मध्य प्रदेश के बघेलखंड अंचल में खानपान की परंपराएं सदियों से जनजीवन का गहरा हिस्सा रही हैं। यहां की सांस्कृतिक पहचान में लोक-संस्कृति और बोली के साथ-साथ पारंपरिक व्यंजनों का स्थान भी बेहद अहम है। इसी कड़ी में मीठी बूंदी एक ऐसा पारंपरिक मिष्ठान है, जिसे गांवों की चौपालों से लेकर शहरी बाजारों तक हर वर्ग के लोग बड़े चाव से खाते हैं। पूजा-पाठ का प्रसंग हो या घर आए मेहमानों का सत्कार, यह सादा लेकिन रसीला पकवान हर मौके पर थाली की शोभा बढ़ाता है।
चाशनी और बेसन से तैयार होती है रसीली बूंदी
इस पारंपरिक मिठाई को तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारंपरिक कारीगरी पर आधारित है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले बेसन में आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर एक पतला और चिकना घोल तैयार किया जाता है। इसके बाद कड़ाही में घी या तेल को तेज आंच पर गर्म किया जाता है। कारीगर लोहे या पीतल के छिद्रदार झारे के ऊपर बेसन का घोल डालते हैं, जिससे गर्म तेल में गोल-गोल बूंदियां गिरती हैं और कुरकुरी होने तक तली जाती हैं। दूसरी तरफ एक अलग बर्तन में चीनी और पानी को मिलाकर चाशनी पकाई जाती है, जिसमें मनमोहक खुशबू और रंग के लिए इलायची, केसर अथवा हल्का खाद्य रंग मिलाया जाता है। तली हुई कुरकुरी बूंदी को गर्म चाशनी में डुबोकर लगभग आधे घंटे के लिए छोड़ दिया जाता है, जिससे बूंदी अंदर तक रस पीकर पूरी तरह रसीली और मुलायम बन जाती है।
रीवा में तीन दशकों से बरकरार है स्वाद
रीवा शहर के प्रमुख बाजार शिल्पी प्लाजा में स्थित बंगाल स्वीट्स के संचालक पवन चौरसिया बीते लगभग 30 वर्षों से यह पारंपरिक मिठाई तैयार कर रहे हैं। उनका कहना है कि मीठी बूंदी बघेलखंड की विशुद्ध देसी और पारंपरिक मिठाई है। इसका धार्मिक और सामाजिक महत्व भी काफी गहरा है। किसी भी शुभ अनुष्ठान, मांगलिक अवसर या सत्यनारायण भगवान की कथा में इसे मुख्य प्रसाद के रूप में अर्पित करने और भक्तों में वितरित करने की अटूट परंपरा रही है। बाजार में यह लोकप्रिय मिठाई ₹200 प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध कराई जाती है।
तीखे सेव के साथ मीठे का अनूठा मेल
बघेलखंड के देहाती इलाकों और कस्बों में इस मिठाई को खाने का एक खास देशी अंदाज भी प्रचलित है। यहां लोग मीठी बूंदी को तीखे और कुरकुरे नमकीन सेव या भुजिया के साथ मिलाकर खाना पसंद करते हैं। मिठास और चटपटेपन का यह अनोखा मेल सुबह के नाश्ते के समय बहुत चाव से खाया जाता है। इसके अलावा त्योहारों पर मिलने-जुलने के दौरान और शाम की चाय के साथ भी स्थानीय लोग नमकीन सेव और मीठी बूंदी के इस मेल का आनंद लेते हैं।



















