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गोरखपुर के धर्मशाला बाजार में सजती है जायके की महफिल, जानिए यहां के समोसे और लौंग लता की दीवानगी का राजखानपान
29 जुल॰ 2026, 3:59 am (9 दिन पहले)· 0

गोरखपुर के धर्मशाला बाजार में सजती है जायके की महफिल, जानिए यहां के समोसे और लौंग लता की दीवानगी का राज

गोरखपुर का धर्मशाला बाजार अपने खस्ता समोसों, चटपटी इमली-गुड़ की चटनी, मसालेदार कचौड़ी और रसीली लौंग लता के लिए मशहूर है। शाम 5 बजे के बाद यहां खाने-पीने के शौकीनों की भारी भीड़ जुटती है।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में खानपान के शौकीनों के लिए यूं तो कई ठिकाने हैं, लेकिन धर्मशाला बाजार की गलियों से उठती लजीज खुशबू हर किसी को अपनी ओर खींच लेती है। यहां मिलने वाले स्ट्रीट फूड का स्वाद ऐसा है कि एक बार चखने के बाद लोग बार-बार खिंचे चले आते हैं। सुबह से लेकर देर रात तक गुलजार रहने वाले इस इलाके में गरमागरम समोसे, खस्ता कचौड़ी, खट्टी-मीठी इमली की चटनी और पारंपरिक मिठास से भरपूर लौंग लता की बिक्री सबसे ज्यादा होती है। स्थानीय निवासियों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले सैलानी भी धर्मशाला के इन व्यंजनों का जायका लेना कभी नहीं भूलते।

धीमी आंच पर सिकते खस्ता समोसे और अनोखा स्वाद

धर्मशाला के समोसों की सबसे बड़ी खूबी उनकी अनोखी बनावट और पकाने का पारंपरिक तरीका है। यहां समोसों को तेज आंच के बजाय हल्की और धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकाया जाता है। इस प्रक्रिया में थोड़ा अधिक समय लगता है, लेकिन समोसे की बाहरी परत सुनहरी होने के साथ बेहद खस्ता और कुरकुरी हो जाती है। जब आप समोसे का पहला निवाला लेते हैं, तो उसका करारापन मुंह में अलग ही स्वाद घोल देता है। बाहर से एकदम खस्ता और अंदर से बेहद मुलायम यह समोसा खाने वालों का दिल जीत लेता है।

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केवल समोसे का ऊपरी आवरण ही नहीं, बल्कि इसके अंदर भरी जाने वाली सामग्री यानी स्टफिंग भी इसे आम समोसों से बिल्कुल अलग बनाती है। इसमें उबले हुए आलू के चोखे के साथ देसी मसालों का एक बेहद संतुलित मिश्रण तैयार किया जाता है। कारीगर इसमें कुछ खास सामग्रियां और पारंपरिक मसाले मिलाते हैं, जिससे हर निवाले में चटपटा और जायकेदार अनुभव मिलता है। मसालों का यह बेहतरीन मेल ही इस समोसे को गोरखपुर का सबसे लोकप्रिय समोसा बनाता है।

इमली और गुड़ की खास चटनी जो बढ़ाती है जायका

धर्मशाला के स्ट्रीट फूड की सफलता का एक बहुत बड़ा श्रेय यहां मिलने वाली विशेष चटनी को जाता है। समोसे और कचौड़ी के स्वाद को दोगुना करने के लिए यहां गुड़ और इमली से बनी चटपटी चटनी परोसी जाती है। इस चटनी में खट्टे और मीठे का ऐसा बेजोड़ संतुलन होता है कि लोग उंगलियां चाटने पर मजबूर हो जाते हैं। शुद्ध इमली और प्राकृतिक गुड़ के साथ तैयार की गई यह चटनी खाने के जायके को कई गुना बढ़ा देती है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि पूरे गोरखपुर शहर में धर्मशाला जैसी चटनी का स्वाद कहीं और मिलना बेहद मुश्किल है। चटनी तैयार करने का यह तरीका बरसों पुराना है और इसे बनाने का राज केवल यहीं के कारीगर जानते हैं। यही वजह है कि जब भी कोई ग्राहक समोसा या कचौड़ी खरीदता है, तो इस खास इमली-गुड़ की चटनी को अतिरिक्त रूप से मांगकर जरूर खाता है।

