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असम के चिन्मय सैकिया ने बचाई जुबीन गर्ग की अनसुनी धुनें, कैसेट से 200 से अधिक ट्रैक किए डिजिटलमनोरंजन
19 सित॰ 2026, 9:07 pm (1 घंटे पहले)· 0

असम के चिन्मय सैकिया ने बचाई जुबीन गर्ग की अनसुनी धुनें, कैसेट से 200 से अधिक ट्रैक किए डिजिटल

नगांव निवासी चिन्मय सैकिया ने जुबीन गर्ग के 200 से ज्यादा दुर्लभ पुराने गानों को कैसेट से डिजिटल प्रारूप में सहेजकर हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया है।

असम और बॉलीवुड में अपनी खास पहचान बनाने वाले गायक जुबीन गर्ग का संगीत कई पीढ़ियों के दिलों में बसता है, लेकिन उनकी शुरुआती रचनात्मक यात्रा की कई महत्वपूर्ण कड़ियां धीरे-धीरे ओझल हो रही थीं। असम के नगांव जिले के रहने वाले संगीत प्रेमी चिन्मय सैकिया ने इस संगीत विरासत को लुप्त होने से बचाने का एक बड़ा अभियान खुद संभाला। चिन्मय ने गायक के उन पुराने और दुर्लभ ट्रैकों को सहेजने का फैसला किया, जो आधुनिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्मों पर कहीं उपलब्ध ही नहीं थे।

सालों की खोज और कैसेटों का बड़ा संग्रह

चिन्मय सैकिया पिछले कई सालों से जुबीन गर्ग के पुराने ऑडियो और वीडियो कैसेट लगातार तलाशकर जमा कर रहे थे। बाजार और पुराने निजी संग्रहों से जुटाए गए इन कैसेटों के जरिए उन्होंने अब तक 200 से भी ज्यादा गानों को डिजिटल प्रारूप में सुरक्षित कर लिया है। यह उन दुर्लभ रचनाओं का खजाना है, जिन्हें गायक के शुरुआती दौर में तैयार किया गया था और जो अब सार्वजनिक माध्यमों में लगभग अनुपलब्ध हो चुकी थीं।

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इंटरनेट और आधुनिक ऐप पर भी मौजूद नहीं थे ये ट्रैक

चिन्मय के अनुसार, जिन 200 से अधिक गानों का उन्होंने डिजिटलीकरण किया है, उनमें से अधिकांश गाने यूट्यूब अथवा किसी अन्य संगीत ऐप पर भी नहीं मिलेंगे। 1990 के दशक का दौर ऐसा था जब संगीत सुनने का मुख्य जरिया सिर्फ चुंबकीय टेप वाले कैसेट हुआ करते थे। लोग अपनी पसंद के कलाकारों के कैसेट खरीदकर टेप रिकॉर्डर में बजाया करते थे, लेकिन वक्त के साथ ये भौतिक फीते नमी, टूट-फूट और घिसावट के कारण हमेशा के लिए नष्ट हो जाते हैं। ऐसे में अगर समय रहते इन ट्रैकों को कंप्यूटर और डिजिटल माध्यमों पर नहीं बदला जाता, तो जुबीन गर्ग की यह ऐतिहासिक कला हमेशा के लिए विलुप्त हो जाती।

पूर्वोत्तर के सबसे बड़े सितारे की विरासत को नया जीवन

जुबीन गर्ग असम और समूचे पूर्वोत्तर के सबसे लोकप्रिय गायकों में शीर्ष स्थान पर आते हैं। उन्होंने असमिया के अलावा हिंदी तथा कई अन्य भारतीय भाषाओं में कई यादगार और चार्टबस्टर गाने गाए हैं। भारतीय संगीत जगत में उनकी शैली और आवाज ने एक अलग मुकाम कायम किया है। जुबीन के समकालीन और नए गीत तो ऑनलाइन मंचों पर सरलता से सुने जा सकते हैं, परंतु नब्बे के दशक के कैसेट दौर की रिकॉर्डिंग्स को ढूंढना असंभव सा हो गया था। चिन्मय का यह व्यक्तिगत प्रयास पुराने क्षेत्रीय संगीत और सांस्कृतिक धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवित रखने का एक बेहतरीन उदाहरण बन गया है।

सवाल-जवाब

चिन्मय सैकिया ने जुबीन गर्ग के कितने गाने डिजिटली सेव किए हैं?
चिन्मय सैकिया ने जुबीन गर्ग के 200 से भी ज्यादा गानों को कैसेट से डिजिटल प्रारूप में सहेज लिया है।
चिन्मय सैकिया कहां के रहने वाले हैं?
चिन्मय सैकिया असम के नगांव जिले के निवासी हैं।
इन गानों को डिजिटल फॉर्मेट में बदलना क्यों जरूरी था?
पुराने कैसेट समय के साथ खराब हो जाते हैं या टूट जाते हैं, इसलिए इन दुर्लभ गानों को हमेशा के लिए सुरक्षित करने हेतु डिजिटलीकरण जरूरी था।
क्या ये 200 गाने यूट्यूब या संगीत ऐप पर पहले से मौजूद थे?
नहीं, चिन्मय के अनुसार इनमें से कई गाने यूट्यूब या किसी अन्य ऑनलाइन संगीत ऐप पर उपलब्ध नहीं थे।
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