प्रोफेशनल रेसलिंग का मंच जब भी सजता है, प्रशंसकों की सांसें थाम देने वाले ड्रामे और शानदार मुकाबलों की भरमार देखने को मिलती है। बीते कई दशकों के दौरान इस स्क्वायर्ड सर्कल में ऐसी कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की गईं, जिन्होंने खेल मनोरंजन की परिभाषा ही बदल दी। हालांकि मौजूदा दौर में एथलीटों का बेहद व्यस्त कार्यक्रम, शारीरिक चोटों का निरंतर खतरा और साप्ताहिक कार्यक्रमों की तेज रफ्तार ऐसे पहलू हैं, जिसके चलते पुराने दौर के कई मील के पत्थर आज किसी तिलिस्म जैसे जान पड़ते हैं। रिंग के ऐसे ही पांच अविश्वसनीय कीर्तिमानों पर नजर डालते हैं, जिनका टूटना आधुनिक परिस्थितियों में लगभग नामुमकिन माना जाता है।
रेसलमेनिया में द अंडरटेकर का लगातार इक्कीस बार अजेय रहना
साल के सबसे बड़े आयोजन के तौर पर पहचाने जाने वाले रेसलमेनिया के मंच पर द अंडरटेकर ने जो करिश्मा रचा, वह किसी महाकाव्य जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने इस सालाना महाकुंभ में एक के बाद एक लगातार इक्कीस बार जीत का परचम लहराया। इस लंबे सफर में शॉन माइकल्स, रिक फ्लेयर, केन तथा ट्रिपल एच जैसे ख्यातिप्राप्त सूरमा रिंग में उतरे, लेकिन उनमें से कोई भी इस महायोद्धा के विजय रथ को रोक पाने में सफल नहीं हुआ। बाद में रेसलमेनिया 30 के दौरान ब्रॉक लेसनर के जोरदार एफ-5 दांव ने इस स्वर्णिम सिलसिले को इक्कीस जीत और एक हार पर ला खड़ा किया। मौजूदा दौर के रेसलरों के लिए इतने लंबे समय तक बिना कोई मुकाबला गंवाए किसी वार्षिक आयोजन में लगातार विजयी बने रहना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिखता।
ब्रूनो समार्टिनो का अटूट आठ वर्षों का खिताबी दबदबा
आधुनिक समय में दर्शक देखते हैं कि कुछ ही हफ्तों अथवा महीनों के भीतर विश्व चैंपियन की बेल्ट नए हाथों में चली जाती है। इसके बिल्कुल उलट पुराने युग में एक दिग्गज ऐसा भी रहा, जिसने लगभग एक पूरे दशक तक अपने सिंहासन पर किसी प्रतिद्वंद्वी को काबिज नहीं होने दिया। ब्रूनो समार्टिनो ने 17 मई 1963 को पहली बार यह खिताब हासिल किया था, जिसके बाद 18 जनवरी 1971 तक यानी लगातार 2,803 दिनों तक यह सुनहरी बेल्ट उनके पास ही सुरक्षित रही। वर्तमान समय में सालभर आयोजित होने वाले प्रीमियम लाइव आयोजनों और रोस्टर की कड़ी प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखें, तो लगातार आठ साल तक शीर्ष पर जमे रहना अकल्पनीय लगता है।
सैंटिनो मारेला का चंद पलों में समाप्त हुआ रॉयल रंबल का सफर
तीस रेसलरों के बीच होने वाले रॉयल रंबल मुकाबले में हर पहलवान की यही ख्वाहिश होती है कि वह ज्यादा से ज्यादा देर तक रस्सियों के भीतर टिककर अपनी ताकत और तकनीक साबित करे। मगर साल 2009 के संस्करण में सैंटिनो मारेला के साथ जो वाक्या पेश आया, वह इतिहास का सबसे विचित्र और अवांछित अध्याय बन गया। जैसे ही वह रिंग में दाखिल हुए, अपनी पोशाक का ऊपरी हिस्सा भी पूरी तरह नहीं संभाल पाए थे कि तभी केन ने उन्हें उठाकर सीधे रस्सियों के ऊपर से बाहर फेंक दिया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम में महज 1.9 सेकंड का वक्त लगा, जिसके चलते यह रिकॉर्ड शायद ही कोई दूसरा सुपरस्टार अपने खाते में दर्ज करवाना चाहेगा।
इंटरकॉन्टिनेंटल बेल्ट को लंबी अवधि तक बचाए रखने की कठिन परीक्षा
वर्कहॉर्स उपाधि से नवाजी जाने वाली इंटरकॉन्टिनेंटल चैंपियनशिप हमेशा से तकनीकी रूप से सक्षम रेसलरों के दमखम की कसौटी रही है। 1980 के दशक में द हॉंकी टॉन्क मैन ने इस बेल्ट को 454 दिनों तक अपने पास बनाए रखकर एक मिसाल कायम की थी, जिसे पीछे छोड़ने में पीढ़ियां बीत गईं। हाल के वर्षों में गुंथर ने 666 दिनों तक चैंपियन का ताज संभाले रखकर नया कीर्तिमान स्थापित किया। आज के दौर में जहां रोस्टर बेहद प्रतिभाशाली रेसलरों से भरा पड़ा है, इस मिड-कार्ड खिताब को चार सौ या छह सौ दिनों से अधिक समय तक लगातार डिफेंड करते रहना अपने आप में बहुत जटिल चुनौती साबित होता है।
ऐंद्रे द जायंट का डेढ़ दशक तक बिना पिनफॉल के रहने का कारनामा
रिंग के दुनिया में दुनिया का आठवां अजूबा कहे जाने वाले ऐंद्रे द जायंट का आकार जितना विशाल था, रिंग के भीतर उनका रुतबा भी उतना ही विशालकाय माना जाता था। अपने शुरुआती करियर में उन्होंने पूरे पंद्रह वर्षों तक बिना किसी पिनफॉल या सबमिशन के मैच न हारने का एक हैरतअंगेज सिलसिला कायम रखा था। इस दौरान बड़े से बड़े प्रतिद्वंद्वी के लिए भी उनके कंधे मैट पर टिकाना मुमकिन नहीं हो सका। चोटों के भारी जोखिम और लगातार यात्राओं के मौजूदा दौर में पंद्रह वर्षों तक अपराजित रहने की यह दीवार हमेशा के लिए अटूट रहने वाली है।


















