रसोई में कभी-कभी ऐसी स्थिति आ जाती है जब टोकरी में ताजी हरी सब्जियां खत्म हो चुकी होती हैं और झटपट कुछ स्वादिष्ट पकाने की चुनौती सामने होती है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के कस्बों और ग्रामीण इलाकों में ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए पीढ़ियों से एक बेहद नायाब नुस्खा अपनाया जाता रहा है। यहां के घरों में बेसन से बनने वाले पारंपरिक देसी पकवानों का चलन काफी पुराना है। इन्हीं में से एक बेहद लोकप्रिय और लजीज तैयारी है बेसन की मिजनी। यह व्यंजन ऊपर से देखने में जितना सादा और सीधा लगता है, इसका स्वाद उतना ही समृद्ध होता है। इसे बनाने का सबसे बड़ा हुनर बेसन में पानी मिलाने के विशेष अंदाज पर निर्भर करता है, जिससे बेसन के छोटे और दानेदार टुकड़े तैयार होते हैं।
प्राची इस पारंपरिक खानपान के बारे में विस्तार से बताती हैं कि ग्रामीण इलाकों में आज भी बेसन की मिजनी को बेहद खास अंदाज में तैयार किया जाता है। उनके अनुसार जब घर पर कोई सब्जी उपलब्ध नहीं होती, तब महज 30 मिनट के भीतर मिजनी की स्वादिष्ट सब्जी बनकर तैयार हो जाती है। इसके निर्माण में किसी भारी तामझाम या अतिरिक्त खरीदारी की दरकार नहीं होती। रसोई में पहले से मौजूद हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और रोजमर्रा के साधारण मसालों की सहायता से यह लाजवाब देसी तरीदार व्यंजन सरलता से पक जाता है।
बिना आटा गूंथे दानेदार मिजनी तैयार करने का अनोखा हुनर
आमतौर पर बेसन से बनने वाले अधिकांश व्यंजनों के लिए गाढ़ा घोल बनाया जाता है या फिर सख्त आटा गूंथा जाता है, लेकिन मिजनी तैयार करने का विज्ञान इससे एकदम अलग है। इसमें आटा गूंथने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं पड़ती। इस तकनीक का पूरा रहस्य पानी के संयोजन में छिपा हुआ है। बेसन को पानी के साथ इस तरह संतुलित रूप से मिलाया जाता है कि वह बंधकर एक लोई न बने, बल्कि उसकी नन्हीं-नन्हीं गोल दानेदार गांठें बनकर उभरें। यही सुडौल दाने आगे चलकर स्वादिष्ट तरीदार सब्जी या अन्य पारंपरिक देसी पकवानों का मुख्य आधार बनते हैं।
अगर आप अपनी रसोई में लखीमपुर खीरी का यह पारंपरिक स्वाद उतारना चाहते हैं, तो इसके लिए बहुत सीमित और बुनियादी चीजों की आवश्यकता होती है। सही बनावट हासिल करने के लिए आवश्यक सामग्री और अनुपात इस प्रकार है
- बेसन: 1 कप बेसन, जिसे किसी चौड़े बर्तन में छानकर इस्तेमाल किया जाए।
- पानी: हाथ से छींटे मारने के लिए बहुत कम मात्रा में सादा पानी।
- सूखे मसाले: बेसन में मिलाने के लिए स्वादानुसार नमक और थोड़ी लाल मिर्च।
- तड़के की सामग्री: कड़ाही में पकाने के लिए कुकिंग ऑयल, जीरा और एक चुटकी हींग।
- ग्रेवी के लिए सामग्री: बारीक कटा प्याज, अदरक-लहसुन का पेस्ट, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक।
- अंतिम सजावट और महक: स्वादानुसार गरम मसाला और बारीक कटा ताजा हरा धनिया।
परात में मिजनी के दाने बनाने की चरणबद्ध विधि
मिजनी बनाने की शुरुआत हमेशा एक खुली और चौड़ी परात या बड़े थाल से करनी चाहिए। संकरे कटोरे के बजाय चौड़े बर्तन का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि हथेलियों और उंगलियों को खुला स्थान मिले और बेसन को आसानी से घुमाया जा सके। सबसे पहले परात में 1 कप बेसन लें और उसे छलनी से अच्छी तरह छान लें। छानने से बेसन में मौजूद कोई भी गांठ या मोटा कण अलग हो जाता है, जिससे आगे बनने वाले दाने एक समान आकार के निकलते हैं। छाने हुए बेसन में स्वादानुसार थोड़ा नमक और हल्की लाल मिर्च डालें। दोनों सूखे मसालों को बेसन के साथ समान रूप से मिला लें ताकि स्वाद हर दाने के भीतर तक पहुंच जाए।
