32 साल बाद अपनी ही धरती पर खेले जा रहे फुटबाल विश्व कप में मेजबान अमेरिका ने वही किया जिसकी उसके प्रशंसक उम्मीद कर रहे थे — एक यादगार शुरुआत। ओपनिंग मैच में पराग्वे को 4-1 से रौंदते हुए अमेरिकी टीम ने न सिर्फ अपने अभियान की दमदार नींव रखी, बल्कि टूर्नामेंट में अपने इतिहास के कई पुराने रिकॉर्ड भी मिटा दिए। पहले हाफ में फोलारिन बालोगुन के शानदार खेल ने पूरे मुकाबले का रुख तय कर दिया।
इतिहास के पन्नों में दर्ज हुई सबसे बड़ी जीत
यह जीत कई मायनों में खास रही। विश्व कप में अमेरिका ने इससे पहले कभी तीन से ज्यादा गोल नहीं दागे थे, लेकिन इस बार उसने एक ही मैच में चार गोल ठोक दिए — जो किसी भी विश्व कप मुकाबले में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। यही नहीं, पहले हाफ में ही दागे गए तीन गोल भी अमेरिका के लिए विश्व कप का नया रिकॉर्ड बन गए। अंदाजा इसी से लगाइए कि चार साल पहले कतर में हुए विश्व कप में अमेरिका ने अपने चार मैचों में मिलाकर सिर्फ तीन गोल किए थे।
शुरू से ही हावी रही अमेरिकी टीम
अमेरिका ने पहले मिनट से ही आक्रामक तेवर दिखाए। क्रिश्चियन पुलिसिच पहले हाफ में बेहद प्रभावशाली रहे और उनके खेल का ही नतीजा था कि सातवें मिनट में डेमियन बोबाडिला के पैर से आत्मघाती गोल हो गया — यानी अमेरिका का खाता विरोधी की गलती से खुला। इसके बाद बालोगुन ने मोर्चा संभाला। उन्होंने 31वें मिनट में पहला और पहले हाफ के इंजरी टाइम के पांचवें मिनट में दूसरा गोल दागकर मध्यांतर तक टीम को 3-0 से आगे कर दिया। दूसरे हाफ के इंजरी टाइम के आखिरी क्षणों में जियो रेना ने चौथा गोल जड़कर इस ऐतिहासिक स्कोरलाइन को पूरा किया।
पराग्वे की वापसी की कोशिश नाकाम
16 साल बाद विश्व कप खेल रही दक्षिण अमेरिकी टीम पराग्वे शुरुआती झटकों से कभी उबर ही नहीं पाई। पिछड़ने के बाद उसने कई बार वापसी की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। उसका इकलौता गोल 73वें मिनट में मॉरीसियो ने किया, जो महज सांत्वना भर साबित हुआ।
पोचेटीनो की नई सोच और गूंजता स्टेडियम
नए कोच मॉरीशियो पोचेटीनो के मार्गदर्शन में अमेरिकी टीम एक बदली हुई शैली में खेलती दिखी। मैदान पर मौजूद 70,492 दर्शक टीम के इस आक्रामक और लयबद्ध खेल से मंत्रमुग्ध हो गए।
बालोगुन: न्यूयॉर्क से उठा अमेरिका का नया नायक
इस जीत के असली सितारे रहे फोलारिन बालोगुन। न्यूयॉर्क में जन्मे और लंदन में पले-बढ़े इस स्ट्राइकर के लिए यह विश्व कप में पदार्पण था, और उन्होंने पहले ही मैच में इतिहास रच दिया। 1930 के बाद वह पहले ऐसे अमेरिकी खिलाड़ी बने जिसने विश्व कप के एक मुकाबले में एक से अधिक गोल दागे। दिलचस्प बात यह है कि तीन साल पहले बालोगुन ने इंग्लैंड की बजाय अमेरिका का प्रतिनिधित्व करने का फैसला किया था। अगर वह इंग्लैंड चुनते तो शायद उस मजबूत टीम में जगह बनाना भी मुश्किल होता — लेकिन अमेरिका के लिए खेलकर वह अब देश के फुटबॉल नायक बन चुके हैं।













