राजस्थान की गलियों में मशहूर कढ़ी-कचौड़ी अब आप अपनी रसोई में भी बना सकते हैं और इसका असली अजमेरी स्वाद घर बैठे चख सकते हैं। आमतौर पर कचौड़ी को आलू की सब्जी के साथ परोसा जाता है, लेकिन अजमेर सहित राजस्थान के कई हिस्सों में इसे खट्टी-तीखी कढ़ी के साथ खाने का चलन है। कुरकुरी और मसालेदार कचौड़ी जब गाढ़ी कढ़ी में डूबती है, तो यह जायका किसी को भी दीवाना बना सकता है। एक बार यह डिश बनाकर देखेंगे तो बार-बार बनाने का मन करेगा, और यह लंच या वीकेंड की खास दावत के लिए एकदम सही विकल्प है।
कढ़ी-कचौड़ी के लिए क्या-क्या चाहिए
कचौड़ी का आटा तैयार करने के लिए 2 कप मैदा, 3 बड़े चम्मच घी, स्वादानुसार नमक, जरूरत भर पानी और तलने के लिए तेल लगेगा। अंदर भरने वाली स्टफिंग के लिए आधा कप भीगी हुई मूंग दाल के साथ सौंफ, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हींग और नमक मिलाया जाता है। कढ़ी बनाने के लिए 1 कप खट्टा दही, 2 बड़े चम्मच बेसन, 4 कप पानी, हल्दी और नमक की जरूरत होती है। वहीं तड़के के लिए राई, जीरा, हींग, करी पत्ता और साबुत लाल मिर्च तैयार रखें। इन्हीं सामग्रियों से यह डिश स्वाद, खुशबू और पारंपरिक राजस्थानी अंदाज से भरपूर बनकर तैयार होती है।
आटा गूंधने से स्टफिंग तक की तैयारी
सबसे पहले मैदा में घी और नमक डालकर थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए सख्त आटा गूंध लें। इस आटे को करीब 20 मिनट तक ढककर रख दें, जिससे यह अच्छी तरह सेट हो जाए। इसी बीच भीगी हुई मूंग दाल को दरदरा पीस लें। एक पैन में तेल गर्म करके उसमें हींग और सौंफ डालें और खुशबू उठने दें। इसके बाद पिसी हुई दाल के साथ धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक डालकर 5 से 7 मिनट तक अच्छी तरह भूनें। स्टफिंग तैयार होने के बाद इसे पूरी तरह ठंडा होने दें, तभी इसे कचौड़ी में भरने के लिए इस्तेमाल करें।
कचौड़ी भरने और तलने का तरीका
अब तैयार आटे से छोटी-छोटी लोइयां बना लें और उनमें दाल वाली स्टफिंग भरकर किनारों को अच्छी तरह बंद कर दें, ताकि तलते समय कचौड़ी फटे नहीं। कड़ाही में तेल गर्म करें और धीमी आंच पर कचौड़ियों को तब तक तलें जब तक वे सुनहरी और कुरकुरी न हो जाएं। धीमी आंच पर तलने से कचौड़ी अंदर तक अच्छी तरह पकती है और बाहर से एकदम कुरकुरी बनती है।
खट्टी-तीखी कढ़ी कैसे बनाएं
कढ़ी बनाने के लिए दही, बेसन, हल्दी, नमक और पानी को अच्छी तरह फेंटकर बिना गांठ वाला स्मूद घोल तैयार करें। इस घोल को गैस पर चढ़ाकर लगातार चलाते रहें ताकि उसमें गांठ न पड़े और वह जलकर तले से न चिपके। उबाल आने के बाद आंच धीमी कर दें और इसे करीब 20 मिनट तक पकने दें। इतनी देर पकाने से कढ़ी अच्छी तरह गाढ़ी हो जाती है और उसका खट्टा-तीखा स्वाद पूरी तरह उभर आता है।
तड़का लगाएं और गरमागरम परोसें
अब एक छोटे पैन में तेल गर्म करें और उसमें राई, जीरा, हींग, करी पत्ता और साबुत लाल मिर्च डालकर तड़का तैयार करें। इस तड़के को तुरंत तैयार कढ़ी में मिला दें और 2 से 3 मिनट तक धीमी आंच पर और पकाएं, जिससे तड़के की पूरी खुशबू और स्वाद कढ़ी में समा जाए। इसके बाद गरमागरम और कुरकुरी कचौड़ियों को खट्टी-तीखी कढ़ी के साथ परोसें। ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डालकर सजा सकते हैं और साथ में हरी चटनी या इमली की चटनी भी परोसी जा सकती है। घर पर बनी यह अजमेर स्टाइल कढ़ी-कचौड़ी हर उम्र के लोगों को पसंद आने वाली डिश है।