अब इस प्रक्रिया का सबसे अहम चरण शुरू होता है। अपनी हथेली में थोड़ा सा पानी लें और बेसन के ऊपर उंगलियों से पानी के बहुत हल्के-हल्के छींटे मारें। यहां संयम बरतना अनिवार्य है, क्योंकि एक साथ पानी उंडेलने से बेसन का आटा बन जाएगा और मिजनी का रूप पूरी तरह बिगड़ जाएगा। पानी की मात्रा बेहद कम रखनी होती है। छींटे मारने के फौरन बाद अपनी उंगलियों की मदद से बेसन को गोल-गोल घुमाना शुरू करें। जैसे ही सूखा बेसन पानी की हल्की नमी को सोखता है, उसमें छोटे-छोटे दाने और नन्हीं गांठें अपने आप आकार लेने लगती हैं।
जब थाली में पर्याप्त मात्रा में छोटे दाने नजर आने लगें, तो एक छन्नी की मदद से पूरे मिश्रण को हल्के हाथों से छान लें। छानने से यह फायदा होता है कि तैयार हो चुके ठोस दाने छन्नी के ऊपर अलग रह जाते हैं, जबकि जो बेसन अभी सूखा या बिना बंधा रह गया है, वह नीचे अलग निकल जाता है। इस बचे हुए सूखे बेसन को अलग फेंकने की कोई जरूरत नहीं है। उस बचे हुए बेसन पर फिर से हथेली से पानी के बारीक छींटे मारें और उंगलियों से गोल घुमाते हुए दोबारा दाने बनाएं। इस प्रक्रिया को दोहराने से सारा बेसन बिना किसी बर्बादी के एक समान मिजनी के दानों में तब्दील हो जाता है।
मसालेदार ग्रेवी में मिजनी पकाने का तरीका
जब बेसन के सारे दाने छनकर एक प्लेट में तैयार हो जाएं, तब बारी आती है तरीदार मसाला पकाने की। इसके लिए गैस चूल्हे पर एक कड़ाही चढ़ाएं और उसमें आवश्यकतानुसार तेल डालकर गर्म करें। जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तब उसमें जीरा डालें। जीरे के चटकते ही उसमें चुटकी भर हींग का तड़का लगाएं। हींग और जीरे की महक उठने के बाद कड़ाही में बारीक कटा हुआ प्याज डालें और उसे मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि उसका रंग हल्का सुनहरा न हो जाए।
प्याज के सुनहरा होते ही इसमें अदरक-लहसुन का पेस्ट शामिल करें और कच्चेपन की महक निकलने तक कुछ देर भूनें। इसके बाद हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर डालें। मसालों को धीमी आंच पर अच्छी तरह चलाते हुए पकाएं। जब मसाला कड़ाही की सतह को छोड़ने लगे और किनारों से तेल साफ अलग दिखाई देने लगे, तो यह इस बात का संकेत है कि आपकी ग्रेवी का मसाला पूरी तरह पक चुका है।
मसाला भुन जाने के बाद कड़ाही में जरूरत के मुताबिक पानी डालें और आंच तेज करके तरी में बढ़िया उबाल आने दें। जब ग्रेवी पूरी तरह खौलने लगे, तभी तैयार बेसन की मिजनी को धीरे-धीरे कड़ाही में डालें। मिजनी डालने के तुरंत बाद करछुल को हल्के हाथों से चलाएं ताकि बेसन के दाने एक-दूसरे से चिपकें नहीं और तरी में बिखरकर समान रूप से फैल जाएं। इसके बाद कड़ाही को ढक्कन से ढक दें और धीमी या मध्यम आंच पर कुछ समय के लिए पकने दें। भाप और धीमी आंच में मिजनी कड़ाही के भीतर मसालों का रस सोख लेती है, जिससे दाने अंदर तक बेहद मुलायम और रसीले हो जाते हैं। अंत में ऊपर से स्वादानुसार गरम मसाला और ताजा हरा धनिया डालकर आंच बंद कर दें।
परोसने का अंदाज और पारंपरिक स्वाद
पूरी तरह पक जाने के बाद बेसन की मिजनी की रंगत और खुशबू बेहद मनभावन होती है। इस पारंपरिक सब्जी को तवे से उतरी गर्मागर्म रोटियों, कुरकुरे पराठों या सादे उबले चावल के साथ परोसा जा सकता है। विशेष रूप से इसकी गाढ़ी, मसालेदार ग्रेवी सादी रोटी के साथ बहुत जबरदस्त तालमेल बिठाती है। जब भी घर पर सब्जियों की कमी हो या कुछ अलग और देसी जायका चखने का मन करे, तब लखीमपुर खीरी की यह 30 मिनट वाली आसान विधि किसी भी सामान्य दोपहर या रात के भोजन को खास बना देती है।



















