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जहानाबाद के घोसी प्रखंड में महिलाएं बना रहीं बाजार से भी बेहतर कुरकुरा पापड़, तारावती देवी ने बताया घर पर बनाने का तरीकाखानपान
5 जुल॰ 2026, 5:48 am (25 दिन पहले)· 2

जहानाबाद के घोसी प्रखंड में महिलाएं बना रहीं बाजार से भी बेहतर कुरकुरा पापड़, तारावती देवी ने बताया घर पर बनाने का तरीका

जहानाबाद के घोसी प्रखंड की सर्वसिद्धांता FPO से जुड़ीं तारावती देवी ने बताया कि सही मसाले और सही तरीके से आटा गूंथकर घर पर भी बाजार जैसा खिला-खिला पापड़ कैसे बनाया जा सकता है.

भारतीय थाली में दाल-चावल और सब्जी के साथ पापड़ की मौजूदगी लगभग तय मानी जाती है। घर हो या होटल, सलाद और सब्जी के साथ कुरकुरा पापड़ थाली में सजना आम बात है। कई घरों में पापड़ के अलावा आलू के चिप्स और तरह-तरह के पकौड़े भी खाने के साथ परोसे जाते हैं। ज्यादातर परिवार यह सामान बाजार से खरीद लाते हैं, लेकिन कुछ घरों में आज भी यह सब हाथ से तैयार होता है। जहानाबाद जिले के घोसी प्रखंड में स्थित सर्वसिद्धांता FPO में काम करने वाली तारावती देवी ऐसी ही एक महिला हैं, जो सालों से घर पर पापड़ बनाकर बाजार तक पहुंचा रही हैं और उन्होंने इसकी पूरी विधि साझा की है.

मूंग और उड़द दाल से ऐसे तैयार होता है पापड़

तारावती देवी बताती हैं कि पापड़ बनाना सुनने में जितना मुश्किल लगता है, सही तरीका पता होने पर यह उतना ही आसान हो जाता है। वे लंबे समय से मूंग दाल और उड़द दाल का पापड़ बना रही हैं, जिसकी मांग बाजार में भी बनी रहती है। विधि की शुरुआत उड़द दाल और मूंग दाल को पानी में भिगोकर कुछ देर के लिए छोड़ देने से होती है। इसके बाद इसे आटे के साथ अच्छी तरह गूंथा जाता है और गुंथे हुए आटे को थोड़ी देर फूलने के लिए रखा जाता है। इसके बाद सबसे जरूरी चरण आता है, मूसल से आटे को खूब कूटना, ताकि वह पूरी तरह लचीला हो जाए। आटा लचीला होने के बाद उसकी छोटी-छोटी गोलियां बनाई जाती हैं और बेलन की मदद से हर गोली को चिकने फर्श पर बेला जाता है। बेले हुए हर पापड़ को एक-एक करके पंखे की हवा में रखा जाता है और कुछ देर हवा लगने के बाद पापड़ पूरी तरह तैयार हो जाता है.

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खिला-खिला पापड़ बनाने का असली राज

तारावती देवी के मुताबिक पापड़ के खिले-खिले होने का पूरा राज आटा गूंथते वक्त डाले जाने वाले मसालों में छिपा है। वे आटा गूंथते समय उसमें हींग, जीरा और कुछ अन्य मसाले मिलाती हैं, जिससे आटा हल्का हो जाता है। आटा जितना हल्का रहता है, पापड़ उतना ही खिला-खिला और कुरकुरा बनकर तैयार होता है। यही छोटी सी देसी तरकीब है, जो घर के बने पापड़ को भी बाजार के पापड़ जैसा स्वाद और बनावट देती है.

पापड़ के साथ कई और उत्पाद भी बना रहीं महिलाएं

घोसी स्थित सर्वसिद्धांता FPO में सिर्फ तारावती देवी ही नहीं, बल्कि कई और महिलाएं भी काम कर रही हैं। यहां पापड़ के अलावा दालमोट और मशरूम का अचार भी तैयार किया जाता है। इसके साथ ही जाता चना सत्तू बनाने का काम भी यहीं होता है। कई महिलाएं इस केंद्र में एक साथ मिलकर काम करती हैं, जिसका फायदा सिर्फ उन्हें ही नहीं बल्कि उनके पूरे परिवार को मिल रहा है। इस FPO केंद्र से जुड़ी कई महिलाओं के लिए यह जगह आजीविका का एक बड़ा जरिया बन चुकी है.

सवाल-जवाब

पापड़ किस दाल से बनाया जाता है?
तारावती देवी मूंग दाल और उड़द दाल से पापड़ बनाती हैं.
पापड़ खिला-खिला बनाने का राज क्या है?
आटा गूंथते समय हींग, जीरा और कुछ अन्य मसाले डालने से आटा हल्का हो जाता है, जिससे पापड़ खिला-खिला बनता है.
पापड़ बनाने में आटे को कूटना क्यों जरूरी है?
मूसल से आटे को खूब कूटने से वह लचीला हो जाता है, जिससे उसे बेलना और आकार देना आसान हो जाता है.
पापड़ को सुखाने के लिए क्या किया जाता है?
बेले हुए पापड़ को पंखे की हवा में रखा जाता है, जिससे कुछ देर में यह पूरी तरह तैयार हो जाता है.
तारावती देवी कहां काम करती हैं?
वे जहानाबाद जिले के घोसी प्रखंड स्थित सर्वसिद्धांता FPO में काम करती हैं.
इस FPO में पापड़ के अलावा और क्या बनाया जाता है?
यहां पापड़ के साथ दालमोट, मशरूम का अचार और जाता चना सत्तू भी तैयार किया जाता है.
क्या यह पापड़ बाजार में भी बिकता है?
हां, तारावती देवी का बनाया पापड़ बाजार तक पहुंच रहा है.
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