मसालेदार कचौड़ी और पारंपरिक मिठास लौंग लता

समोसे के बाद धर्मशाला में जिस व्यंजन की सबसे ज्यादा मांग रहती है, वह है यहां की गरमागरम कचौड़ी। मैदा और विशेष मसालों के संयोजन से तैयार की जाने वाली यह कचौड़ी बेहद खस्ता होती है। इसके अंदर भरे जाने वाले मसालेदार मिश्रण का स्वाद इतना लाजवाब होता है कि लोग पेट भरने के बाद भी इसे खाते रहना चाहते हैं। जब यह कचौड़ी खट्टी-मीठी चटनी के साथ प्लेट में सजाकर दी जाती है, तो इसका स्वाद हर किसी को दोबारा आने पर मजबूर कर देता है।

नमकीन व्यंजनों के स्वाद के बाद अगर कुछ मीठा खाने का मन हो, तो धर्मशाला की लौंग लता से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। पारंपरिक हलवाई शैली में तैयार की जाने वाली यह मिठाई अपनी अनूठी बनावट के लिए जानी जाती है। बाहर से हल्की कुरकुरी और अंदर से चाशनी में डूबी रसीली लौंग लता का हर टुकड़ा मिठास से सराबोर होता है। इसमें लगी लौंग की भीनी-भीनी खुशबू और इलायची का स्वाद इसे और भी खास बना देता है। मिठास के शौकीन लोग विशेष रूप से लौंग लता की खरीदारी करने धर्मशाला पहुंचते हैं।

शाम 5 बजे के बाद उमड़ती है चटटो की भारी भीड़

धर्मशाला का असली रंग ढलती शाम के साथ देखने को मिलता है। दोपहर के बाद जैसे ही घड़ी में शाम के 5 बजते हैं, वैसे ही दुकानों के सामने ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ने लगती है। देखते ही देखते दुकानों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लग जाती हैं। कॉलेज के युवा, दफ्तर से लौटने वाले कर्मचारी, परिवार और शहर में आए पर्यटक यहां गरमागरम नाश्ते का आनंद लेने के लिए इकट्ठा होते हैं।

धर्मशाला की एक और सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां हर व्यंजन ग्राहकों की नजरों के सामने ही ताजा बनाया जाता है। धीमी आंच पर कड़ाही में तलते समोसे और कचौड़ियां सीधे प्लेट में परोसी जाती हैं। ताजे व्यंजनों की गर्माहट, इमली की चटनी का चटपटापन और शाम का सुहाना माहौल मिलकर इसे गोरखपुर की सबसे पसंदीदा फूड स्ट्रीट बना देता है। यदि आपको भी कभी गोरखपुर जाने का अवसर मिले, तो धर्मशाला के इस लाजवाब स्वाद का अनुभव करना बिल्कुल न भूलें।

सवाल-जवाब

गोरखपुर का धर्मशाला बाजार किसलिए प्रसिद्ध है?
यह बाजार अपने धीमी आंच पर सिकने वाले खस्ता समोसों, खट्टी-मीठी इमली-गुड़ की चटनी, मसालेदार कचौड़ी और पारंपरिक लौंग लता के लिए मशहूर है।
धर्मशाला के समोसे की मुख्य खासियत क्या है?
इन समोसों को धीमी आंच पर सुनहरा होने तक तला जाता है जिससे बाहरी परत बेहद कुरकुरी बनती है, और इसके अंदर खास मसालों तथा आलू का संतुलित मिश्रण भरा जाता है।
यहां परोसी जाने वाली चटनी कैसे तैयार की जाती है?
यह चटनी प्राकृतिक इमली और गुड़ के संयोजन से तैयार की जाती है, जो मीठे और खट्टे स्वाद का एक अनोखा और संतुलित अनुभव देती है।
धर्मशाला बाजार में शाम के समय क्या माहौल रहता है?
शाम 5 बजे के बाद दुकानों के बाहर गरमागरम और ताजे बने व्यंजनों का स्वाद लेने के लिए स्थानीय निवासियों, युवाओं और पर्यटकों की लंबी कतारें लग जाती हैं।
मीठा पसंद करने वालों के लिए धर्मशाला में कौन सा व्यंजन खास है?
मीठे के शौकीनों के लिए यहां की पारंपरिक लौंग लता सबसे लोकप्रिय है, जो बाहर से हल्की कुरकुरी और अंदर से चाशनीदार रसीली होती है।
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