ताजनगरी आगरा अपने ऐतिहासिक स्मारकों के साथ-साथ लाजवाब खान-पान की संस्कृति के लिए भी पहचानी जाती है। यहां विभिन्न प्रकार के लजीज व्यंजनों के शौकीनों के लिए कई लोकप्रिय ठिकाने मौजूद हैं। इसी कड़ी में शहर के प्राची टॉवर पुलिस चौकी के सामने स्थित प्राचीन चिकन शॉप इन दिनों नॉनवेज प्रेमियों के बीच खास चर्चा में है। इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां चिकन को आधुनिक बर्तनों या गैस चूल्हे पर नहीं, बल्कि मिट्टी की छोटी-छोटी हांडियों में रखकर कोयले की धीमी आंच पर बेहद इत्मीनान से तैयार किया जाता है।
सीक्रेट खड़े मसालों और सरसों तेल से तैयार होती है ग्रेवी
इस चिकन शॉप के संचालक धर्मेंद्र कुमार के अनुसार, इस खास स्वाद की नींव उनकी खास ग्रेवी में छिपी है। ग्रेवी बनाने के लिए सबसे पहले घर में पारंपरिक तरीके से कूटे गए खड़े मसालों और कुछ खास गुप्त घरेलू मसालों का मिश्रण बनाया जाता है। खाना पकाने के लिए शुद्ध सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है, जो चिकन के तीखेपन और सौंधेपन को संतुलित रूप देता है। जब ग्रेवी का आधार तैयार हो जाता है, तब मिट्टी की छोटी हांडियों में चिकन के बड़े-बड़े टुकड़े और ग्रेवी को एक साथ भरा जाता है।
तंदूर में चार से पांच घंटे तक धीमी आंच पर पकने का हुनर
हांडियों में सामग्री भरने के बाद उन्हें सीधे तंदूर में कोयले की मंद आंच पर रख दिया जाता है। धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि चिकन को पूरी तरह पकने में लगभग चार से पांच घंटे का लंबा समय लगता है। लगातार मंद आंच पर पकने की वजह से सभी खड़े मसालों का रस और पोषक तत्व गोश्त के रेशों में गहराई तक समा जाते हैं। इसके अलावा मिट्टी के बर्तन से आने वाली भीनी-भीनी सौंधी महक चिकन के स्वाद को पूरी तरह बदल देती है। यही धीमी पाक-कला ग्राहकों को ग्रामीण अंचल के पारंपरिक चूल्हे के जायके का एहसास कराती है।
फुल और हाफ प्लेट की दरें और ग्राहकों का अनुभव
कीमत और खुराक की बात करें तो यहां ग्राहकों की सुविधा के हिसाब से दो विकल्प रखे गए हैं। दुकान पर फुल प्लेट हांडी चिकन की कीमत 980 रुपये रखी गई है, जिसमें ग्राहकों को बड़े आकार के 10 पीस परोसे जाते हैं। वहीं हाफ प्लेट का विकल्प चुनने वालों को 490 रुपये चुकाने होते हैं, जिसमें 5 बड़े पीस दिए जाते हैं। आगरा के स्थानीय निवासियों के अलावा आसपास के दूर-दराज के इलाकों से भी लोग इस मिट्टी के बर्तन वाले चिकन का लुत्फ उठाने आ रहे हैं।
देसी स्वाद और सौंधी खुशबू के मुरीद हुए खाने के शौकीन
दुकान पर पहुंचे ग्राहक देवेंद्र सिंह ने साझा किया कि वह इस स्वाद के इतने दीवाने हैं कि अक्सर यहां खींचे चले आते हैं। उनका कहना है कि मिट्टी के बर्तन में धीमी आंच पर पकने की वजह से इसका स्वाद और सुगंध दोनों बेजोड़ बन जाते हैं, जो अन्य किसी सामान्य दुकान पर नहीं मिलता। वहीं नियमित ग्राहक दुर्गेश गोस्वामी ने बताया कि वह लगभग हर दिन यहां चिकन या मटन खाने आते हैं। उन्होंने कहा कि मिट्टी की हांडी में मसालों का जो असली तीखा और देसी स्वाद उभर कर आता है, वह सीधे गांव के पुराने दिनों की याद दिला देता है।



















