प्रवर्तन निदेशालय के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने विदेशी नागरिकों, विशेष रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका के बाशिंदों को निशाना बनाकर चलाए जा रहे फर्जी कॉल सेंटर गिरोह के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया है. धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत की गई इस कानूनी कार्रवाई में पटियाला, पुणे और चंडीगढ़ के 4 अलग-अलग परिसरों पर एक साथ तलाशी ली गई. जांच अधिकारियों ने पाया कि जब छापेमारी की गई, उस वक्त भी 3 बड़े कॉल सेंटर पूरी तरह चालू हालत में थे. इन केंद्रों के भीतर करीब 220 कर्मचारी मौजूद रहकर फोन कॉलिंग के जरिए लोगों को फंसाने में लगे हुए थे. जांच दल अब इस पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और उनके संगठनात्मक ढांचे की गहराई से पड़ताल कर रहा है.
पटियाला और पुणे में मिले सक्रिय कॉल सेंटर
प्रवर्तन निदेशालय को अपने जमीनी सत्यापन और खुफिया विश्लेषण के दौरान यह पुख्ता इनपुट मिला था कि एक संगठित समूह विभिन्न राज्यों में अवैध कॉल सेंटर स्थापित कर धोखाधड़ी कर रहा है. इस सटीक सूचना के आधार पर जांच अधिकारियों की विशेष टीमों ने पटियाला में 2 ठिकानों और पुणे में 1 केंद्र पर धावा बोला. तलाशी के दौरान यह सामने आया कि इन सभी परिसरों को कॉर्पोरेट दफ्तरों की तर्ज पर डिजाइन किया गया था, जहां बड़े पैमाने पर क्यूबिकल्स और वर्कस्टेशन स्थापित किए गए थे. वहां काम कर रहे लोगों के पास कंप्यूटर, हेडसेट, स्मार्टफोन और अत्याधुनिक नेटवर्किंग उपकरण मौजूद थे. मौके पर सक्रिय मिले लगभग 220 कर्मचारियों की पहचान दर्ज कर ली गई है. एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इन केंद्रों के भीतर रिपोर्टिंग का पदानुक्रम क्या था और किस कर्मचारी की क्या भूमिका निर्धारित की गई थी.
अमेरिकी नागरिकों को जाल में फंसाने की कार्यप्रणाली
इन अवैध केंद्रों से मुख्य रूप से अमेरिकी नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय कॉलिंग के जरिए संपर्क किया जाता था. कॉल करने वाले टेलीकॉलर पीड़ितों को डराने या भ्रमित करने के लिए मनगढ़ंत कहानियां सुनाते थे और उनसे विभिन्न बहानों के तहत पैसे भेजने का दबाव बनाते थे. पटियाला में पकड़े गए दोनों केंद्रों से ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो अमेरिकी बाशिंदों से वसूली और ठगी की पुष्टि करते हैं. तलाशी के दौरान बरामद मोबाइल फोन और एक प्रमुख लैपटॉप में इस सिंडिकेट के काम करने का पूरा कच्चा-चिट्ठा मिला है. इस डिजिटल सामग्री में उन सभी पीड़ितों का ब्योरा दर्ज है जिनसे अब तक पैसे ऐंठे गए थे, साथ ही ठगी से प्राप्त हुई रकम का लेखा-जोखा भी इन दस्तावेजों में पाया गया है.
पुणे केंद्र और दोनों शहरों के नेटवर्क का संबंध
पुणे में जिस तीसरे कॉल सेंटर पर छापा मारा गया, वहां भी अमेरिकी नागरिकों को ठगने का बिल्कुल वही तरीका अपनाया जा रहा था जो पटियाला में देखने को मिला. जांच अधिकारी अब दोनों शहरों के बीच मौजूद आंतरिक संपर्कों की कड़ियों को जोड़ने में लगे हैं. इस जांच का मुख्य केंद्र बिंदु यह समझना है कि क्या दोनों शहरों के इन केंद्रों को एक ही संगठित गिरोह द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था, कॉलिंग का केंद्रीय सिस्टम कहां से संचालित होता था और दोनों ठिकानों के बीच वित्तीय संसाधनों का आदान-प्रदान किस माध्यम से किया जा रहा था. इसके अलावा यह भी देखा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर इन दोनों केंद्रों का दैनिक प्रबंधन किन लोगों के हाथों में सौंपा गया था.
चंडीगढ़ से संचालित हो रहा था मास्टरमाइंड का ठिकाना
इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के मुख्य साजिशकर्ताओं तक पहुंचने के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने चंडीगढ़ स्थित एक आवासीय परिसर पर भी छापा मारा. इस आवासीय परिसर का इस्तेमाल पटियाला के केंद्रों को नियंत्रित करने और पूरे ऑपरेशन की निगरानी करने वाले मास्टरमाइंड द्वारा किया जा रहा था. इस ठिकाने की तलाशी के दौरान कई अहम डिजिटल उपकरण मिले हैं जिनमें कॉल सेंटरों के संचालन से जुड़ा संवेदनशील डेटा सुरक्षित रखा गया था. इसी परिसर से एक ऐसे व्यक्ति की पहचान भी सामने आई है जो अमेरिकी डॉलर में हासिल की गई अवैध रकम को भारतीय रुपये में बदलने और उसे विभिन्न खातों में व्यवस्थित करने का काम संभालता था. जांच एजेंसी अब इस व्यक्ति के बैंक खातों और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन के नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही है.
डिजिटल उपकरणों की जब्ती और आगे की जांच
चारों ठिकानों पर चलाए गए इस तलाशी अभियान के दौरान जांच अधिकारियों ने 66 मोबाइल फोन, 13 लैपटॉप, कंप्यूटर हार्ड डिस्क, नकदी, आधुनिक संचार उपकरण और कई अहम कागजात अपने कब्जे में लिए हैं. इन सभी डिजिटल साक्ष्यों को विस्तृत तकनीकी और फॉरेंसिक विश्लेषण के लिए सुरक्षित किया गया है. जांचकर्ताओं का प्राथमिक लक्ष्य यह पता लगाना है कि अमेरिकी नागरिकों को फोन करते समय किस तरह की कॉल स्क्रिप्ट का उपयोग किया जाता था और अंतरराष्ट्रीय कॉल करने के लिए किस डायलर या वीओआईपी (VoIP) तकनीक का सहारा लिया जा रहा था. एजेंसी यह भी जांच रही है कि पीड़ितों के संपर्क सूत्र कहां से खरीदे गए थे और ठगी के पैसों को किन-किन रास्तों से होकर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचाया गया. इस पूरे रैकेट की कड़ियों को पूरी तरह बेनकाब करने के लिए आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है.

















