अमित शाह ने की राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की महापरिषद की 93वीं बैठक की अध्यक्षताचिकन-मटन को पीछे छोड़ देगी ओल की सब्जी, घर पर इस आसान रेसिपी से बनाएंशंकराचार्य मंदिर मार्ग पर मजार के जीर्णोद्धार पर गरमाई सियासत, उठे गंभीर सवालदीपावली पर कम खर्च में सजाएं घर, एक हजार रुपये में बदल जाएगी दीवार की सूरतअसम के मुख्यमंत्री ने तिनसुकिया में लॉन्च किया समग्र सेवा ऐप, आठ करोड़ रुपये के विकास कार्यों की रखी आधारशिलाशनि की सीधी चाल: 11 दिसंबर 2026 से 241 दिनों तक इन 3 राशियों की चमकेगी किस्मतकोरिया की महिलाओं ने मिलेट्स से संवारी अपनी किस्मत, खेती के साथ स्नैक्स और लड्डू बनाकर कमा रहीं ₹15 हजार तकनाथू ला में चीनी सेना की घुसपैठ का दावा निकला गलत, भारतीय सेना ने बताई सच्चाईएलन मस्क से जुड़ी लॉ फर्म के वकीलों ने बनाई 'इलेक्शन इंटीग्रिटी' संस्था, बोर्ड में कई जाने-माने चेहरे शामिलराहु के प्रभाव में आ रहे बुध, 3 नवंबर से 6 राशियों के जीवन में होगा बड़ा बदलाव
पटना का बिरला मंदिर धर्मशाला: जहां 'देखा-देखी' होते ही पक्का माना जाता है रिश्ता, तीन पीढ़ियों की शादियों का गवाहकल्चर
13 जून 2026, 3:58 pm (138 दिन पहले)· 0

पटना का बिरला मंदिर धर्मशाला: जहां 'देखा-देखी' होते ही पक्का माना जाता है रिश्ता, तीन पीढ़ियों की शादियों का गवाह

पटना के श्री बिरला मंदिर धर्मशाला को लोग शादी-विवाह के लिए बेहद शुभ मानते हैं — यहां कन्या निरीक्षण के बाद रिश्ता तय होने की मान्यता है, और कमरे से लेकर शादी समारोह तक की दरें रियायती हैं।

अधिकमास बीतते ही शादियों का मौसम दस्तक देने लगता है, और इसी के साथ योग्य जीवनसाथी की तलाश में जुटे परिवारों की भागदौड़ भी तेज हो जाती है। बिहार की राजधानी पटना में एक ऐसी जगह है, जिसे लोग इस तलाश का सबसे शुभ ठिकाना मानते हैं — श्री बिरला मंदिर धर्मशाला। यहां की मान्यता ही ऐसी है कि एक बार 'देखा-देखी' का कार्यक्रम हो जाए, तो रिश्ता पक्का होना लगभग तय समझा जाता है।

एक मान्यता, जो पीढ़ियों से चली आ रही है

इस धर्मशाला से जुड़ा भरोसा कोई नया नहीं है। लोग इसे शादी-विवाह के लिहाज से बेहद शुभ मानते आए हैं, और यही वजह है कि कई परिवारों में तीन-तीन पीढ़ियों की शादियां इसी एक जगह पर हुई हैं। यहां पहुंचने वाले कई लोग बताते हैं कि उनके परिवार की तीसरी पीढ़ी का कन्या निरीक्षण या विवाह भी इसी धर्मशाला में हो रहा है — यानी दादा-परदादा से लेकर अब पोते-पोतियों तक का सिलसिला यहीं जुड़ा हुआ है।

ये भी पढ़ें

धर्मशाला के मैनेजर सच्चिदानंद प्रसाद के मुताबिक, यहां शादी के लिए होने वाला कन्या निरीक्षण कार्यक्रम सफल रहता है और रिश्ता तय होने की संभावना बढ़ जाती है। यही भरोसा बड़ी संख्या में परिवारों को यहां लड़की देखने की रस्म निभाने के लिए खींच लाता है।

रविवार को उमड़ती है भीड़

कन्या निरीक्षण के लिए रविवार के दिन यहां खासी भीड़ जुटती है। और यह भीड़ सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहती — पड़ोसी राज्यों से भी परिवार यहां पहुंचते हैं। सच्चिदानंद प्रसाद बताते हैं कि धर्मशाला से जुड़ी ये मान्यताएं सालों से लोगों के बीच मशहूर हैं, और यहां रियायती दरों पर अलग-अलग कार्यक्रमों के लिए बुकिंग होती है।

कितना खर्च, किस काम के लिए

कन्या निरीक्षण के लिए यहां कमरा बुक कराना होता है। नॉर्मल कमरे का किराया 400 रुपये है, जबकि एसी कमरे के लिए 1100 रुपये चुकाने पड़ते हैं। छेका की रस्म के लिए दो कमरे और मैदान मात्र 2100 रुपये में मिल जाते हैं, वहीं दो कमरों के साथ अटैच हॉल की बुकिंग 5100 रुपये में होती है।

अगर पूरा विवाह समारोह यहीं करना हो, तो ग्राउंड फ्लोर की बुकिंग 19,500 रुपये में होती है। ग्राउंड फ्लोर के साथ प्रथम तल भी लेना हो तो शुल्क 35,000 रुपये पड़ता है। इसके अलावा कमरा संख्या 16 से 19 और छत की बुकिंग मात्र 11,000 रुपये में हो जाती है। रसोईघर के लिए अलग से 2100 रुपये का शुल्क तय है। बुकिंग के लिए धर्मशाला के ऑफिस में संपर्क करना होता है।

एक बीघा में फैला हरा-भरा परिसर

यह धर्मशाला पटना में खेतान मार्केट के पास बिरला मंदिर के प्रांगण में स्थित है। करीब एक बीघा में फैले इस परिसर में कुल 25 कमरे हैं। कम बजट में रुकने वालों के लिए हॉल में मात्र 50 रुपये में बेड की सुविधा दी जाती है। पूरा परिसर काफी बड़ा और हरियाली से भरा है — चारों तरफ पेड़-पौधे लगे हैं, जिससे यहां का माहौल बेहद शांत और सुकूनभरा महसूस होता है।

1942 की वह नींव, जिसने तोड़ी छुआछूत की दीवार

परिसर में भगवान लक्ष्मी नारायण का मंदिर भी है, जहां सुबह-शाम पूजा-अर्चना होती है। इसकी स्थापना 1942 में सेठ युगल किशोर बिरला ने कराई थी। यह वह दौर था जब समाज में छुआछूत जैसी कुरीतियां गहराई तक जड़ें जमाए हुए थीं। लेकिन इस मंदिर और धर्मशाला में सनातन धर्म को मानने वाले हर वर्ग और समुदाय के लोगों के लिए समान रूप से प्रवेश की व्यवस्था रखी गई — और यही इसे अपने समय से कहीं आगे की पहल बनाता है।

संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp