अक्सर लोग खिचड़ी का नाम सुनते ही इसे बीमारी का हल्का और बेस्वाद खाना मान लेते हैं, मगर जब बात बिहार की पारंपरिक खिचड़ी की आती है तो यह धारणा पूरी तरह बदल जाती है। बिहार के खानपान में खिचड़ी केवल चावल और दाल को उबालकर बनाई जाने वाली सादी खुराक नहीं है, बल्कि यह मसालों, मौसमी सब्जियों और शुद्ध देसी घी के मेल से तैयार होने वाला एक बेहद समृद्ध और लजीज व्यंजन है। कई घरों में शनिवार के दिन दोपहर या रात के भोजन में खिचड़ी पकाने की पुरानी परंपरा रही है। इस पौष्टिक खिचड़ी के साथ जब आलू और बैंगन का चोखा, पापड़, तीखा अचार, ताजी दही और ऊपर से पिघला हुआ देसी घी परोसा जाता है, तो यह साधारण भोजन एक शाही और तृप्त करने वाली थाली में बदल जाता है। खासकर ठंड के मौसम में ताजी फूलगोभी, मीठी हरी मटर और आलू मिलाकर तैयार की गई गर्मागर्म खिचड़ी का स्वाद लाजवाब होता है।
एक बेहतरीन और स्वादिष्ट बिहारी खिचड़ी की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि इसमें चावल और दाल पूरी तरह गलकर एकसार हो जाएं, लेकिन उसका स्वाद कतई फीका न लगे। इसमें हर मसाले का संतुलित स्वाद और सब्जियों का कुरकुरापन महसूस होना चाहिए। अगर आप भी अपनी रसोई में बिहार के इसी असली और पारंपरिक अंदाज वाली खिचड़ी का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो बहुत ही बुनियादी रसोई सामग्री और सही विधि का पालन करके इसे बेहद आसानी से पका सकते हैं।
चावल और दाल का सही चुनाव और तैयारी
पारंपरिक बिहारी खिचड़ी पकाने के लिए मुख्य रूप से चावल के साथ मूंग दाल का उपयोग किया जाता है। घरों में लोग अपनी पसंद और स्वाद के अनुसार बिना छिलके वाली पीली धुली मूंग दाल या फिर हरी छिलके वाली मूंग दाल चुनते हैं। दोनों ही दालें खिचड़ी को बेहतरीन बनावट देती हैं। खिचड़ी में चावल और दाल के अनुपात को भी अपनी पसंद के हिसाब से तय किया जा सकता है। आमतौर पर एक कप चावल के साथ आधा कप से लेकर एक कप तक मूंग दाल बिल्कुल मुफीद मानी जाती है। यदि किसी को दाल का स्वाद ज्यादा गाढ़ा और प्रमुख पसंद हो, तो वह दाल की मात्रा बढ़ाकर बराबर भी रख सकता है।
खिचड़ी बनाने की प्रक्रिया शुरू करने से पहले चावल और दाल को साफ पानी से दो से तीन बार अच्छी तरह धो लेना बेहद जरूरी है। इसके बाद इन्हें लगभग 15 से 20 मिनट के लिए सामान्य पानी में भिगोकर छोड़ दें। ऐसा करने से पकाने के दौरान अनाज जल्दी और समान रूप से गलता है। कुछ रसोइये मूंग दाल को भिगोने या पकाने से पहले सूखे तवे अथवा कड़ाही में हल्का सूखा भून लेते हैं। दाल को हल्का भून लेने से उसकी नमी कम होती है और खिचड़ी में एक सोंधी महक व अनोखा स्वाद जुड़ जाता है।
आवश्यक सामग्री और सब्जियों का चुनाव
