तेलंगाना प्रशासन ने राज्य संचालित और स्थानीय निकायों के अधीन आने वाले विद्यालयों के शिक्षण व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। राज्य के विभिन्न विद्यालयों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों को अब विद्यार्थियों की तरह ही रोजाना मुफ्त नाश्ता और दोपहर का भोजन दिया जाएगा। सरकार के इस कदम का मुख्य लक्ष्य पूरे शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्टाफ के पोषण स्तर में सुधार लाना तथा उनके स्वास्थ्य की समुचित देखभाल सुनिश्चित करना है, क्योंकि ये कर्मचारी दिनभर विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
आदेश जारी और अधिकारियों को तात्कालिक निर्देश
यह नया निर्देश आधिकारिक रूप से गुरुवार, 30 जुलाई 2026 को जारी किया गया। राज्य शासन ने बिना किसी विलंब के इस नीति को तत्काल प्रभाव से लागू करने के सख्त निर्देश दिए हैं। योजना को सुचारू रूप से धरातल पर उतारने और पारदर्शी प्रबंधन के लिए आदेश की प्रतियां राज्यभर के क्षेत्रीय संयुक्त निदेशकों, जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO), मंडल शिक्षा अधिकारियों (MEO) और संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को भेज दी गई हैं। इन सभी जिम्मेदार अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र के तहत आने वाले स्कूलों में पर्याप्त राशन की उपलब्धता और आवश्यक बुनियादी प्रबंध समय पर सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
डिजिटल पोर्टल में तकनीकी संशोधन और सेंट्रल किचन की तैयारी
योजना के क्रियान्वयन में पूर्ण पारदर्शिता बनाए रखने तथा भोजन की बर्बादी रोकने के लिए विशेष तकनीकी उपाय किए जा रहे हैं। मध्य-भोजन विभाग के अतिरिक्त निदेशक को 'तेलंगाना नाश्ता एवं मध्य-भोजन पोर्टल' में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने का निर्देश दिया गया है। ऑनलाइन पोर्टल में संशोधन के उपरांत, प्रतिदिन भोजन ग्रहण करने वाले अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों की सटीक संख्या दर्ज की जा सकेगी, जिससे सभी आंकड़े ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे।
इसके साथ ही, विद्यालयों में रोजाना ताजा और पौष्टिक भोजन की आपूर्ति करने वाली 'सेंट्रल किचन' का संचालन करने वाली सामाजिक संस्थाओं और संबंधित एजेंसियों को भी नए आदेशों की जानकारी दे दी गई है। इन एजेंसियों को स्पष्ट तौर पर निर्देशित किया गया है कि वे विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों और कर्मचारियों की कुल संख्या को ध्यान में रखकर भोजन की मात्रा बढ़ाएं, ताकि किसी भी स्थिति में भोजन कम न पड़े।
गुणवत्ता में सुधार और कर्मचारी यूनियनों की प्रतिक्रिया
इस फैसले का एक सबसे बड़ा व्यावहारिक पहलू यह माना जा रहा है कि जब शिक्षक और प्रशासनिक कर्मचारी स्वयं बच्चों के साथ बैठकर वही भोजन खाएंगे, तो भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता पर स्वतः ही निगरानी रखी जा सकेगी। इससे मिड-डे मील के स्तर में व्यापक सुधार आने की संभावना है। राज्य के विभिन्न शिक्षक संघों, गैर-शिक्षण कर्मचारी संगठनों और विद्यालय प्रबंधकों ने सरकार के इस संवेदनशील निर्णय का स्वागत किया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इस पहल से स्कूलों में समानता, सद्भाव और एक पारिवारिक वातावरण का निर्माण होगा।



















