बिहार के छपरा जिले में स्थित एक ग्रामीण बाजार इन दिनों अपने पारंपरिक स्वाद के लिए लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। गरखा प्रखंड के अंतर्गत आने वाले रेरिया बाजार में रामजी शाह का एक छोटा सा ठेला लगता है, जहां हर रोज जायके के शौकीनों का जमावड़ा देखने को मिलता है। भले ही यह एक साधारण ठेला हो, लेकिन यहां मिलने वाले समोसे और पकौड़ों का स्वाद बड़े-बड़े रेस्तरां को भी मात देता है। पिछले 15 वर्षों से भी अधिक समय से रामजी शाह इसी बाजार में अपनी दुकान सजा रहे हैं और आज भी लोगों को वही पुराना पारंपरिक स्वाद परोस रहे हैं।
घरेलू मसालों और सरसों तेल का खास कॉम्बिनेशन
इस ठेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां किसी भी प्रकार के तैयार बाजारू मसालों का प्रयोग नहीं किया जाता। रामजी शाह खुद अपने घर पर ही देसी अंदाज में मसाले तैयार करते हैं। वे समोसे का मसाला बनाने के लिए लहसुन, प्याज, गरम मसाला, हल्दी और मंगरैल समेत कई अन्य प्राकृतिक मसालों को खुद पीसकर मिलाते हैं। इसके अलावा, समोसों को तलने के लिए केवल शुद्ध सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है। सरसों के तेल में तले जाने के कारण यह भोजन पचने में आसान रहता है और पेट को नुकसान नहीं पहुंचाता।
समोसे के साथ परोसी जाने वाली चटनी और सलाद भी इसके स्वाद को दोगुना कर देती है। यहां समोसे के साथ ताजी धनिया चटनी, आंवला चटनी, कटा हुआ प्याज और हरी मिर्च ग्राहकों को दी जाती है। चटपटी चटनी और कुरकुरे समोसे की यह जुगलबंदी ही लोगों को बार-बार खींच लाती है।
स्कूल और ट्यूशन के बाद पिता का हाथ बटाते हैं बच्चे
इस छोटे से खाद्य ठेले को सुचारू रूप से चलाने में कुल तीन लोग लगे हुए हैं। रामजी शाह के साथ उनका बेटा और छोटी बेटी पूरी निष्ठा से काम में सहयोग करते हैं। उनके बच्चे दिन में अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं और स्कूल व ट्यूशन खत्म होने के बाद ठेले पर पहुंचकर अपने पिता की मदद करते हैं। परिवार की इस आपसी मेहनत और एकजुटता से ही पिछले डेढ़ दशक से यह ठेला लगातार ग्राहकों की पसंद बना हुआ है।
15 सालों से बरकरार है शुद्धता का वादा
गुणवत्ता और स्वाद के मामले में रामजी शाह कभी कोई समझौता नहीं करते। वे बताते हैं कि जो शुद्धता और स्वाद वे 15 साल पहले ग्राहकों को देते थे, वही आज भी पूरी ईमानदारी से कायम है। यही वजह है कि आसपास के ग्रामीण इलाकों के अलावा दूर-दूर से लोग खास तौर पर उनके ठेले पर समोसा, ब्रेड पकौड़ा, पकौड़ी और लौंगलता का स्वाद चखने पहुंचते हैं। एक बार जो यहां का स्वाद ले लेता है, वह बार-बार रेरिया बाजार खिंचा चला आता है।



