इस स्वादिष्ट व्यंजन को तैयार करने के लिए एक कप चावल और आधा से एक कप मूंग दाल की आवश्यकता होती है। सब्जियों के तौर पर एक मध्यम आकार का आलू, आधा कप कटी हुई फूलगोभी, आधा कप ताजी हरी मटर और एक पका हुआ टमाटर काटा जा सकता है। ऋतु और व्यक्तिगत पसंद के अनुसार सब्जियों का परिमाण कम या अधिक किया जा सकता है। तड़के और छौंक के मसालों के लिए आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, स्वादानुसार नमक, आधा छोटा चम्मच साबुत जीरा, एक तेजपत्ता, एक से दो साबुत सूखी लाल मिर्च और थोड़ी सी हींग की जरूरत होती है। इसके अतिरिक्त एक छोटा टुकड़ा बारीक कटा अदरक, एक से दो कटी हुई हरी मिर्च और पकाने के लिए जरूरत के अनुसार शुद्ध देसी घी रखें। सुगंध और जायके को और अधिक गहरा करने के लिए थोड़ी सी कुटी हुई काली मिर्च और गरम मसाला भी इसमें शामिल किया जा सकता है।
सब्जियों और खड़े मसालों को भूनने का तरीका
खिचड़ी तैयार करने के लिए सबसे पहले एक प्रेशर कुकर में एक से दो चम्मच देसी घी डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। जब घी अच्छी तरह पिघलकर गर्म हो जाए, तब इसमें साबुत जीरा, तेजपत्ता, सूखी लाल मिर्च और चुटकी भर हींग डालें। जैसे ही जीरा चटकने लगे और अपनी खुशबू छोड़ने लगे, तुरंत बारीक कटा अदरक और हरी मिर्च डालकर कुछ सेकंड तक हल्का चलाएं। इसके बाद कुकर में मध्यम टुकड़ों में कटे हुए आलू और फूलगोभी डालें। इन सब्जियों को घी और खड़े मसालों के साथ लगभग दो से तीन मिनट तक हल्का सुनहरा होने तक भूनें।
सब्जियों के हल्का भुन जाने के बाद इसमें हरी मटर और कटे हुए टमाटर डालकर अच्छी तरह मिलाएं। अब इसमें आधा छोटा चम्मच हल्दी पाउडर और स्वादानुसार थोड़ा नमक मिला दें। इस चरण पर सब्जियों को बहुत ज्यादा गलाने या पकाने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि बाद में ये चावल और दाल के साथ सीटी लगने पर पूरी तरह पक जाती हैं। सब्जियों को हल्का भूनने से उनका कच्चापन दूर हो जाता है और घी का स्वाद अंदर तक समा जाता है।
चावल-दाल मिलाना और पानी का सही अनुपात
सब्जियों के भुनने के बाद पानी में भिगोकर रखे गए चावल और मूंग दाल का अतिरिक्त पानी पूरी तरह निथार लें और उन्हें कुकर में डाल दें। अब धीमी आंच पर चावल, दाल और सब्जियों को आपस में एक से दो मिनट तक हल्के हाथों से मिलाएं। ऐसा करने से मसालों और घी की एक बारीक परत चावल और दाल के प्रत्येक दाने पर अच्छी तरह चढ़ जाती है, जिससे खिचड़ी में बेहतरीन स्वाद आता है।
इसके बाद कुकर में पानी मिलाने की बारी आती है। पानी की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि आपको खिचड़ी की गाढ़ापन कैसा पसंद है। यदि आपको थोड़ी गाढ़ी और बंधी हुई खिचड़ी भाती है, तो पानी कम रखें। वहीं यदि आपको ढीली, मुलायम और थोड़ी पतली खिचड़ी पसंद है, तो पानी की मात्रा बढ़ाएं। सामान्य नियम के अनुसार, एक कप चावल और आधा से एक कप दाल के मेल के लिए लगभग चार से पांच कप सामान्य पानी डालकर शुरुआत करना सबसे अच्छा रहता है। चावल और दाल की प्रकृति के अनुसार पानी की खपत घट या बढ़ सकती है। अब कुकर का ढक्कन अच्छी तरह बंद करें और मध्यम आंच पर लगभग दो से तीन सीटी आने तक इसे पकने दें। सीटी आने के बाद गैस का चूल्हा बंद कर दें और कुकर का सारा प्रेशर अपने आप प्राकृतिक रूप से निकलने दें। जब भाप पूरी निकल जाए, तब ढक्कन खोलें। यदि खिचड़ी ज्यादा गाढ़ी प्रतीत हो, तो उसमें अलग से थोड़ा उबलता हुआ गर्म पानी मिलाकर धीमी आंच पर एक उबाल दिया जा सकता है।
