रक्षाबंधन और आगामी त्योहारों के सीजन में मिठाइयों की मांग में तेजी से बढ़ोतरी होती है। सोशल मीडिया पर अक्सर व्यापारिक स्तर पर मिठाई बनाने में स्वच्छता की कमी वाले वीडियो सामने आते रहते हैं, जिससे लोगों की चिंताएं बढ़ जाती हैं। इसके अलावा, त्योहारों के समय बाजार में बिकने वाले मावे और मिठाइयों में मिलावट का खतरा भी बना रहता है। साधारण खरीदार के लिए असली और नकली मिठाई की पहचान करना बहुत मुश्किल काम होता है। ऐसी स्थिति में अपने परिवार और प्रियजनों के लिए घर पर ही शुद्ध मिठाई तैयार करना सबसे सुरक्षित विकल्प साबित होता है। हालांकि, चाशनी के सही तार बनाने या सामग्री के जटिल अनुपात से डरकर कई लोग घर में पेड़े बनाने से कतराते हैं। बिना चाशनी और बिना मैदे का इस्तेमाल किए केवल शुद्ध दूध से बेहद स्वादिष्ट और मक्खन जैसे नरम पेड़े तैयार किए जा सकते हैं।
दूध उबालने और बर्तन के चयन की सही विधि
पेड़े बनाने के लिए सबसे पहली और महत्वपूर्ण बात बर्तन का चुनाव है। दूध पकाने के लिए हमेशा मोटे तले वाली कड़ाही का उपयोग करना चाहिए, ताकि पकाने के दौरान दूध तली में चिपके नहीं और जले नहीं। इस रेसिपी के लिए डेढ़ से दो लीटर फुल क्रीम दूध की आवश्यकता होगी। यदि आपके पास कच्चा दूध उपलब्ध है तो उसका उपयोग कर सकते हैं, अन्यथा पहले से उबला हुआ दूध भी लिया जा सकता है।
कड़ाही में दूध डालने के बाद गैस जलाएं और उसे लगातार चलाते रहें जब तक कि उसमें पहला उबाल न आ जाए। लगातार चलाना इसलिए आवश्यक है ताकि दूध कड़ाही के तल में बैठकर जले नहीं। जैसे ही दूध में उबाल आ जाए, आंच को तुरंत धीमा कर दें। धीमी आंच पर दूध धीरे-धीरे पकता रहता है और कड़ाही से बाहर उफनकर नहीं गिरता।
चीनी मिलाने का सही समय और केसरिया रंग का तरीका
धीमी आंच पर दूध को तब तक गाढ़ा होने दें जब तक वह अपनी मूल मात्रा से आधा न रह जाए। दो लीटर दूध का उपयोग करने पर लगभग 300 ग्राम चीनी की आवश्यकता होती है। यदि आप केवल एक लीटर दूध से पेड़े बना रहे हैं, तो 150 ग्राम चीनी पर्याप्त रहेगी। चीनी डालते समय सबसे बड़ी सावधानी यह बरतनी होती है कि इसे एक साथ पूरी मात्रा में न डालें। यदि सारी चीनी एक साथ डाल दी जाएगी तो गाढ़ा हो रहा दूध फिर से बहुत पतला हो जाएगा।
चीनी को हमेशा दो-दो चम्मच करके थोड़ा-थोड़ा करके ही मिलाएं। हर बार चीनी मिलाने के बाद उसे अच्छे से घुलने दें। अगर आप केसरिया पेड़े बनाना चाहते हैं, तो इसी समय दूध में थोड़ी सी केसर की पत्तियां या धागे मिला सकते हैं। इससे पेड़ों में प्राकृतिक सुगंध और सुंदर केसरिया रंग आ जाता है। जब कड़ाही के मिश्रण में बुलबुले उठने लगें, तो गैस बंद कर दें। गैस बंद करने के बाद भी मिश्रण को कुछ देर लगातार चलाते रहें।
मावे को ठंडा करने और जमाने के दो तरीके
गैस बंद करने के बाद कड़ाही में तैयार हुए मावे को एक चौड़ी थाली में निकालकर अच्छी तरह फैला लें। इसे पंखे के नीचे रखकर कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें। यदि आपके पास समय की कमी है, तो थाली को सामान्य तापमान पर आने के बाद दो से तीन घंटे के लिए फ्रिज में रख सकते हैं। इससे मावा जल्दी जम जाता है और पेड़े तुरंत बनाए जा सकते हैं।
हालांकि, यदि आप हलवाई जैसा प्रामाणिक स्वाद और बनावट चाहते हैं, तो मावे को पूरी रात या 10 से 12 घंटे के लिए एक साफ कपड़े से ढंककर ठंडा होने दें। 10-12 घंटे का विश्राम मिलने से मावा और अधिक गाढ़ा तथा सफेद रंग का हो जाता है। पर्याप्त समय मिलने के बाद ठंडे हुए मावे को हाथों से अच्छी तरह मसलकर चिकना कर लें।
पेड़े का आकार देने और सजाने की अंतिम प्रक्रिया
मसले हुए चिकने मावे से लंबे रोल तैयार कर लें। इन रोल को चाकू या हाथों की मदद से छोटे-छोटे बराबर टुकड़ों में काट लें। अब हर टुकड़े को अपनी हथेलियों के बीच रखकर गोल-गोल घुमाते हुए पेड़े का सुंदर आकार दें। यदि आपके पास मिठाई के सांचे उपलब्ध हैं, तो उनका उपयोग करके पेड़ों पर डिजाइन भी बनाया जा सकता है।
पेड़ों को आकर्षक लुक देने के लिए उनके ऊपरी हिस्से पर बारीक कटी हुई पिस्ता या बादाम की कतरन दबाकर लगा दें। इस प्रकार बिना किसी मिलावट, बिना चाशनी और बिना मैदे के आपके मुंह में घुलने वाले शुद्ध घर के बने पेड़े बनकर तैयार हैं। इन्हें रक्षाबंधन पर भाइयों को खिलाएं या त्योहार के अवसर पर मेहमानों को परोसें।



















