बिहार के पूर्णिया जिले में इन दिनों एक अनोखा खान-पान का ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जो स्थानीय लोगों को सीधे दिल्ली के स्ट्रीट फूड का असली स्वाद दे रहा है। कचौड़ी खाने के शौकीन लोगों के लिए शहर में घूमती एक साधारण साइकिल अब सबसे पसंदीदा ठिकाना बन चुकी है। हर दिन छात्रों, कामकाजी लोगों और स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ इस घूमती हुई साइकिल के पास जमा होती है। शहर के अलग-अलग कोनों, विशेषकर महिला कॉलेज रोड पर लगने वाली इस अनोखी दुकान की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि लोग अपनी बारी के लिए लंबी कतारों में खड़े रहने से भी गुरेज नहीं करते हैं।
इस सफल और अनोखे उद्यम को शुरू करने वाले व्यक्ति का नाम पप्पू कुमार है। वह पिछले लगभग चार सालों से पूर्णिया के लोगों को दिल्ली की मशहूर कचौड़ी का बेहतरीन स्वाद चखा रहे हैं। पप्पू कुमार कचौड़ी और उसके साथ परोसी जाने वाली चटपटी छोले की सब्जी को पूरी तरह से अपने घर पर ही तैयार करते हैं। इसके बाद वह सारी सामग्री को अपनी साइकिल पर लोड करके शहर के दौरे पर निकल पड़ते हैं। वह हर दिन योजनाबद्ध तरीके से शहर के प्रमुख और व्यस्त चौराहों से होकर गुजरते हैं। उनके दैनिक पड़ावों में गिरजा चौक, स्थानीय बस स्टैंड, कचहरी, रिंस चौक, जेल चौक, नगर निगम पार्क और महिला कॉलेज रोड शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर उन्हें ग्राहकों की तरफ से बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिलती है।
महामारी की चुनौती से सफलता के सफर तक
पूर्णिया की गलियों में साइकिल पर दुकान लगाने से पहले पप्पू कुमार देश की राजधानी दिल्ली में कचौड़ी की दुकान चलाते थे। वहां काम करते हुए उन्होंने दिल्ली शैली की कचौड़ी और मसालेदार छोले बनाने की कला में महारत हासिल की थी। हालांकि, कोरोना महामारी के दौरान आए संकट ने उनके चलते-फिरते काम को बंद करने पर मजबूर कर दिया। इसके बाद उन्हें दिल्ली छोड़कर अपने गृह राज्य बिहार के पूर्णिया लौटना पड़ा। अपने घर लौटने के बाद शुरुआती कुछ समय तक वह बेरोजगार रहे और उनके पास कमाई का कोई जरिया नहीं था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने पुराने हुनर को ही रोजगार का जरिया बनाने का फैसला किया। आर्थिक तंगी के कारण वह कोई पक्की दुकान किराए पर नहीं ले सकते थे, इसलिए उन्होंने साइकिल को ही अपना चलता-फिरता आउटलेट बना लिया। इस छोटे से प्रयोग ने न केवल उनकी जिंदगी बदल दी, बल्कि पूर्णिया के लोगों को एक नया स्वाद भी दिया।
12 खास मसालों का अनोखा स्वाद
पप्पू कुमार की कचौड़ी को जो चीज सबसे अलग और स्वादिष्ट बनाती है, वह है छोले में इस्तेमाल होने वाले 12 विशेष प्रकार के मसाले। हर प्लेट में खस्ता और करारी कचौड़ी के साथ गाढ़े और मसालेदार छोले परोसे जाते हैं। इस स्वाद को और बेहतर बनाने के लिए वह इसमें इमली का पानी, मीठी सॉस, ताजा दही और कुछ अन्य गुप्त मसालों का मिश्रण मिलाते हैं। यह खट्टा, मीठा और तीखा स्वाद ग्राहकों को दिल्ली के मशहूर स्ट्रीट फूड की याद दिलाता है। सबसे खास बात यह है कि इस लाजवाब स्वाद के लिए ग्राहकों को केवल 20 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इतनी कम कीमत और बेहतरीन स्वाद के कारण उनकी कचौड़ी की मांग बहुत अधिक है। पप्पू कुमार हर दिन आसानी से 300 से अधिक प्लेट कचौड़ी बेच लेते हैं, जिससे उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए एक अच्छी आमदनी मिल जाती है।
स्थानीय लोगों और छात्रों के बीच बढ़ती लोकप्रियता
इस अनोखी साइकिल वाली दुकान ने बहुत कम समय में पूर्णिया में अपने वफादार ग्राहकों का एक बड़ा नेटवर्क बना लिया है। नियमित रूप से कचौड़ी खाने आने वाले ग्राहकों जैसे चंदन ठाकुर, सुमित कुमार, प्रताप कुमार और मोसोबीर का कहना है कि उन्हें इस कचौड़ी का स्वाद बेहद पसंद आता है। उनका मानना है कि मसालों का अनोखा संतुलन और साफ-सफाई इस दुकान को दूसरों से अलग बनाती है। विशेष रूप से महिला कॉलेज रोड पर कॉलेज जाने वाले छात्रों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ पप्पू कुमार की कचौड़ी का लुत्फ उठाने के लिए जुटती है। यह छोटी सी साइकिल दुकान इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे लगन, हुनर और इच्छाशक्ति के दम पर एक साधारण शुरुआत को भी बेहद लोकप्रिय ब्रांड बनाया जा सकता है।


