देसी घी और हींग का खास तड़का
बिहारी खिचड़ी को उसका असली देसी और लाजवाब स्वाद देने के लिए अंत में एक विशेष घी का तड़का लगाया जाता है। इसके लिए एक छोटे तड़का पैन में एक बड़ा चम्मच देसी घी गर्म करें। घी के पिघलते ही उसमें थोड़ा साबुत जीरा, एक साबुत सूखी लाल मिर्च और चुटकी भर हींग डालें। यदि पसंद हो, तो इस तड़के में थोड़ा सा बारीक कटा हुआ ताजा अदरक भी डाला जा सकता है। जैसे ही मसाले सुनहरे होकर महकने लगें, इस गरमा-गरम तड़के को सीधे कुकर में पकी हुई खिचड़ी के ऊपर डाल दें।
तड़का डालते ही कुकर को कुछ पलों के लिए ढक दें ताकि तड़के की सोंधी खुशबू खिचड़ी के भीतर ही समा जाए। इसके बाद करछी से खिचड़ी को हल्के हाथ से एकसार मिला लें। यदि परोसते समय आपको और अधिक तरलता व सुगंध पसंद हो, तो थाली में ऊपर से एक चम्मच अतिरिक्त देसी घी डाला जा सकता है। शुद्ध देसी घी की यह महक पकी हुई खिचड़ी के आकर्षण को दोगुना कर देती है।
चोखा, पापड़ और पारंपरिक संगतों के साथ परोसना
बिहारी खिचड़ी का असली आनंद केवल उसके अकेले स्वाद में नहीं, बल्कि उसके साथ थाली में परोसी जाने वाली पारंपरिक चीजों में छुपा है। बिहार में कहावत भी मशहूर है कि खिचड़ी के चार यार होते हैं। इसे पारंपरिक रूप से आलू का चोखा, भुने बैंगन का चोखा, तीखी टमाटर की चटनी, आम या मिर्च का अचार, ताजा दही और भुने या तले हुए पापड़ के साथ परोसा जाता है।
आलू चोखा तैयार करने के लिए उबले हुए आलुओं को अच्छी तरह मैश कर लें। फिर इसमें बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च, बारीक कटी हरी धनिया पत्ती, स्वादानुसार नमक और कच्चा सरसों का तेल मिलाकर हाथ से अच्छी तरह गूंथ लें। सरसों के तेल का तीखापन चोखे को असली देसी स्वाद प्रदान करता है। खिचड़ी को हमेशा एकदम गरमा-गरम परोसें और थाली में निकालते ही ऊपर से एक चम्मच घी अवश्य डालें। कड़ाके की ठंड में मटर और गोभी से लदी गर्म खिचड़ी, सरसों तेल की महक वाला आलू चोखा और तीखा अचार मिलकर साधारण भोजन को भी यादगार बना देते हैं।
खिचड़ी पकाते समय ध्यान रखने योग्य सावधानियां
खिचड़ी बनाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है ताकि उसका स्वाद और बनावट दोनों बिल्कुल सटीक रहें। सबसे महत्वपूर्ण घटक पानी की मात्रा है। शुरुआत में बहुत कम पानी डालने से चावल और दाल कच्चे रह सकते हैं या कुकर की तली में लग सकते हैं, जबकि अत्यधिक पानी से खिचड़ी जरूरत से ज्यादा पतली हो सकती है। मूंग दाल को पकाने से पहले हल्का सूखा भूनने से उसकी कच्ची गंध दूर होती है और बेहतरीन खुशबू आती है। सब्जियों को बहुत बारीक टुकड़ों में नहीं काटना चाहिए, अन्यथा प्रेशर कुकर में पकने के दौरान वे पूरी तरह गलकर मैश हो जाएंगी और उनका अस्तित्व नजर नहीं आएगा। खिचड़ी बनकर तैयार होने के बाद उसे लंबे समय तक खुला न छोड़ें, क्योंकि चावल और दाल पानी सोखते रहते हैं जिससे ठंडी होने पर खिचड़ी बहुत गाढ़ी हो जाती है। यदि इसे दोबारा गर्म करना पड़े, तो हमेशा थोड़ा गर्म पानी मिलाकर ही गर्म करें।



















