भाई और बहन के अटूट स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन का पावन पर्व बिना तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवानों के अधूरा माना जाता है। इस ख़ास मौके पर अक्सर मिठाइयों के साथ कुछ नमकीन और खस्ता खाने की इच्छा होती है। यदि आप इस बार बाजार से डिब्बाबंद स्नैक्स खरीदने के बजाय रसोई में ही कुछ बेहतरीन और लंबे समय तक चलने वाला नाश्ता तैयार करना चाहते हैं, तो पारंपरिक मठरी से बढ़िया विकल्प कोई नहीं हो सकता। शाम की गरम चाय के साथ परोसी जाने वाली यह कुरकुरी मठरी न केवल हर किसी का स्वाद बढ़ाती है, बल्कि इसे त्योहार से काफी दिन पहले बनाकर आसानी से स्टोर भी किया जा सकता है।
घर पर मठरी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
स्वाद में लाजवाब और एकदम खस्ता मठरी तैयार करने के लिए रसोई में मौजूद बुनियादी सामग्रियों की आवश्यकता होती है। इसके लिए मुख्य रूप से मैदा और सूजी का मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है। स्वाद को संतुलित करने के लिए इसमें स्वादानुसार नमक, पेट के लिए फायदेमंद अजवाइन और आधा छोटा चम्मच दरदरी पिसी हुई काली मिर्च मिलाई जाती है। इसके अलावा मठरी के आटे को सही खस्तापन देने के लिए चार बड़े चम्मच घी या तेल का मोयन इस्तेमाल किया जाता है। आटा गूंधने के लिए आवश्यकतानुसार पानी की जरूरत पड़ती है। यदि आप चाहें तो इसमें अतिरिक्त सुगंध और स्वाद के लिए कसूरी मेथी अथवा जीरा भी शामिल कर सकते हैं।
आटा गूंधने और मोयन जांचने की आसान विधि
मठरी बनाने की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले एक बड़े और चौड़े बर्तन में मैदा और सूजी को एक साथ निकाल लें। अब इस सूखे मिश्रण में नमक, अजवाइन और दरदरी कुटी काली मिर्च डालकर अच्छी तरह मिला लें। इसके बाद इसमें चार बड़े चम्मच घी या तेल डालें। मोयन को आटे में दोनों हाथों से मसलते हुए समान रूप से मिलाएं। मोयन की सही मात्रा जांचने के लिए थोड़े से आटे को अपनी हथेली में दबाकर मुट्ठी बांधें। यदि आटा आपस में बंधने लगे और बिखरे नहीं, तो समझ जाएं कि मोयन का अनुपात एकदम सटीक है।
इसके बाद मिश्रण में थोड़ा-थोड़ा करके पानी मिलाते जाएं और एक सख्त आटा तैयार कर लें। इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि आटा पूरी या रोटी की तरह नरम बिल्कुल न हो, बल्कि थोड़ा सख्त रहे। जब आटा अच्छी तरह से गुंध जाए, तो उसे किसी कपड़े या ढक्कन से ढककर 15 से 20 मिनट के लिए रेस्ट करने के लिए रख दें ताकि सूजी पानी सोखकर सेट हो जाए।
मठरी को आकार देना और छेद करने की प्रक्रिया
नियत समय पूरा होने के बाद आटे को एक बार फिर से हल्का सा मसल लें। अब इस आटे से छोटी-छोटी लोइयां तैयार करें। इन लोइयों को बेलन की सहायता से थोड़ा मोटा बेल लें। यदि आप अपनी मठरी को एकदम एक समान गोल आकार देना चाहते हैं, तो किसी छोटे ढक्कन या कटर की मदद से उन्हें काट सकते हैं। इसके बाद प्रत्येक तैयार की गई मठरी पर कांटे वाली चम्मच की मदद से दो से तीन छेद कर दें। यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि छेद करने से तलते समय मठरियां पूरियों की तरह फूलती नहीं हैं और अंदर तक समान रूप से सिकती हैं।
तलने की सही तकनीक और भंडारण
मठरी को तलने के लिए एक कढ़ाई में तेल डालकर गर्म करें। ध्यान रखें कि तेल बहुत अधिक गर्म नहीं होना चाहिए। अब मध्यम और धीमी आंच पर तैयार मठरियों को एक-एक करके तेल में डालें। तेज आंच पर तलने से बचें, क्योंकि इससे मठरी ऊपर से तो तुरंत सुनहरी हो जाएगी लेकिन अंदर से कच्ची रह जाएगी। मठरियों को कढ़ाई में डालने के बाद धीरे-धीरे पलटे से चलाते रहें। लगभग 8 से 10 मिनट के भीतर मठरियां दोनों तरफ से सुंदर सुनहरी और बेहद कुरकुरी हो जाएंगी।
जब मठरियां पूरी तरह से सिक जाएं, तो उन्हें कढ़ाई से निकालकर टिश्यू पेपर पर रख लें ताकि उनका अतिरिक्त तेल निकल जाए। जब मठरियां कमरे के तापमान पर पूरी तरह से ठंडी हो जाएं, तब उन्हें किसी साफ और एयरटाइट डिब्बे में बंद करके रख दें। यह मठरी कई दिनों तक बिल्कुल ताज़ा और खस्ता बनी रहती है।
परफेक्ट और खस्ता मठरी बनाने के गुप्त टिप्स
यदि आप चाहते हैं कि आपकी बनाई मठरी बाजार जैसी ही खस्ता बने, तो कुछ छोटी-छोटी बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। सबसे पहली बात यह है कि मैदे के साथ सूजी का प्रयोग अवश्य करें, क्योंकि सूजी मठरी को एक बढ़िया क्रंच देती है। दूसरी बात, मोयन की सही मात्रा का होना बेहद जरूरी है, वरना मठरी सख्त हो सकती है। तीसरी बात, आटे को हमेशा सख्त ही गूंधें, क्योंकि नरम आटा मठरी को खस्ता नहीं बनने देता। चौथा सबसे अहम नियम यह है कि तलते समय आंच हमेशा धीमी या मध्यम ही रखें, जिससे मठरी 8 से 10 मिनट में अंदर तक अच्छी तरह सिके। अंत में, स्वाद में नयापन लाने के लिए आटे में कसूरी मेथी या जीरा मिलाकर अपनी पसंद का फ्लेवर दे सकते हैं।



















