राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया ब्लॉक द्वारा आयोजित विशाल जनसभा को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. भारतीय जनता पार्टी के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने विपक्षी नेताओं के जमावड़े पर करारा हमला बोलते हुए इसे विरोधियों की गहरी हताशा और बदहवासी का खुला सबूत करार दिया है. उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सांगठनिक स्थिति की तुलना एक डूबते हुए जहाज से की और राहुल गांधी को जनता द्वारा पूरी तरह खारिज किया गया असफल नेता बताया. इसके अलावा उन्होंने विपक्षी आंदोलनों के कारण राजधानी के कारोबार और सरकारी राजस्व को हुए भारी आर्थिक नुकसान का ब्योरा भी सामने रखा.
चुनावी नतीजों और जनादेश का दिया हवाला
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने विपक्षी खेमे के दावों पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि ये सभी नेता एक ऐसे सपने को सच करने की कोशिश में जुटे हैं जो असल जिंदगी में कभी पूरा नहीं हो सकता. उन्होंने रेखांकित किया कि देश की आम जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर अटूट विश्वास जताते हुए उन्हें लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव में शानदार जीत दिलाई है. केंद्र के बाद जिन-जिन राज्यों में विधानसभा चुनाव आयोजित किए गए, वहां भी भारतीय जनता पार्टी को ऐतिहासिक और अभूतपूर्व सफलता हासिल हुई है. उनके मुताबिक लोकतंत्र में जनता ही सर्वोपरि है और मतदाताओं को यह तय करने का पूरा अधिकार है कि वे देश की बागडोर किसे सौंपना चाहते हैं और किसे सत्ता से बाहर रखना चाहते हैं.
प्रवीण खंडेलवाल ने स्पष्ट किया कि जब आम मतदाता कांग्रेस और राहुल गांधी को पूरी तरह नकार चुका है और उन्हें एक नाकाम नेता घोषित कर चुका है, तो इस विफलता का ठीकरा किसी दूसरे के सिर पर नहीं फोड़ा जा सकता. चाहे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे हों, राहुल गांधी हों या फिर गठबंधन के अन्य प्रमुख रणनीतिकार, उनकी तरफ से की जाने वाली आधारहीन टिप्पणियां केवल उनकी राजनीतिक बेचैनी और नाउम्मीदगी को उजागर करती हैं. चुनावी रणभूमि में हासिल जनमत ही लोकतांत्रिक व्यवस्था का अंतिम और निर्णायक फैसला माना जाता है, जिसे विपक्ष स्वीकार करने से बच रहा है.
व्यापार को 550 करोड़ और राजस्व को 700 करोड़ का नुकसान
विपक्षी गठबंधन की इस रैली के संदर्भ में भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के नेतृत्व में लगातार अराजकता भरा माहौल तैयार करने का अनुचित प्रयास किया जा रहा है, जिसकी जितनी कड़ी भर्त्सना की जाए वह कम होगी. उन्होंने बताया कि दिल्ली के साथ-साथ पूरे देश के कारोबारी समुदाय के भीतर कांग्रेस और उसके नेतृत्व की नीतियों को लेकर गहरा असंतोष और गुस्सा पनप रहा है. पिछले दिनों चलाए गए विभिन्न धरनों, हड़तालों और प्रदर्शनों के चलते दिल्ली के स्थानीय बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं.
आंकड़े पेश करते हुए उन्होंने दावा किया कि इस त्योहारी सीजन के दौरान दिल्ली के खुदरा और थोक व्यापार को 550 करोड़ रुपये से भी अधिक का सीधा वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है. कारोबार ठप होने और गतिविधियों के बाधित रहने के कारण सरकारी खजाने को भी लगभग 700 करोड़ रुपये के राजस्व से हाथ धोना पड़ा है. इन गंभीर आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए दिल्ली के व्यापारी वर्ग ने दीपावली का त्योहार संपन्न होते ही एक आपात बैठक बुलाने का निर्णय लिया है. इस बैठक के दौरान कारोबारी मिलकर यह रूपरेखा तय करेंगे कि व्यापारिक व्यवस्था को चौपट करने वाली राजनीतिक ताकतों को किस तरह सबक सिखाया जाए.
विरोध प्रदर्शनों के लिए बाहरी इलाकों में जगह तय करने की मांग
राजधानी के व्यापारिक परिवेश को सुरक्षित रखने की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू से औपचारिक गुजारिश की है. संगठन की मांग है कि शहर के भीतर होने वाले सभी प्रकार के धरनों और राजनीतिक प्रदर्शनों के लिए दिल्ली के बाहरी इलाकों में तत्काल प्रभाव से विशेष स्थल निर्धारित किए जाएं. ऐसा प्रबंध किए जाने से न तो आम नागरिकों की दैनिक दिनचर्या में कोई रुकावट आएगी और न ही बाजारों का कारोबार प्रभावित होगा.
तुष्टीकरण की राजनीति और सोनिया गांधी के भाषण न देने पर निशाना
पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी के काफिर वाले बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जब उनका शासन रहा, तब उन्होंने हमेशा केवल एक विशेष वर्ग के हितों को तरजीह दी. उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की इसी नीति पर आज समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी आगे बढ़ रहे हैं, जिससे सामाजिक संतुलन बिगड़ता है.
रैली के दौरान सोनिया गांधी को मंच से संबोधन का मौका न दिए जाने पर कटाक्ष करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि यह घटनाक्रम कांग्रेस पार्टी के आंतरिक संकट की वास्तविक तस्वीर बयां करता है. उनका कहना था कि कांग्रेस एक डूबते हुए जहाज जैसी हो चुकी है, जहां पार्टी के भीतर मौजूद कई समर्पित नेता खुद को लाचार और असहाय महसूस कर रहे हैं. उन्होंने कटाक्ष किया कि पार्टी के भीतर चापलूसी और चरणवंदना का ऐसा चलन बैठ चुका है जिससे कोई बच नहीं पा रहा, चाहे वह इमरान मसूद हों, सलमान खुर्शीद हों या जयराम रमेश. उन्होंने जोर देकर कहा कि अपने इसी रवैये के चलते कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे कमजोर दौर का सामना कर रही है और आने वाले दिनों में देश के राजनीतिक परिदृश्य से पार्टी का वजूद मिट जाने की चर्चाएं चल रही हैं.


















