छत्तीसगढ़ का बस्तर क्षेत्र न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने विशिष्ट खान-पान के लिए भी प्रसिद्ध है। आधुनिकता के दौर में जहां तरह-तरह के बाजारी मसालों का प्रचलन बढ़ा है, वहीं बस्तर की पारंपरिक रसोई में आज भी सादगी और प्राकृतिक जायके को प्राथमिकता दी जाती है। यहां जंगलों और मैदानी क्षेत्रों में स्वतः उगने वाली पत्तियों, नदी किनारे मिलने वाली साग और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्रियों से ऐसे व्यंजन बनाए जाते हैं जो न केवल स्वादिष्ट होते हैं बल्कि सेहत के लिए भी गुणकारी माने जाते हैं।
मैदानी क्षेत्रों और नदी किनारों की प्राकृतिक साग
बस्तर के मैदानी इलाकों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली टोरटा भाजी अपनी सादगी और स्वाद के लिए जानी जाती है। स्थानीय लोग इस भाजी की सूखी सब्जी के साथ-साथ आमट भी तैयार करते हैं। इसे पकाने की देसी विधि बेहद सरल है, जिसमें प्याज और सूखी लाल मिर्च का तड़का लगाया जाता है। इसमें बाजारी मसालों का प्रयोग लगभग न के बराबर होता है, जिससे इसका प्राकृतिक स्वाद बना रहता है।
इसी तरह चिउर भाजी भी बस्तर की एक अनोखी सौगात है जो केवल नदी के किनारों पर स्वतः उगती है। नदी तटों से चुनकर लाई जाने वाली इस भाजी को भी पारंपरिक देसी अंदाज में पकाया जाता है। कम मसालों के साथ बनने वाली इस सब्जी में प्याज और लाल मिर्च का तड़का देकर इसका असली जायका उभारा जाता है।
खट्टापन और इमली का खास संयोजन
बस्तर के व्यंजनों में इमली के पानी का प्रयोग खट्टापन और अनूठा स्वाद लाने के लिए बहुतायत से किया जाता है। भेंडा भाजी यहां की एक ऐसी ही लोकप्रिय सब्जी है जो अपने हल्के खट्टे स्वाद के लिए पसंद की जाती है। इसे प्याज और हरी मिर्च के साथ साधारण तरीके से पकाया जाता है, फिर भी इसका जायका बेहद अनोखा होता है। बस्तर भ्रमण पर आने वाले पर्यटकों के लिए यह भाजी एक खास अनुभव बन जाती है।
सब्जियों के अलावा फल-सब्जी के प्रयोग में भी बस्तर के लोगों की पाक कला झलकती है। आमतौर पर खीरे का उपयोग सलाद के रूप में किया जाता है, लेकिन बस्तर में पके हुए खीरे की आमट बनाई जाती है। इस विशेष व्यंजन को तैयार करने के लिए चावल को पीसकर पके हुए खीरे के साथ मिलाया जाता है और इसमें इमली का पानी डाला जाता है। चावल का पेस्ट और इमली का खट्टापन मिलकर इसे एक गाढ़ा और स्वादिष्ट व्यंजन बना देते हैं, जिसे चावल के साथ चाव से खाया जाता है।
अंगारों पर पकने वाला अंडा फुडगा
बस्तर में अंडा तैयार करने की पारंपरिक शैली भी काफी अलग है। यहां अंडा फुडगा एक लोकप्रिय और बेहद पसंदीदा व्यंजन है। इसे बनाने के लिए अंडे में नमक और मिर्च मिलाकर उसे पत्तल में लपेटा जाता है। इसके बाद पत्तल की इस पोटली को सीधे जलते हुए अंगारों और आग में डालकर पकाया जाता है। लकड़ी या कंडे की आंच में पत्तल के भीतर धीरे-धीरे पकने की इस विधि से अंडे में एक अनोखा सौंधापन और बेहतरीन स्वाद आ जाता है।
स्वास्थ्यवर्धक मुनगा भाजी और लहसुन का तड़का
बस्तर का खान-पान स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता को भी दर्शाता है। मुनगा भाजी इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस भाजी को पकाने के लिए सबसे पहले पानी में उबाला जाता है। उबालने के बाद इसमें केवल लहसुन का तड़का दिया जाता है और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है। इस व्यंजन में किसी भी प्रकार के अतिरिक्त मसालों का उपयोग नहीं किया जाता। मसालों से मुक्त होने के कारण यह सुपाच्य होती है और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है।
इमली और देसी अंदाज में बने नॉनवेज व्यंजन
मांसाहारी भोजन के शौकीनों के लिए बस्तर में कई पारंपरिक विकल्प मौजूद हैं। सुकसी झोर यहां का एक प्रसिद्ध मांसाहारी व्यंजन है, जिसे छोटी मछलियों से तैयार किया जाता है। इस झोर की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें बाजार का कोई भी रेडीमेड मसाला नहीं डाला जाता, बल्कि इमली का पानी मिलाकर इसका तीखा-खट्टा रसा तैयार किया जाता है। इसका लाजवाब स्वाद नॉनवेज प्रेमियों को खूब भाता है।
इसी क्रम में चिकन झोर भी बस्तर की थाली की एक मुख्य पहचान है। बस्तर शैली में चिकन बनाते समय भी इमली के पानी का उपयोग विशेष रूप से किया जाता है। बहुत कम मसालों की मदद से धीमी आंच पर पकने वाला चिकन झोर अपने अलग जायके के लिए जाना जाता है और बस्तर आने वालों के लिए इसे चखना एक यादगार अनुभव होता है।



















