नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक संदेशों पर केंद्रित फिल्म 'हनुमान अंश' ने दुनिया भर के सिनेमाघरों में अभूतपूर्व सफलता हासिल कर नया कीर्तिमान रचा है. महज 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई यह फिल्म वैश्विक स्तर पर 300 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुकी है. इसके साथ ही फिल्म ने 200 करोड़ का आंकड़ा भी पार किया. हालांकि, इस चमत्कारी वित्तीय सफलता की शुरुआत कतई आसान नहीं थी, क्योंकि शुरुआती दो सप्ताह तक सिनेमाघरों की कुर्सियां खाली पड़ी थीं और दर्शकों की संख्या नगण्य थी. इसके बावजूद निर्माताओं ने घबराने के बजाय अपनी कहानी पर भरोसा बनाए रखा और वही दृढ़ संकल्प अंततः रंग लाया.
शुरुआती दो हफ्तों का कड़ा इम्तिहान और निर्माताओं का साहसिक फैसला
सिनेमाघरों में रिलीज होने के शुरुआती चौदह दिनों तक फिल्म को देखने के लिए लोग नहीं पहुंच रहे थे. ऐसे में थिएटर्स से फिल्म के उतरने का खतरा मंडराने लगा था. सीमित बजट के चलते निर्माताओं को वित्तीय नुकसान का भय तो उतना नहीं था, लेकिन यह चिंता गहरी थी कि एक प्रेरक और विचारोत्तेजक कहानी बिना दर्शकों तक पहुंचे ही पर्दे से गायब हो जाएगी. इस मुश्किल घड़ी में को-प्रोड्यूसर रागिनी सोना और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने डिस्ट्रीब्यूटर्स से बातचीत की और एक बड़ा जोखिम उठाने की ठानी.
टीम ने तय किया कि भले ही अतिरिक्त वित्तीय संसाधन झोंकने पड़ें, फिल्म को एक सप्ताह और सिनेमाघरों में टिके रहने दिया जाएगा. रागिनी सोना ने इस फैसले को याद करते हुए बताया कि जब शुरुआती दौर में टिकट खिड़की पर सन्नाटा था, तब उन्होंने हिम्मत जुटाकर फिल्म को अतिरिक्त समय देने का रिस्क लिया. यही फैसला पूरी तरह जादुई साबित हुआ, क्योंकि तीसरे हफ्ते में वर्ड ऑफ माउथ ने काम करना शुरू किया और दर्शकों की भारी भीड़ सिनेमाघरों की ओर उमड़ पड़ी.
कठिन परिस्थितियों में हुई शूटिंग और क्रू का समर्पण
इस परियोजना की यात्रा निर्माण के पहले दिन से ही संघर्षों से भरी रही थी. रागिनी सोना ने शूटिंग के दिनों की जटिलताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि बहुत ही कड़े बजट में काम करना पड़ रहा था. संसाधनों के अभाव के बावजूद पूरी टीम देर रात तक लगातार बिना किसी शिकायत के जुटी रहती थी. काम के दबाव में कई बार भोजन का निश्चित समय तक नहीं होता था और अधिकांश सदस्य भूख की परवाह किए बिना काम को प्राथमिकता देते थे. किसी भी तकनीशियन या कलाकार ने इन दिक्कतों का रोना नहीं रोया, बल्कि सभी अपने काम में समर्पित रहे.
21 साल की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर और सफलता की नई परिभाषा
फिल्म उद्योग में महज 21 साल की उम्र में कदम रखने वाली सबसे युवा प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर के अनुसार व्यावसायिक आंकड़े किसी फिल्म की महानता का एकमात्र पैमाना नहीं हो सकते. अनुप्रिया ने स्पष्ट किया कि असली ब्लॉकबस्टर वह रचना है जो दर्शक के मन में कोई गहरी सीख या संवेदनशील विचार छोड़ जाए. उनके अनुसार परिवारों, बुजुर्गों और युवा पीढ़ी से जो आत्मीय संदेश मिले हैं, वे 300 करोड़ की कमाई से भी कहीं अधिक मूल्यवान हैं. सबसे महत्वपूर्ण वह जनविश्वास रहा, जो दर्शकों ने तब दिखाया जब फिल्म को अस्तित्व बचाए रखने के लिए उसकी सबसे अधिक जरूरत थी.
मुनाफे में हिस्सेदारी और टीम को बोनस देने की योजना
फिल्म की ऐतिहासिक कमाई के बाद अब इसके पर्दे के पीछे काम करने वाले सहयोगियों को पुरस्कृत करने की चर्चा भी तेज हो गई है. टीम को विशेष बोनस दिए जाने के सवाल पर अनुप्रिया नागर ने बताया कि फिल्म से जुड़े हर अभिनेता और तकनीशियन ने अपना पसीना बहाया है. हालांकि बोनस संबंधी कोई भी आधिकारिक निर्णय फिल्म के अंतिम वित्तीय खातों के मिलान और वर्तमान अनुबंधों की पूरी समीक्षा के बाद सभी निर्माता मिलकर लेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह प्रक्रिया पूरी होने से पहले जल्दबाजी में कोई घोषणा नहीं करना चाहतीं, क्योंकि सम्मान का भाव केवल पैसों तक सीमित नहीं होता बल्कि हर सहयोगी को सम्मानित महसूस होना चाहिए.
दूसरी ओर को-प्रोड्यूसर रागिनी सोना ने अपनी व्यक्तिगत कमाई से टीम की भरपाई करने का संकल्प जताया. रागिनी ने कहा कि वह अन्य निर्माताओं की ओर से अधिकारिक वादा तो नहीं कर सकतीं, लेकिन प्रोड्यूसर कट के रूप में उनके हिस्से में जो भी रकम आएगी, उससे वह दिन-रात पसीना बहाने वाले हर सदस्य का सम्मान करेंगी. उन्होंने स्वयं अपनी आंखों से तकनीशियनों की कड़ी तपस्या देखी है, इसलिए वे अपनी व्यक्तिगत आय से टीम के हर सदस्य के योगदान का मूल्यांकन करेंगी.


















