म को मजबूत सहारा दिया है।

सोने के भाव पर दबाव और वाशिंगटन शिखर सम्मेलन पर नजर

कीमती धातुओं के बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गया, हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार की स्थिति बनी। बहुमूल्य धातु पर यह निरंतर दबाव इस व्यापक उम्मीद के चलते देखा जा रहा है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को अधिक समय तक ऊंचे स्तर पर बरकरार रखेगा। इस नीतिगत दृष्टिकोण ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और अमेरिकी डॉलर को मजबूती दी है, जिससे गैर-ब्याज वाली संपत्तियों जैसे सोने की मांग प्रभावित हुई है।

वैश्विक वित्तीय जगत की नजरें अब गुरुवार को वाशिंगटन में होने वाले उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन पर भी केंद्रित हैं, जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग आमने-सामने होंगे। विश्व की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्षों के बीच होने वाली यह बैठक यह निर्धारित करने में निर्णायक होगी कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संघर्ष विराम आगे जारी रहेगा या वैश्विक बाजार अनिश्चितता के एक नए दौर में प्रवेश करेंगे।

सवाल-जवाब

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले यूरो की चाल सीमित क्यों बनी हुई है?
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सख्त रुख के बावजूद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं और अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि से डॉलर को लगातार समर्थन मिल रहा है, जिससे यूरो में बड़ी बढ़त नहीं दिख रही है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका और ईरान के बीच क्या चर्चा हो रही है?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि वॉशिंगटन ईरान के साथ बैठक के लिए तैयार है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच फिलहाल कोई आधिकारिक बैठक निर्धारित नहीं है।
बैंक ऑफ जापान ने ब्याज दरों में क्या बदलाव किया है?
बैंक ऑफ जापान ने 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो कि 31 वर्षों का इसका उच्चतम स्तर है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर क्या असर पड़ा है?
सोने की कीमत में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट आई और यह प्रति ट्रॉय औंस 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे फिसल गई, क्योंकि फेड की सख्त नीति के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर मजबूत बने हुए हैं।
वॉशिंगटन में कौन सी महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग गुरुवार को वॉशिंगटन में एक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे, जहां दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों की भविष्य की दिशा तय होगी।
क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में मुख्य अंतर क्या है?
क्वांटिटेटिव ईजिंग में यूरोपीय सेंट्रल बैंक नए यूरो जारी करके वित्तीय संस्थानों से बॉन्ड खरीदता है जिससे यूरो कमजोर होता है, जबकि क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में बैंक बॉन्ड खरीदना और मूलधन का पुनर्निवेश बंद कर देता है जिससे मुद्रा को मजबूती मिलती है।
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