त्योहारी सीजन में पारंपरिक मिठाइयों की मांग हमेशा बढ़ जाती है। बाजार की मिठाइयों में मिलावट के डर से कई लोग घर पर ही शुद्ध और स्वादिष्ट पकवान बनाना पसंद करते हैं। ऐसे मौकों के लिए पेड़ा एक बेहद लोकप्रिय और झटपट तैयार होने वाला विकल्प है। यूं तो पेड़ा देश के कई हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के लाल पेड़े की अपनी एक अलग पहचान है। इस खास पेड़े की लोकप्रियता केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के प्रदेशों में भी लोग इसके स्वाद के दीवाने हैं। इसकी सबसे बड़ी खूबी इसका हल्का लाल रंग, दानेदार बनावट और धीमी आंच पर भुने मावे से आने वाली सौंधी खुशबू है।
सुल्तानपुर के लाल पेड़े की खासियत और स्वाद का राज
सामान्य सफेद या हल्के पीले पेड़े की तुलना में सुल्तानपुर के लाल पेड़े को बनाने का तरीका काफी अलग होता है। इसे तैयार करने में मावे की भुनाई पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है। कड़ाही में खोए को धीमी आंच पर लगातार चलाते हुए तब तक पकाया जाता है जब तक कि वह अपना असली गहरा रंग न ले ले। इसके बाद जब इसमें चीनी मिलाई जाती है, तो चीनी की प्राकृतिक मिठास खोए की गरमाहट के साथ मिलकर कैरेमलाइज होने लगती है। यही कैरेमल प्रक्रिया पेड़े को उसका पारंपरिक लाल-भूरा रंग और मुंह में घुल जाने वाला अनोखा सौंधापन प्रदान करती है।
पेड़ा बनाने के लिए जरूरी सामग्री
घर पर शुद्ध और बाजार जैसा लाल पेड़ा तैयार करने के लिए बहुत अधिक सामग्रियों की आवश्यकता नहीं होती है। रसोई में मौजूद बेहद बुनियादी चीजों से इसे बनाया जा सकता है
- 500 ग्राम ताजा मावा अथवा खोया
- 200 ग्राम बारीक पिसी हुई चीनी या बूरा
- 1 छोटी चम्मच खुशबूदार इलायची पाउडर
- 2 से 3 बड़े चम्मच शुद्ध देसी घी
कदम-दर-कदम बनाने की आसान विधि
लाल पेड़ा बनाने की शुरुआत एक भारी तले वाली कड़ाही से करें ताकि खोया नीचे चिपके नहीं। सबसे पहले कड़ाही में थोड़ा देसी घी डालकर गर्म करें। इसके बाद इसमें 500 ग्राम मावा डालें और आंच को एकदम धीमा कर दें। मावे को करछुल से लगातार चलाते हुए भूनना जरूरी है ताकि वह तले में जले नहीं और चारों तरफ से एकसमान पके। जैसे-जैसे भुनाई आगे बढ़ेगी, खोए का रंग बदलना शुरू हो जाएगा। इसे तब तक भूनते रहें जब तक कि इसका रंग गहरा भूरा न हो जाए और रसोई में एक भीनी-भीनी सौंधी सुगंध न फैलने लगे।
जब खोया पूरी तरह भुन जाए, तो गैस की आंच को धीमा रखते हुए इसमें 200 ग्राम पिसी हुई चीनी या बूरा मिला दें। गर्म मावे के संपर्क में आते ही चीनी पिघलने लगेगी और खोए के साथ घुल-मिल जाएगी। इसी दौरान चीनी का कैरेमल फ्लेवर उभरेगा और पूरा मिश्रण गहरा लाल रंग पकड़ने लगेगा। मिश्रण को तब तक चलाते रहें जब तक कि चीनी और खोया पूरी तरह एकसार न हो जाएं और मिश्रण कड़ाही के किनारों को छोड़ना शुरू न कर दे। जब मिश्रण कड़ाही छोड़ने लगे और एक जगह सिमटने लगे, तो गैस बंद कर दें और ऊपर से एक छोटी चम्मच इलायची पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें।
पेड़े को आकार देना और भंडारण
गैस बंद करने के बाद तैयार मिश्रण को थोड़ी देर के लिए छोड़ दें ताकि वह छूने लायक सामान्य तापमान पर आ जाए। जब मिश्रण हल्का गुनगुना रह जाए, तो हथेलियों पर हल्का सा देसी घी लगाएं। अब मिश्रण से थोड़ा-थोड़ा हिस्सा लेकर पहले गोल लोई बनाएं और फिर उसे दोनों हथेलियों के बीच हल्का सा दबाकर चपटा आकार दें। इसी तरह पूरे मिश्रण से एक-एक करके सारे पेड़े तैयार कर लें।
मावे की बहुत अच्छी भुनाई होने की वजह से इन पेड़ों की शेल्फ लाइफ काफी बेहतर होती है। यह पेड़ा सामान्य तापमान पर भी 8 से 10 दिनों तक बिल्कुल खराब नहीं होता है। दिवाली, होली या किसी भी पारिवारिक आयोजन पर इन्हें बनाकर रखा जा सकता है, जिसका आनंद बच्चे और बुजुर्ग सभी समान रूप से ले सकते हैं।


















