मछली के टुकड़ों को तलकर खाना तो आम बात है, लेकिन किसी बड़ी साबुत मछली को बिना तोड़े इस तरह पकाना कि वह भीतर तक मसालेदार और बाहर से कुरकुरी बने, एक खास हुनर माना जाता है। उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद अंतर्गत मुहम्मदाबाद गोहना के अंसार नगर की गली में नसीम इसी खास हुनर के दम पर खाने के शौकीनों के बीच एक अलग पहचान बना चुके हैं। उनके यहां मिलने वाली मछली को जिस देसी तरकीब से तला जाता है, वह पूरे इलाके में अनोखी है। अपने इस अनुभव और अनोखे तरीके के कारण वह साबुत मछली को भी बेहद लजीज बना देते हैं, जिसका लुत्फ घर पर भी उनकी बताई विधि से उठाया जा सकता है।
विदेश के अनुभव से मऊ की गली तक का सफर
नसीम इस काम में काफी लंबे समय से सक्रिय हैं। इससे पहले वह सऊदी अरब में रहकर मछली तलने का काम करते थे। जब उन्होंने विदेश का काम छोड़ा और अपने वतन लौटे, तब उन्होंने मऊ आकर मुहम्मदाबाद गोहना के अंसार नगर इलाके की एक गली में अपनी दुकान शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने सऊदी अरब में सीखे गए तौर-तरीकों और अपने देसी मसालों के मेल से ऐसा स्वाद तैयार किया जो मऊ जनपद में अन्य जगहों पर देखने को नहीं मिलता। यही वजह है कि उनकी दुकान पर केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य जनपदों जैसे वाराणसी तक से लोग केवल इस मछली का स्वाद चखने खिंचे चले आते हैं।
ताजी मछली का चयन और खास सफाई का तरीका
नसीम के यहां मुख्य रूप से केवल दो किस्मों की मछलियां तली जाती हैं, जिनमें पापलेट और प्यासी शामिल हैं। उनकी विशेषता यह है कि वे पूरी तरह से ताजी मछलियों का ही उपयोग करते हैं। वे पास के तालाब से मछलियां मंगाते हैं और अपनी दुकान में ही उनका उचित रख-रखाव करते हैं। जब भी कोई ग्राहक आता है, तो एकदम ताजी मछली को निकालकर तैयार किया जाता है। पापलेट मछली को तैयार करने का तरीका बेहद सधा हुआ है। सबसे पहले मछली की बाहरी त्वचा और गंदगी को पूरी तरह साफ किया जाता है। इसके बाद उसके पेट को बीच से चीरा लगाकर अंदर की सारी अशुद्धियां और कचरा निकाल दिया जाता है, फिर उसे साफ पानी से अच्छी तरह धोया जाता है ताकि उसमें कोई गंध या मैल न रहे।
मसालों का मेल और मैरीनेशन की प्रक्रिया
धोने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मछली को मैरीनेट करने का अहम चरण शुरू होता है। नसीम मछली पर बाजार का मछली मसाला लगाने के साथ-साथ अपने हाथों से तैयार किए गए खास देसी मसालों का भी लेप चढ़ाते हैं। इस लेप में पिसा हुआ लहसुन, प्याज, हरी मिर्च और कई चुनिंदा मसालों का गाढ़ा मिश्रण तैयार किया जाता है। इस मसालेदार लेप को मछली के चीरे और सतह पर भीतर तक अच्छी तरह मला जाता है। इसके बाद मछली को लगभग 2 से 3 घंटे तक फ्रीजर में रख दिया जाता है। इस दौरान मछली मसालों के रस और तीखेपन को पूरी तरह अपने रेशों में सोख लेती है। जब मसाला मछली में भली-भांति रम जाता है, तब उसे फ्रीजर से बाहर निकालकर किसी बर्तन में रखा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर ग्राहक के सामने तुरंत तला जा सके।
मसाला चिपकने की देसी जुगत और तलने का नियम
मछली को तेल में डालते ही कई बार उसका मसाला छूटकर तेल में बिखर जाता है। इस समस्या से बचने के लिए नसीम एक देसी उपाय आजमाते हैं। जब मछली मसाले को पूरी तरह सोख लेती है, तो उस पर हल्का सा सूखा आटा चारों तरफ छिड़क कर लपेट दिया जाता है। आटे की यह हल्की परत एक ढाल की तरह काम करती है, जिससे मछली को गर्म तेल में डालने पर भी उसका मसाला बाहर नहीं निकलता और वह फटने से बच जाती है। इसके बाद गर्म कढ़ाई के खौलते तेल में मछली को डालकर लगभग 10 से 15 मिनट तक धीमी आंच पर तला जाता है। इस अवधि में मछली अंदर तक पक जाती है और उसकी बाहरी परत एकदम खस्ता और कुरकुरी हो जाती है।
पापलेट और प्यासी मछली की अलग-अलग बनावट
दुकान पर दोनों किस्मों को परोसने की शैली अलग है। पापलेट मछली को बिना किसी टुकड़े में बांटे, पूरी की पूरी साबुत और कड़ी शक्ल में ही तला जाता है, जो देखने और खाने दोनों में लाजवाब लगती है। दूसरी ओर, प्यासी मछली को साबुत रखने के बजाय छोटे-छोटे टुकड़ों के आकार में काटकर तला जाता है। नसीम की दुकान पर सिर्फ मछली तलने का ही काम होता है। कीमत की बात करें तो तली हुई पापलेट मछली 350 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से मिलती है, जबकि प्यासी मछली 300 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेची जाती है। ग्राहकों को वजन के हिसाब से ही मछली तौलकर गरमा-गरम तलकर दी जाती है।
दोपहर से रात तक का समय और ऑर्डर की व्यवस्था
नसीम की दुकान पर मछली तलने में सामान्य से अधिक वक्त लगता है क्योंकि हर मछली को कड़े मापदंड और धीमी आंच पर कुरकुरा किया जाता है। इस स्वाद की मांग इतनी अधिक है कि दोपहर 2 बजे से लेकर रात 8 बजे तक ही दुकान का संचालन होता है। भारी भीड़ और तलने में लगने वाले 10 से 15 मिनट के समय के चलते कई शौकीन पहले से ही अपना ऑर्डर बुक करा देते हैं, ताकि दुकान पर पहुंचकर उन्हें लंबा इंतजार न करना पड़े। मछली के शौकीन चाहें तो घर पर भी साबुत मछली लाकर इस सफाई, आटे की कोटिंग और मसालेदार पेस्ट की तकनीक से वही तीखा और कुरकुरा स्वाद हासिल कर सकते हैं।



















