ताज नगरी में व्रत और त्योहारों का दौर थमने के साथ ही मांसाहारी भोजन के दीवानों के तेवर बदल गए हैं। शहर के विभिन्न कोनों में स्थित नॉनवेज की दुकानों पर इन दिनों ग्राहकों का तांता लगा हुआ है। सावन के पवित्र महीने में जिन लोगों ने मांसाहारी व्यंजनों से तौबा कर रखी थी, वे अब जमकर अपनी पसंद के व्यंजनों का लुत्फ उठा रहे हैं। शाम ढलते ही शहर की मशहूर दुकानों पर लजीज कबाब की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींच रही है।
घर के मसालों और खड़े मसालों का जादू
होटल क्लार्क इन के पास स्थित प्रसिद्ध चम्पारन चिकन शॉप अपने अनोखे स्वाद के लिए जानी जाती है। यहाँ के संचालक जीतेन्द्र कुमार का कहना है कि उनके कबाब की खासियत उसमें इस्तेमाल होने वाले मसालों का अनूठा मेल है। कबाब तैयार करने के लिए बाजार के रेडीमेड मसालों की जगह घर पर कूटे गए ताजे मसालों और खड़े मसालों के मिश्रण का उपयोग किया जाता है। यही वजह है कि यहाँ बनने वाले व्यंजनों की महक और स्वाद दूर-दूर तक के खाने के शौकीनों को अपनी तरफ आकर्षित करती है।
तंदूर की धीमी आंच पर पकाने की खास कला
स्वादिष्ट तंदूरी मटन कबाब और तंदूरी चिकन कबाब को बनाने की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प है। कीमा और विशेष अवयवों को करीने से आकार देने के बाद इन्हें तंदूर में भट्टी की धीमी आँच पर पकाया जाता है। इन कबाब को लगभग 20 से 25 मिनट तक तंदूर के अंदर रखा जाता है, ताकि अंदर तक आँच पहुँच सके और मसाले अच्छी तरह रच-बस जाएँ। इस धीमी प्रक्रिया के कारण कबाब बाहर से क्रिस्पी और अंदर से बेहद रसीले व नरम बनते हैं।
पॉकेट फ्रेंडली कीमत और स्वच्छता का पूरा ध्यान
दुकान संचालक जीतेन्द्र कुमार ने जानकारी दी कि इन लजीज कबाब का आनंद ग्राहक महज 140 रुपये की किफायती कीमत पर उठा सकते हैं। स्वाद के साथ-साथ गुणवत्ता और साफ-सफाई का भी पूरा ख्याल रखा जाता है ताकि खाने वाले की सेहत पर कोई असर न पड़े। प्लेट में परोसते समय इन कबाब के साथ ताखी हरी चटनी, कटे हुए प्याज और नींबू के टुकड़े दिए जाते हैं, जो इसके स्वाद को और अधिक बढ़ा देते हैं। यही वजह है कि सावन के बाद आगरा में ये कबाब हर नॉनवेज प्रेमी की पहली पसंद बन चुके हैं।



















