अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर भारत और पाकिस्तान के बीच तल्खी का असर अब एशियाई खेलों के पोडियम तक पहुंच सकता है। पाकिस्तान के गृह मंत्री, पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख और एशियन क्रिकेट काउंसिल के अध्यक्ष मोहसिन नकवी को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति बन रही है। एशिया कप प्रतियोगिताओं के दौरान भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों ने विरोध जताते हुए मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी स्वीकार करने से किनारा कर लिया था। अब इस बात की प्रबल संभावना जताई जा रही है कि ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया उन्हें आगामी पदक वितरण समारोह में पदक पहनाने के लिए आमंत्रित कर सकता है।
एशिया कप में बहिष्कार का पुराना इतिहास
पिछले वर्ष पहलगाम में हुए आतंकी हमले के विरोध में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने कड़ा रुख अपनाया था। टीम ने एशिया कप जीतने के बाद मोहसिन नकवी के हाथों से ट्रॉफी लेने से साफ इनकार कर दिया था। इसके कुछ ही समय बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने भी इसी नीति का पालन करते हुए नकवी से ट्रॉफी स्वीकार नहीं की थी। दोनों टीमों के इस कदम ने खेल जगत और कूटनीतिक गलियारों में तीखी चर्चा छेड़ दी थी।
ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के नियम और प्रोटोकॉल की मजबूरी
एशियाई खेलों में स्थिति एशिया कप जैसी सामान्य द्विपक्षीय या उपमहाद्वीपीय प्रतियोगिता से काफी अलग होती है। भारत की पुरुष और महिला दोनों टीमें इन खेलों की मौजूदा चैंपियन हैं और आइची-नागोया 2026 में एक बार फिर स्वर्ण पदक जीतने की सबसे बड़ी दावेदार मानी जा रही हैं। बहु-खेल आयोजनों में पदक वितरण की व्यवस्था सीधे ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के नियमों के तहत संचालित होती है।
यदि कतर के नागरिक और ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया के अध्यक्ष शेख जोआन बिन हमद अल थानी आधिकारिक तौर पर मोहसिन नकवी को पदक पहनाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं, तो भारतीय खिलाड़ियों के सामने प्रोटोकॉल का पालन करने की संवैधानिक बाध्यता होगी। ऐसे हालात में भारतीय एथलीटों से अपना मेडल स्वीकार करने की पूरी अपेक्षा की जाएगी। जानकारों का मानना है कि यदि भारतीय टीम ऐसा करने से मना करती है, तो इसे सीधे तौर पर ओलंपिक काउंसिल ऑफ एशिया की अवमानना माना जाएगा, जिस पर औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है।
मैचों पर ध्यान और बीसीसीआई का संतुलित रुख
इस पूरे मामले और संभावित गतिरोध को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने फिलहाल काफी नपा-तुला रुख दिखाया है। बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में पूरा ध्यान केवल मैदान पर मुकाबले जीतने पर लगा हुआ है। उनका कहना है कि खिलाड़ियों को सबसे पहले पोडियम तक पहुंचना होगा और जब वह स्थिति वास्तव में सामने आएगी, तब उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए ही कोई निर्णय लिया जाएगा।
“हमारा पूरा ध्यान अभी सिर्फ मैच पर है। टीमों को पहले पोडियम तक पहुंचना होगा। उस समय की सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, हम तभी फैसला लेंगे।”
देवजीत सैकिया ने यह भी रेखांकित किया कि बोर्ड और खिलाड़ियों की एकमात्र प्राथमिकता मैच जीतना है। जो घटनाक्रम अभी तक घटित नहीं हुआ है, उस पर अग्रिम टिप्पणी करने के बजाय बोर्ड जमीनी हकीकत सामने आने पर ही रणनीति तय करेगा।



















