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मऊ की खास इमरती का स्वाद, जिसके दीवाने हैं लोग; रसगुल्लों से भी ज्यादा है मांगखानपान
9 जुल॰ 2026, 8:13 am (21 दिन पहले)· 3

मऊ की खास इमरती का स्वाद, जिसके दीवाने हैं लोग; रसगुल्लों से भी ज्यादा है मांग

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के मुहम्मदाबाद गोहना में मिलने वाली इमरती अपनी बेहतरीन बनावट और स्वाद के लिए मशहूर है। शुद्ध धोई से बनी यह मिठाई लोगों की पहली पसंद बनी हुई है।

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की एक खास मिठाई ने अपनी अलग ही पहचान बना ली है। मऊ में बनने वाली इमरती की लोकप्रियता इतनी अधिक है कि लोग इसे रसगुल्ले या अन्य किसी भी मिठाई से कहीं ज्यादा पसंद करते हैं। इस इमरती की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह मुंह में रखते ही घुल जाती है, जो इसे दूसरी मिठाइयों से काफी अलग और खास बनाती है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर मऊ की इस इमरती में ऐसी क्या खासियत है कि लोग इसके स्वाद के दीवाने हो गए हैं।

मुहम्मदाबाद गोहना में खास स्वाद का जलवा

मऊ जिले के मुहम्मदाबाद गोहना स्थित शहीद चौराहे के पास बनने वाली इमरती स्थानीय लोगों से लेकर आने-जाने वाले पर्यटकों तक के बीच बेहद लोकप्रिय है। इस दुकान की सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण प्रक्रिया है। यहां इमरती पूरी तरह से केवल धोई (उड़द की दाल) से बनाई जाती है, जिसके कारण इसका स्वाद और बनावट लाजवाब होती है। यही कारण है कि लोग इसे दुकान पर खड़े होकर खाने के साथ-साथ अपने परिवार के लिए बड़ी मात्रा में पैक करवाकर घर ले जाते हैं।

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तैयारी और निर्माण की अनूठी विधि

दुकानदारों के अनुसार, इस इमरती को तैयार करने की प्रक्रिया काफी मेहनत और समय मांगती है। सबसे पहले बाजार से उच्च गुणवत्ता वाली धोई खरीदी जाती है। इसके बाद, इस धोई को लगभग 12 घंटों के लिए पानी में भिगोकर छोड़ दिया जाता है। अगले दिन, भीगी हुई दाल को मशीनों की सहायता से अच्छी तरह पिसा जाता है। पिसाई के बाद, इस मिश्रण को इमरती का आकार देकर रिफाइंड तेल में तला जाता है।

गरमा-गरम इमरती का लुत्फ

जैसे ही इमरती कड़ाही में सुनहरी और कुरकुरी हो जाती है, उसे तुरंत निकाल लिया जाता है। इसके बाद इसे चीनी से बनी चाशनी में डाला जाता है। इस चाशनी में इलायची और अन्य स्वाद बढ़ाने वाले पदार्थ मिलाए जाते हैं, जो इमरती के स्वाद में चार चांद लगा देते हैं। दुकान पर केवल ताजी और गर्म इमरती ही बेची जाती है, ठंडी इमरती का यहां कोई चलन नहीं है। यही कारण है कि यह हर बार बिल्कुल ताजी और स्वादिष्ट महसूस होती है।

भारी मांग और रोजाना की मशक्कत

इमरती की भारी मांग के कारण इसे बनाने के लिए रोजाना चार से पांच कारीगरों की टीम जुटी रहती है। उत्पादन की प्रक्रिया सुबह 5 बजे से शुरू हो जाती है और सुबह 6 बजे से ही इमरती कड़ाही से बाहर आने लगती है। यह सिलसिला देर रात 10 बजे तक अनवरत चलता रहता है। स्वाद ऐसा है कि जो कोई एक बार इसे चख ले, वह बार-बार खाने के लिए मजबूर हो जाता है।

मऊ के बाहर भी चर्चा

मऊ के मुहम्मदाबाद गोहना की इस इमरती की मांग सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। आज़मगढ़, बलिया और गाजीपुर जैसे आसपास के बड़े शहरों में भी इस इमरती के कद्रदान मौजूद हैं। चूंकि यह दुकान मुख्य चौराहे पर स्थित है, इसलिए यहां आने वाले राहगीर इसे चखे बिना नहीं रह पाते।

कीमत और गुणवत्ता

इस शानदार इमरती की कीमत 280 रुपये प्रति किलो तय की गई है। हालांकि यह दाम आम मिठाइयों से थोड़ा अधिक लग सकता है, लेकिन शुद्ध धोई के उपयोग और चाशनी में डाली गई इलायची जैसी प्रीमियम सामग्री के कारण इसे ग्राहकों द्वारा वाजिब माना जाता है। गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता न करने के कारण ही आज यह मिठाई मऊ की पहचान बन चुकी है।

सवाल-जवाब

मऊ की इस खास इमरती की कीमत क्या है?
इस इमरती की कीमत 280 रुपये प्रति किलो है।
इस इमरती को बनाने में मुख्य रूप से क्या इस्तेमाल होता है?
इसे बनाने के लिए केवल शुद्ध धोई यानी उड़द की दाल का उपयोग किया जाता है।
दुकान पर इमरती कितने बजे से मिलना शुरू हो जाती है?
इमरती सुबह 6 बजे से बनकर तैयार हो जाती है और रात 10 बजे तक मिलती है।
मऊ के अलावा और किन शहरों में इसकी मांग है?
मऊ के अलावा आज़मगढ़, बलिया और गाजीपुर जैसे शहरों के लोग भी इस इमरती को काफी पसंद करते हैं।
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