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मऊ के इस अनोखे खुरमे का दीवाना हुआ हर कोई, जानें क्या है इसकी रेसिपी और खास बनाने का तरीकाखानपान
9 जुल॰ 2026, 7:40 am (113 दिन पहले)· 2

मऊ के इस अनोखे खुरमे का दीवाना हुआ हर कोई, जानें क्या है इसकी रेसिपी और खास बनाने का तरीका

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के चकिया में तैयार होने वाला खुरमा अपनी खास नरमी और लंबे समय तक सुरक्षित रहने की खूबी के चलते लोगों की पहली पसंद बन गया है।

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रानीपुर चकिया गोपालपुर इलाके में बनने वाला खुरमा इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। मऊ मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह दुकान मिठाई प्रेमियों के लिए एक खास केंद्र बन गई है। मैदा और शक्कर के मिश्रण से तैयार होने वाला यह खुरमा न केवल खाने में लाजवाब है, बल्कि इसकी खासियत यह है कि यह लंबे समय तक खराब नहीं होता है। स्वाद में यह खस्ता और नरम दोनों का एहसास कराता है, जिससे यह सभी आयु वर्ग के लोगों की पहली पसंद बन चुका है।

तीन दशकों से बरकरार है गुणवत्ता

राजेश स्वीट्स हाउस के संचालक राजेश का कहना है कि वे पिछले 30 वर्षों से इसी पारंपरिक विधि से खुरमा तैयार कर रहे हैं। उनके अनुसार, उनके खुरमे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कभी भी कड़ा नहीं होता, चाहे इसे कितने भी दिनों तक संभाल कर रखा जाए। इस मिठाई में मिठास और खस्तापन का जो संतुलन मिलता है, वही इसे अन्य दुकानों से अलग बनाता है।

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तैयारी की गुप्त प्रक्रिया

इस खास खुरमे को बनाने की प्रक्रिया काफी विस्तृत है। सबसे पहले मैदे को अच्छी तरह से गूंथा जाता है और फिर उसे फूलने के लिए कुछ समय तक छोड़ दिया जाता है। राजेश बताते हैं कि मैदा गूंथते समय इसमें खाने वाले सोडा और खोए का इस्तेमाल किया जाता है, जो खुरमे को लंबे समय तक नरम बनाए रखने में मदद करता है। मैदे के अच्छी तरह फूल जाने के बाद, उसे छोटे और आकर्षक टुकड़ों में काट लिया जाता है।

तलने और चाशनी में डुबोने का तरीका

कटे हुए टुकड़ों को गर्म तेल में तब तक तला जाता है जब तक कि वे पूरी तरह से लाल न हो जाएं। एक बार जब ये खुरमे अच्छी तरह से सुनहरे लाल रंग के हो जाते हैं, तो इन्हें तेल से निकालकर ठंडा होने के लिए रख दिया जाता है। इसके बाद, चीनी और इलायची का उपयोग करके एक विशेष चाशनी तैयार की जाती है। यह चाशनी जानबूझकर काफी पतली रखी जाती है, ताकि खुरमा इसे अपने अंदर सोख ले और सूखने के बाद भी इसका प्रभाव बरकरार रहे।

मऊ से विदेशों तक है लोकप्रियता

राजेश का दावा है कि उनके खुरमे की मांग केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि विदेशों तक फैली हुई है। जो लोग विदेश यात्रा पर जाते हैं, वे अक्सर इसे पैक करवा कर साथ ले जाते हैं। चूंकि यह मिठाई जल्दी खराब नहीं होती, इसलिए इसे लंबी दूरी की यात्राओं के लिए भी उत्तम माना जाता है।

कीमत और उपलब्धता का विवरण

इस स्वादिष्ट खुरमे की कीमत 200 रुपये प्रति किलो तय की गई है। राजेश स्वीट्स हाउस पर यह खुरमा मुख्य रूप से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक ही उपलब्ध रहता है। इसके पीछे का कारण यह है कि हर दिन केवल उतनी ही मात्रा तैयार की जाती है, जितनी शाम तक आसानी से बिक सके। हालांकि, अगर किसी को अधिक मात्रा में खुरमा चाहिए, तो उन्हें पहले से ऑर्डर देना पड़ता है।

सवाल-जवाब

मऊ के खुरमे की कीमत क्या है?
इस खुरमे की कीमत 200 रुपये प्रति किलो है।
यह खुरमा कितने समय तक खराब नहीं होता है?
इस खुरमे को बनाने की खास तकनीक की वजह से यह कई दिनों तक सुरक्षित रहता है।
दुकान किस समय तक खुली रहती है?
यह खुरमा सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक ही उपलब्ध रहता है।
क्या इसे विदेश भी ले जाया जा सकता है?
हां, लंबे समय तक खराब न होने के कारण लोग इसे पैक करवाकर विदेश ले जाते हैं।
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