खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ महाराष्ट्र में चलाए जा रहे कड़े प्रशासनिक अभियान को अब फिल्म जगत से भी सीधा समर्थन मिलने लगा है। अभिनेत्री मल्लिका शेरावत ने सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन यानी एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे के कामकाज की दिल खोलकर सराहना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा को लेकर बरती जा रही सख्ती के कारण ही आम नागरिक बिना किसी संकोच या डर के भोजन ग्रहण कर पा रहे हैं।
नाश्ते की मेज से अभिनेत्री ने जताया आभार
वायरल क्लिप में मल्लिका शेरावत नाश्ते की मेज पर इडली और चटनी का स्वाद लेती हुई दिखाई दे रही हैं। प्लेट में रखे भोजन का आनंद लेते हुए उन्होंने सीधे तौर पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के कदमों का उल्लेख किया। अभिनेत्री ने बातचीत के लहजे में कहा कि उनके कड़े नियम और ऊंचे आदर्श सभी को सुरक्षित रख रहे हैं, जिसके चलते वह बेहद सुकून से भोजन कर पा रही हैं।
आपकी वजह से अब मैं शांति से खाना खा सकती हूं।
अभिनेत्री ने वीडियो के साथ लिखे विवरण में भी प्रशासनिक प्रमुख के प्रयासों के प्रति विशेष आभार दर्ज किया। उन्होंने रेखांकित किया कि निगरानी तंत्र इतना चौकन्ना है कि गलत काम करने वाले किसी भी हाल में बच नहीं सकते। इस संदेश के सामने आने के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आम लोगों की तरफ से भी बड़ी संख्या में सकारात्मक टिप्पणियां देखने को मिलीं। कई इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वह ऐसी चुनिंदा अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने एक ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ लोक सेवक की सार्वजनिक रूप से हौसलाअफजाई की है। उपयोगकर्ताओं ने टिप्पणी अनुभाग में सुरक्षित और स्वस्थ भारत जैसे नारों के साथ इस पहल का स्वागत किया।
मिलावटखोरों पर कसा शिकंजा
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की कमान संभालने के बाद से ही तुकाराम मुंढे लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। खानपान की वस्तुओं में अवांछित तत्वों की मिलावट रोकने के लिए उनकी टीम पूरे राज्य में लगातार औचक निरीक्षण और कड़ी कानूनी कार्रवाई कर रही है। दैनिक उपभोग के सामानों की गुणवत्ता जांचने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कदम उठाने की इस मुहिम ने राज्यभर में व्यापक ध्यान आकर्षित किया है।
मुश्किल हालातों से सिविल सेवा तक का सफर
प्रशासनिक गलियारों में अपनी बेबाक कार्यशैली और कड़े अनुशासन के लिए पहचाने जाने वाले तुकाराम मुंढे का व्यक्तिगत जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण रहा है। वह महाराष्ट्र के बीड जिले की पृष्ठभूमि से संबंध रखते हैं, जहां उनका बचपन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बीता। कमजोर माली हालत के चलते वह अपने माता-पिता के संग साप्ताहिक हाट में सब्जियां बेचने का कार्य करते थे। उन्होंने एक मिट्टी के कच्चे मकान में रहते हुए अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की और कई मर्तबा नंगे पांव चलकर विद्यालय पहुंचे। आम लोगों तथा अपने परिवार को व्यवस्था की खामियों से जूझते देखकर उन्होंने सिविल सेवा में कदम रखने का संकल्प लिया था, जिसे पूरा कर वह आज व्यवस्था सुधार में जुटे हैं।


















