भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में शुमार अभिनेता ने पांच दशक से भी लंबे सफर में अपने हर किरदार को पर्दे पर यादगार बना दिया है। चाहे वह व्यवस्था से नाराज युवाओं की बेचैनी को आवाज देना हो या संजीदा और संवेदनशील किरदारों में उतरना हो, उनकी अदाकारी दशकों बाद भी उतनी ही प्रभावी महसूस होती है। दर्शकों और समीक्षकों की नजर में उनकी कुछ कृतियां कलात्मक और भावनात्मक कसौटी पर बेहद खरी उतरी हैं। अच्छी बात यह है कि बेहतरीन रेटिंग हासिल करने वाली उनकी ये यादगार क्लासिक फिल्में आज भी विभिन्न ऑनलाइन स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध हैं।
हल्के-फुल्के हास्य और पारिवारिक ताने-बाने से सजी चुपके चुपके
सत्तर के दशक में आई यह प्रस्तुति आज भी पारिवारिक हास्य का एक बेहतरीन नमूना मानी जाती है। ऋषिकेश मुखर्जी के संवेदनशील निर्देशन में तैयार हुई इस कहानी में धर्मेंद्र, शर्मिला टैगोर, जया भादुड़ी, ओम प्रकाश और खुद महानायक ने अपने अभिनय का हुनर दिखाया था। फिल्म का पूरा कथानक परिमल के इर्द-गिर्द घूमता है, जो अपने सख्त स्वभाव वाले जीजाजी की परीक्षा लेने और उन्हें चकमा देने के लिए एक साधारण ड्राइवर का भेष धारण कर लेता है। इस पूरी योजना को सफल बनाने में उसका साथ देता है उसका प्रोफेसर मित्र सुकुमार। सुकुमार के गंभीर स्वभाव और परिस्थितियों के चलते पैदा होने वाले असमंजस को पर्दे पर जिस बारीकी से उभारा गया, उसने दर्शकों को खूब हंसाया। आठ दशमलव तीन (8.3) की शानदार रेटिंग दर्ज कराने वाली यह क्लासिक कॉमेडी वर्तमान में जियो हॉटस्टार पर देखी जा सकती है।
जीवन के दर्शन और दोस्ती का भावुक सफर दिखाती आनंद
ऋषिकेश मुखर्जी के ही निर्देशन में बनी यह कालजयी फिल्म जिंदगी और मौत के गहरे दर्शन को बेहद सरल शब्दों में सामने रखती है। इस रचना में राजेश खन्ना, सुमित्रा सन्याल, रमेश देव और मुख्य अभिनेता ने दिल छू लेने वाला काम किया था। पूरी कहानी एक असाध्य कैंसर की बीमारी से जूझ रहे मरीज आनंद और उनके इलाज में जुटे चिकित्सक डॉक्टर भास्कर बनर्जी के भावनात्मक जुड़ाव पर टिकी है। आनंद अपने डॉक्टर दोस्त को प्यार से बाबूमोशाय कहकर पुकारते हैं। अपनी गंभीर बीमारी की हकीकत जानते हुए भी आनंद जिस जिंदादिली और मुस्कान के साथ अपने हर दिन को जीते हैं, वह डॉक्टर भास्कर समेत हर किसी के जीवन को नई रोशनी दे जाता है। आठ दशमलव एक (8.1) रेटिंग वाली यह भावनात्मक रचना दर्शकों के लिए जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है।
दोस्ती और बदले की महागाथा शोले
भारतीय सिनेमाई इतिहास की जब भी सबसे बड़ी मील के पत्थर फिल्मों की चर्चा होती है, तो इसका नाम सबसे ऊपर आता है। इस भव्य फिल्म में धर्मेंद्र, संजीव कुमार, हेमा मालिनी, जया बच्चन और अमजद खान के साथ एक बेहद मजबूत कलाकारों का समूह मौजूद था। कहानी का केंद्र रामगढ़ के पूर्व पुलिस अफसर ठाकुर बलदेव सिंह हैं, जो अपने परिवार के साथ हुए अन्याय का बदला लेने और खूंखार डाकू गब्बर सिंह को कानून के हवाले करने के लिए दो छोटे अपराधियों जय और वीरू का सहारा लेते हैं। जय की शांत समझदारी और वीरू के चंचल मिजाज के बीच की अमर दोस्ती, एक्शन और संवाद आज भी जनमानस में बसे हुए हैं। आठ दशमलव एक (8.1) रेटिंग दर्ज कराने वाली यह ऐतिहासिक फिल्म प्राइम वीडियो पर देखने के लिए उपलब्ध है।
अंधेरे से रोशनी की ओर ले जाती असाधारण दास्तान ब्लैक
संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी यह भावुक कहानी मानवीय इच्छाशक्ति और संवेदनाओं की अनूठी मिसाल है। इसमें रानी मुखर्जी के साथ मुख्य भूमिका निभाते हुए अभिनेता ने अपने करियर के सबसे उत्कृष्ट अभिनय में से एक को अंजाम दिया। यह कहानी मिशेल नाम की एक ऐसी लड़की की जिंदगी पर केंद्रित है, जो देख, सुन और बोल नहीं सकती। दुनिया के घने अंधेरे में कैद उस बच्ची के जीवन में उम्मीद की रोशनी जगाने का संकल्प उसके शिक्षक देवराज सहाय लेते हैं। एक जिद्दी शिक्षक और उसकी छात्रा के बीच का यह सफर कई भावुक मोड़ों से गुजरता है। आठ दशमलव एक (8.1) की रेटिंग हासिल करने वाली यह दिल को छू लेने वाली फिल्म नेटफ्लिक्स पर मौजूद है।
सहमति और सामाजिक सवालों को कटघरे में खड़ा करती पिंक
अनिरुद्ध रॉय चौधरी के निर्देशन में तैयार हुई यह अदालती कानूनी थ्रिलर फिल्म आधुनिक समाज में महिलाओं की स्वतंत्रता, सुरक्षा और बुनियादी अधिकारों से जुड़े सवालों को बेहद मजबूती से सामने लाती है। इसमें तापसी पन्नू, कीर्ति कुल्हारी, एंड्रिया तारियांग और अंगद बेदी ने बहुत अहम भूमिकाएं निभाई हैं। कहानी तीन कामकाजी युवतियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक प्रभावशाली युवक के हमले से खुद का बचाव करने के बाद उल्टे झूठे कानूनी शिकंजे और समाज के तानों में फंस जाती हैं। उस मुश्किल घड़ी में सेवानिवृत्त वकील दीपक सहगल उनकी पैरवी करने का बीड़ा उठाते हैं और अदालत में सामाजिक पूर्वाग्रहों की धज्जियां उड़ा देते हैं। आठ (8) की मजबूत रेटिंग वाली यह विचारोत्तेजक फिल्म जियो हॉटस्टार पर देखी जा सकती है।
दो भाइयों के विचारों की तकरार दिखाती दीवार
अपराध और मानवीय रिश्तों के द्वंद्व को सामने रखती यह कहानी समाज की विसंगतियों और बदलते दौर का सटीक खाका खींचती है। इसमें शशि कपूर, निरूपा रॉय, परवीन बाबी और नीतू सिंह ने प्रमुख भूमिकाएं निभाई थीं। कथानक दो सगे भाइयों विजय और रवि के विपरीत जीवन पथ पर आधारित है। बचपन में झेले गए अन्याय, अपमान और तंगहाली के चलते विजय गलत और गैरकानूनी रास्तों को चुनकर दौलत और ताकत की दुनिया का बेताज बादशाह बनने की कोशिश करता है, जबकि उसका भाई रवि सिद्धांतों पर चलते हुए एक निष्ठावान पुलिस अधिकारी बनता है। व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश और पारिवारिक बिखराव को बयां करने वाली इस रचना की रेटिंग आठ (8) है, और इसे दर्शक अमेजन प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं।
कला, प्रसिद्धि और व्यक्तिगत अहंकार के टकराव की कहानी अभिमान
ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन की यह प्रस्तुति दांपत्य जीवन में पनपने वाले अहंकार और असुरक्षा की भावना का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण करती है। इसमें जया भादुड़ी, असरानी और बिंदू ने अपने किरदारों को बहुत खूबसूरती से निभाया था। कहानी सुबीर नाम के एक बेहद मशहूर गायक की है, जो गांव की एक सीधी-साधी लड़की उमा की मधुर आवाज का कायल होकर उससे विवाह कर लेता है। वह उमा को भी संगीत की दुनिया में आगे बढ़ाता है, लेकिन जब उमा की शोहरत और लोकप्रियता उसके अपने कद से कहीं आगे निकलने लगती है, तो सुबीर के भीतर जलन और हीनभावना घर करने लगती है। एसडी बर्मन के अमर संगीत से सजी यह फिल्म सात दशमलव आठ (7.8) रेटिंग के साथ अमेजन प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम की जा रही है।



















