गर्मियों की तपिश हो अथवा भोजन के उपरांत किसी मीठे व्यंजन का आनंद लेने की चाह, कुल्फी का स्मरण होते ही लोगों का मन प्रफुल्लित हो उठता है। देश की राजधानी में पारंपरिक मिष्ठान के अनेक प्रसिद्ध ठिकाने उपस्थित हैं, किंतु कुछ विशिष्ट स्टॉलों की लोकप्रियता मात्र उनके स्वाद तक सीमित न रहकर वर्षों के कठोर परिश्रम तथा समर्पण से जुड़ी होती है। ऐसी ही एक प्रेरक यात्रा लल्लन की है, जो मूल रूप से राजस्थान के उदयपुर जिले से संबंध रखते हैं और पिछले लगभग 25 वर्षों से दिल्ली के खानपान परिदृश्य में अपनी खास पहचान बनाए हुए हैं।
उदयपुर से देश की राजधानी का ढाई दशक लंबा सफर
लल्लन राजस्थान के उदयपुर शहर से निकलकर रोजगार की तलाश में दिल्ली पहुंचे थे। लगभग 25 वर्ष पूर्व आरंभ हुआ यह सफर समय के साथ उनकी पहचान का एक अटूट हिस्सा बन गया। इतने लंबे अंतराल में उनकी कुल्फी दिल्ली की गलियों और बाजारों के पारंपरिक स्वाद में गहराई से समा चुकी है। उनके स्टॉल पर आने वाले मिष्ठान प्रेमियों के लिए सर्वाधिक मुख्य आकर्षण उनकी हाथ से तैयार की जाने वाली शुद्ध कुल्फी है। लल्लन अपनी इस पारंपरिक मिठाई को बनाने में किसी भी तरह के बाहरी अथवा कृत्रिम मटेरियल का प्रयोग नहीं करते, जिससे इसका प्राकृतिक स्वाद और पौष्टिकता बरकरार रहती है।
पारंपरिक मटका कुल्फी से लेकर आधुनिक फ्लेवर तक विस्तृत विकल्प
इस स्टॉल पर ग्राहकों के सम्मुख कई तरह की कुल्फी परोसी जाती है, जिसमें मिट्टी के पारंपरिक पात्र में तैयार होने वाली मटका कुल्फी को लोग सर्वाधिक चाव से पसंद करते हैं। इसके अतिरिक्त केसर पिस्ता और रबड़ी मलाई जैसे क्लासिक जायके भी सदाबहार मांग में रहते हैं। नए स्वादों के खोजी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए यहां आम, पान, चॉकलेट तथा गुलाब जैसे कई अन्य दिलचस्प विकल्प भी उपलब्ध कराए जाते हैं। लल्लन के अनुसार, जहां पारंपरिक मिष्ठान के प्रेमी केसर पिस्ता और रबड़ी मलाई की ओर खिंचे चले आते हैं, वहीं युवा तथा नए प्रयोगों के शौकीन लोग पान, आम और चॉकलेट जैसे अनूठे फ्लेवर आजमाना पसंद करते हैं।
दालचीनी के प्राकृतिक स्पर्श से बनती है बिना चीनी वाली कुल्फी
स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने वाले मिष्ठान प्रेमियों के लिए इस स्टॉल की सबसे अनूठी विशेषता यहां उपलब्ध शुगर फ्री कुल्फी है। इस खास वेरायटी के निर्माण में किसी भी प्रकार की रिफाइंड चीनी अथवा कृत्रिम स्वीटनर का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया जाता। इसे प्राकृतिक रूप से मधुर बनाने के लिए दालचीनी का इस्तेमाल किया जाता है, जो कुल्फी में एक सौम्य और भीनी मिठास घोल देती है। मधुमेह के मरीजों और मीठे से परहेज करने वाले व्यक्तियों के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। इस बिना चीनी वाली खास कुल्फी का मूल्य भी अन्य सामान्य कुल्फी की तरह ही 100 रुपये तय किया गया है।
दिल्ली हाट में सुबह से देर रात तक चलता है स्टॉल
लल्लन अपनी कुल्फी का यह लोकप्रिय स्टॉल दिल्ली हाट परिसर में प्रतिदिन लगाते हैं। उनकी यह दुकान प्रातः लगभग 10:30 बजे खुल जाती है और रात्रि 10:15 बजे तक लगातार सेवा देती है। बीते पच्चीस वर्षों से अनवरत जारी यह कार्य अब केवल जीविकोपार्जन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि उनके आत्मसम्मान और पहचान का पर्याय बन चुका है। हाथ की कारीगरी, विविध प्रकार के फ्लेवर और दालचीनी वाली शुगर फ्री रेसिपी इस स्टॉल को राजधानी के अन्य कुल्फी विक्रेताओं की तुलना में एक बेहद खास दर्जा प्रदान करती है।



















