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आटे-गुड़ से बनने वाली इस मिठाई के बिना अधूरी है मिथिला में दुल्हन की अगवानीखानपान
3 जुल॰ 2026, 4:34 pm (46 दिन पहले)· 2

आटे-गुड़ से बनने वाली इस मिठाई के बिना अधूरी है मिथिला में दुल्हन की अगवानी

मधुबनी सहित पूरे मिथिलांचल में शादी के बाद नई दुल्हन के स्वागत में आटे और गुड़ से बनी खास मिठाई गुना मुना तैयार की जाती है, जिसे 15 से 20 दिनों तक आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है।

बिहार के मधुबनी जिले समेत पूरे मिथिलांचल में शादी-ब्याह के मौके पर एक खास मिठाई तैयार होती है, जिसका नाम है गुना मुना। यह सिर्फ एक पकवान नहीं, बल्कि नई दुल्हन के स्वागत से जुड़ी एक पुरानी रस्म का हिस्सा है। आटे और गुड़ से बनने वाली यह मिठाई स्वाद में जितनी लाजवाब होती है, उतनी ही खास वजहों से मिथिला की संस्कृति में इसकी जगह बनी हुई है।

मिथिलांचल के खान-पान में गुना मुना की जगह

मिथिलांचल अपनी समृद्ध संस्कृति और पारंपरिक पकवानों के लिए जाना जाता है। यहां हर त्योहार, हर मांगलिक मौके और हर पारिवारिक समारोह के लिए अलग-अलग तरह के खास व्यंजन बनाने की परंपरा रही है। गुना मुना भी इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में से एक है, जिसे मुख्य रूप से शादी-ब्याह के अवसर पर तैयार किया जाता है। इसे बनाना आसान नहीं है, थोड़ी मेहनत और समय लगता है, लेकिन मिथिला की रसोई में इसके बिना नई दुल्हन के स्वागत की रस्म पूरी नहीं मानी जाती। इस मिठाई की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक बार बनाने के बाद इसे 15 से 20 दिनों तक बड़ी आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है। यह जल्दी खराब नहीं होती और लंबे समय तक अपना स्वाद बनाए रखती है, इसलिए ज्यादातर घरों में इसे पहले से ही बनाकर रख लिया जाता है।

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नई दुल्हन के स्वागत की रस्म से गहरा नाता

वैसे तो गुना मुना सामान्य दिनों में भी बनाया जाता है, लेकिन इसका असली महत्व तब सामने आता है जब शादी के बाद नई दुल्हन पहली बार अपने ससुराल पहुंचती है। आमतौर पर दुल्हन के घर आने से एक दिन पहले परिवार की महिलाएं मिलकर इसे तैयार करती हैं। जैसे ही रिश्तेदार, पड़ोसी और गांव के लोग नई दुल्हन को देखने घर पहुंचते हैं, उन्हें बाजार की मिठाई की जगह यही गुना मुना परोसा जाता है। स्थानीय महिलाएं ऋतु और पुष्पा बताती हैं कि यह सिर्फ खाने-पीने की चीज नहीं, बल्कि मिथिला की पारंपरिक मेहमाननवाजी और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जिसे आज भी कई परिवार पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निभाते हैं।

कैसे तैयार होता है गुना मुना

मैथिली भाषा में गुना मुना को 'अईभफर' के नाम से भी जाना जाता है। इसे बनाने के लिए गेहूं का आटा, गुड़, पानी, सौंफ और थोड़ा-सा मोयन इस्तेमाल होता है। सबसे पहले तेल या रिफाइंड को गर्म करके आटे में मोयन मिलाया जाता है, इसके बाद गुड़ के पानी की मदद से आटे को अच्छी तरह गूंथा जाता है। आटा तैयार हो जाने के बाद उसे कुछ देर ढककर रख दिया जाता है, ताकि वह सही तरीके से सेट हो सके। इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाई जाती हैं और हाथों से उन्हें बेलन जैसी लंबी और थोड़ी मोटी शक्ल दी जाती है। तैयार लोइयों को धीमी आंच पर रिफाइंड तेल या घी में तब तक तला जाता है, जब तक वे सुनहरी न हो जाएं। चूंकि गुना मुना आकार में थोड़ा मोटा होता है, इसलिए इसे अच्छी तरह पकाने के लिए धीमी आंच पर ही तलना जरूरी होता है। सही तरीके से बनने पर यह कई दिनों तक बिना खराब हुए सुरक्षित रहता है।

सीमित साधनों से निकली परंपरा, आज भी जिंदा

जब नई दुल्हन ससुराल पहुंचती है और लोग उसे देखने आते हैं, तब उन्हें गुना मुना खिलाकर मुंह मीठा कराया जाता है और साथ ही दुल्हन को आशीर्वाद भी दिया जाता है। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि पुराने समय में आर्थिक साधन सीमित होने की वजह से लोग महंगी मिठाइयों की जगह आटे और गुड़ से बनने वाला यही पारंपरिक व्यंजन तैयार करते थे। समय बदला, लोगों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हुई और बाजार में तरह-तरह की मिठाइयां भी आ गईं, लेकिन गुना मुना बनाने की परंपरा आज भी कायम है। अब यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक रस्म बन चुका है। देश हो या विदेश, जहां भी मैथिली भाषी परिवार रहते हैं, वे शादी-ब्याह और शुभ मौकों पर इस परंपरा को निभाते हुए गुना मुना जरूर बनाते हैं। यही वजह है कि यह पारंपरिक मिठाई आज भी मिथिलांचल की सांस्कृतिक पहचान और उसकी खान-पान की विरासत को जिंदा रखे हुए है।

सवाल-जवाब

गुना मुना क्या है?
यह मिथिलांचल की एक पारंपरिक मिठाई है जो गेहूं के आटे और गुड़ से बनाई जाती है और खासतौर पर शादी में नई दुल्हन के स्वागत के लिए तैयार की जाती है।
गुना मुना को मैथिली भाषा में क्या कहा जाता है?
मैथिली भाषा में इसे 'अईभफर' भी कहा जाता है।
गुना मुना कितने दिनों तक खराब नहीं होता?
सही तरीके से बनाने के बाद इसे 15 से 20 दिनों तक आसानी से सुरक्षित रखा जा सकता है।
गुना मुना किन चीजों से बनाया जाता है?
इसे गेहूं का आटा, गुड़, पानी, सौंफ और थोड़े मोयन से तैयार किया जाता है।
गुना मुना कब परोसा जाता है?
जब नई दुल्हन पहली बार ससुराल आती है और रिश्तेदार, पड़ोसी व गांव के लोग उसे देखने आते हैं, तब मिठाई की जगह गुना मुना परोसा जाता है।
पहले लोग गुना मुना ही क्यों बनाते थे?
बुजुर्गों के मुताबिक पहले आर्थिक साधन सीमित होने के कारण लोग महंगी मिठाइयों की जगह आटे और गुड़ से बनने वाला यही पारंपरिक व्यंजन तैयार करते थे।
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