नवरात्र के पावन दिनों में व्रत रखने वाले श्रद्धालु अक्सर ऐसे फलाहारी व्यंजनों की तलाश में रहते हैं जो पौष्टिक होने के साथ पेट भरने वाले और झटपट बनने वाले हों। मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले और समूचे निमाड़ अंचल में केले और छोले से तैयार की जाने वाली एक अनोखी पारंपरिक डिश ऐसे समय के लिए एक बढ़िया विकल्प बनकर उभरती है। स्थानीय रसोई में आसानी से मिलने वाली चीजों से तैयार होने वाला यह फलाहारी पकवान सही रख-रखाव के साथ लगभग 24 घंटे तक खाने योग्य बना रहता है।
उपवास के नियमों के अनुकूल और पोषण से भरपूर
नवरात्र पर्व के दौरान अधिकांश लोग सामान्य अनाज और नियमित भोजन से पूरी तरह दूरी बनाए रखते हैं। इस धार्मिक नियम के कारण उपवास में मान्य विशेष फलाहारी सामग्रियों से अलग-अलग प्रकार के पकवान तैयार किए जाते हैं। वंदना के अनुसार, केले और छोले की यह खास डिश व्रत के इन कड़े नियमों को ध्यान में रखकर ही बनाई जाती है। इसमें केले और छोले के मिश्रण के साथ केवल वही मसाले और सामग्रियां शामिल की जाती हैं जो उपवास में खाई जाती हैं। इससे न केवल व्यंजन का पारंपरिक स्वाद निखरता है, बल्कि दिनभर ऊर्जा बनाए रखने के लिए यह एक संतुलित और तृप्त करने वाला आहार भी सिद्ध होता है।
रसोई में तैयार करने का सरल तरीका
इस व्यंजन को बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान और समय बचाने वाली है। सबसे पहले केले और छोले को विधिपूर्वक तैयार किया जाता है। इसके पश्चात इसमें व्रत में प्रयोग किए जाने वाले चुनिंदा मसाले और अन्य फलाहारी घटक मिलाए जाते हैं। सभी सामग्रियों को सही अनुपात में मिलाने के बाद जरूरत के मुताबिक इसे पकाया जाता है। बहुत कम समय में तैयार हो जाने की वजह से यह व्यंजन उन परिवारों के लिए काफी सहूलियत भरा साबित होता है, जो त्योहार के दौरान पूजा-पाठ और दैनिक दिनचर्या में काफी व्यस्त रहते हैं।
बुरहानपुर के स्थानीय उत्पादन से जुड़ा गहरा नाता
निमाड़ के खानपान में केले की अहमियत बहुत पुरानी और गहरी है। बुरहानपुर इलाका अपने बड़े पैमाने पर केले के उत्पादन के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है, इसलिए यहां के दैनिक और पारंपरिक भोजन में केले से बने कई स्थानीय पकवान अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। केले के साथ छोले का मेल इस पारंपरिक पाक-शैली को एक अनोखा जायका प्रदान करता है। इस डिश की सबसे बड़ी खूबी इसकी लंबी शेल्फ लाइफ है। इसे एक बार बना लेने के बाद उचित तापमान और सही ढंग से सहेज कर रखा जाए तो करीब 24 घंटे तक इसका स्वाद लिया जा सकता है। हालांकि, मौसम के बदलाव और रखने की परिस्थितियों के आधार पर इसकी ताजगी घट या बढ़ सकती है, इसलिए यदि खराब होने का कोई लक्षण दिखाई दे तो इसका सेवन नहीं करना चाहिए।



















