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शास्त्रीपुरम की गली में बनते हैं ये कुरकुरे आलू के बरुले, ₹20 की प्लेट के लिए दूर से आते हैं लोगखानपान
20 जुल॰ 2026, 10:14 pm (46 दिन पहले)· 2

शास्त्रीपुरम की गली में बनते हैं ये कुरकुरे आलू के बरुले, ₹20 की प्लेट के लिए दूर से आते हैं लोग

आगरा के शास्त्रीपुरम में नगला चुचाना के पास बनने वाले आलू के बरुले अपनी खट्टी-तीखी सीक्रेट चटनी और कुरकुरे स्वाद की वजह से दूर-दूर से लोगों को खींच लाते हैं, जहां प्लेटें सिर्फ 20 रुपये से शुरू होती हैं.

हर साल जैसे ही बरसात शुरू होती है, आगरा के शास्त्रीपुरम इलाके की एक छोटी दुकान शहर के सबसे व्यस्त खाने के ठिकानों में शुमार हो जाती है, और वजह होती है शुद्ध सरसों के तेल में तलते आलुओं की खुशबू. यहां मिलने वाली चीज़ का नाम है आलू के बरुले, एक ऐसी कुरकुरी चाट जिसकी लोग कसम खाते हैं, खासकर बारिश के मौसम में जब तली हुई गर्म चीज़ के साथ खट्टी-तीखी चटनी का मेल एकदम जंचता है. यह दुकान शास्त्रीपुरम के नगला चुचाना के पास लगती है और इसकी शोहरत मोहल्ले की सीमा लांघकर दूर-दूर तक फैली हुई है, जिस वजह से शहर के कोने-कोने से ग्राहक यहां खिंचे चले आते हैं.

इस दुकान के पीछे कारीगर आकाश का हाथ है, जो पिछले कई सालों से आलू के बरुले बना रहे हैं. उनका कहना है कि यह चाट आगरा की सबसे पसंदीदा स्ट्रीट फूड में गिनी जाती है, और दूर-दराज से लोगों के यहां खिंचे चले आने की वजह बड़ी सीधी है, साफ-सफाई और शुद्ध मसालों में तैयार होने के चलते इसमें किसी तरह की कोई कमी नहीं छोड़ी जाती.

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कैसे तैयार होते हैं ये कुरकुरे आलू के बरुले

आकाश इसका पूरा तरीका बताते हैं. सबसे पहले छोटे-छोटे आलुओं को अच्छी तरह धोया जाता है, ताकि उन पर चिपकी मिट्टी पूरी तरह निकल जाए. साफ होने के बाद आलुओं को उबाला जाता है और फिर हाथ से छील लिया जाता है. छिले हुए आलुओं को बेसन, अरारोट यानी कॉर्नफ्लोर और मसालों से तैयार एक गाढ़े घोल में डुबोकर हर तरफ से अच्छी तरह लपेट दिया जाता है. इसके बाद इन्हें तब तक डीप फ्राई किया जाता है, जब तक बाहरी परत पूरी तरह कुरकुरी और सुनहरी न हो जाए. ग्राहक तक पहुंचने से ठीक पहले इन पर चटनी और चाट मसाला डाला जाता है. धुलाई से लेकर उबालने, छीलने, घोल में लपेटने और तलने तक की यही पूरी प्रक्रिया है, जो शास्त्रीपुरम के इन आलू बरुलों को उनका खास कुरकुरापन देती है.

असली राज़ छुपा है हरी चटनी में

आकाश के मुताबिक हर प्लेट के साथ मिलने वाली चटपटी हरी चटनी ही असल में इस चाट की जान होती है. इसे बनाने में ताज़ा हरा धनिया, नींबू, टमाटर, अदरक और लहसुन इस्तेमाल होते हैं, साथ ही घर पर तैयार मसाले भी मिलाए जाते हैं. इसके अलावा कुछ ऐसे सीक्रेट मसाले भी चटनी में डाले जाते हैं, जिनका राज़ आकाश किसी को नहीं बताते, लेकिन यही मसाले चटनी का स्वाद कई गुना बढ़ा देते हैं. वह खुलकर मानते हैं कि तली हुई चीज़ से ज्यादा अहमियत चटनी की होती है, अगर चटनी का स्वाद सही नहीं बना तो बरुले कितने भी कुरकुरे क्यों न हों, अच्छे नहीं लगेंगे. यही वजह है कि वह सबसे ज्यादा मेहनत और ध्यान चटनी बनाने में ही लगाते हैं.

20 रुपये से शुरू होती हैं प्लेटें, बारिश में बढ़ी बिक्री

दाम की बात करें तो आकाश की दुकान पर बरुले की सबसे छोटी प्लेट 20 रुपये की मिलती है. इसके अलावा एक प्लेट 30 रुपये, तीसरे साइज़ की प्लेट 40 रुपये और सबसे बड़ी प्लेट 50 रुपये में मिलती है. ग्राहक जितनी मात्रा मांगता है, दुकानदार उसी हिसाब से उसे बरुले परोसते हैं, यानी दाम पूरी तरह मात्रा पर निर्भर करता है. आकाश बताते हैं कि इन दिनों बरसात का मौसम चल रहा है, जिसकी वजह से बिक्री में साफ उछाल देखा जा रहा है, और उनका अनुभव कहता है कि जैसे-जैसे मौसम ठंडा होता जाएगा, इस चटपटी चाट की मांग और भी ज्यादा बढ़ेगी.

सवाल-जवाब

आलू के बरुले कहां मिलते हैं?
आगरा के शास्त्रीपुरम इलाके में नगला चुचाना के पास मशहूर आलू के बरुले की दुकान है.
आलू के बरुले किसमें तले जाते हैं?
इन्हें शुद्ध सरसों के तेल में डीप फ्राई किया जाता है.
आलू के बरुले की प्लेट की कीमत क्या है?
सबसे छोटी प्लेट 20 रुपये, फिर 30 रुपये, 40 रुपये और सबसे बड़ी प्लेट 50 रुपये की मिलती है.
आलू के बरुले किस चीज़ में लपेटकर तले जाते हैं?
उबले और छिले आलुओं को बेसन, अरारोट यानी कॉर्नफ्लोर और मसालों के गाढ़े घोल में लपेटकर तला जाता है.
बरुले के साथ कौन सी चटनी परोसी जाती है?
ताज़ा हरा धनिया, नींबू, टमाटर, अदरक, लहसुन और कुछ सीक्रेट मसालों से बनी चटपटी हरी चटनी परोसी जाती है.
बरुलों की बिक्री बरसात में क्यों बढ़ जाती है?
दुकानदार आकाश के मुताबिक बरसात के मौसम में गरम-कुरकुरी चाट की मांग बढ़ जाती है और मौसम ठंडा होने पर यह और बढ़ेगी.
आलू के बरुले की दुकान कौन चलाता है?
यहां के कारीगर आकाश पिछले कई सालों से यह दुकान चला रहे हैं.
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