रोशनी के महापर्व दिवाली और छोटी दिवाली के दौरान सड़कों तथा रास्तों पर आवाजाही करते समय विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है। अक्सर इस पावन पर्व की रातों में चौराहों या सुनसान मोड़ों पर नींबू, सिंदूर, पुष्प, सूखी मिर्च और कई अन्य वस्तुएं रखी हुई दिखाई देती हैं। पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुछ लोग नकारात्मक कष्टों को टालने या विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों के लिए सार्वजनिक रास्तों पर इन सामग्रियों को छोड़ देते हैं। ऐसे में राहगीरों के मन में स्वाभाविक रूप से यह डर और दुविधा उत्पन्न हो जाती है कि यदि अनजाने में किसी का पैर ऐसी सामग्री पर पड़ जाए या कोई उसे लांघ दे, तो उसके साथ किसी अनहोनी की आशंका तो नहीं है। इस विषय पर फरीदाबाद के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने विस्तार से मार्गदर्शन करते हुए कई महत्वपूर्ण सावधानियां और सरल आध्यात्मिक उपाय साझा किए हैं।
चौराहों पर छोड़ी गई सामग्रियों के पीछे की सोच और मर्यादा
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार दिवाली और छोटी दिवाली की मध्यरात्रि में कुछ लोग अपने कष्टों अथवा समस्याओं से मुक्ति पाने के भ्रम में चौराहों पर नींबू, सिंदूर, फूल और सूखी मिर्च जैसी तांत्रिक वस्तुएं रखकर चले जाते हैं। उनका कहना है कि जो लोग इस तरह की गतिविधियों में संलिप्त होते हैं, उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए कि अपने निजी कष्टों का भार किसी निर्दोष राहगीर पर डालना कतई उचित नहीं है। मनुष्य का धर्म अपने दुखों का निवारण सकारात्मक साधना से करना है, न कि दूसरों के लिए संकट या भ्रम खड़ा करना। राह चलते लोगों को भी ऐसी परिस्थिति से बचने के लिए नजरें सतर्क रखनी चाहिए और किसी भी चौराहे से गुजरते समय जमीन पर पड़ी असामान्य चीजों से दूरी बनाकर निकलना चाहिए।
रास्ते में संदेहास्पद सामग्री दिखे तो क्या सावधानी बरतें
मार्ग से गुजरते वक्त यदि किसी को सड़क या चौराहे पर नींबू, फूल, सिंदूर अथवा सूखी लाल मिर्च बिखरी हुई नजर आए, तो सबसे पहला नियम यह है कि उसे कभी भी जानबूझकर या लापरवाही में लांघा न जाए। ऐसे स्थान से थोड़ी दूरी बनाकर सुरक्षित रूप से किनारे से निकल जाना ही सबसे समझदारी भरा निर्णय होता है। इसके साथ ही पैदल चलते या वाहन चलाते समय अपने मन को पूरी तरह शांत और भयमुक्त रखने के लिए श्री राम जय राम जय जय राम मंत्र का निरंतर मानसिक जप करते रहना चाहिए। महंत कामेश्वरानंद का कहना है कि भगवान राम के पावन नाम में असीम ऊर्जा समाहित है, जो हर प्रकार की नकारात्मकता, बाधा और संकट को तत्काल समाप्त करने की क्षमता रखती है। प्रभु के स्मरण से मन की घबराहट पूरी तरह दूर हो जाती है।
गलती से लांघ जाने पर घर पहुंचकर करें ये सरल निवारण
यदि किसी राहगीर को यह आभास हो कि उसका पैर भूलवश किसी संदेहास्पद वस्तु पर पड़ गया है या वह उसे लांघकर घर आ गया है, तो उसे भयभीत होने अथवा मानसिक तनाव पालने की रत्ती भर भी जरूरत नहीं है। महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि घर की दहलीज पार करते ही सबसे पहले अपने हाथ और पैर स्वच्छ जल से अच्छी तरह धोने चाहिए। यदि मन में आशंका या संकोच अधिक हो, तो तुरंत संपूर्ण शरीर का स्नान कर लेना सबसे उत्तम है। इसके उपरांत पूरे घर में पवित्र गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए, क्योंकि सनातन परंपरा में गंगाजल को शुद्धि और शांति का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है।
घर के भीतर पवित्रता स्थापित करने के बाद प्रभु श्री राम के विजय मंत्र श्री राम जय राम जय जय राम का श्रद्धापूर्वक ध्यान करें। इसके अलावा संकटमोचन हनुमान जी महाराज की विशेष अनुकंपा प्राप्त करने के लिए उनके बाएं चरण से सिंदूर लेकर अपने मस्तक पर तिलक लगाना चाहिए। धार्मिक मान्यता है कि मारुति नंदन के चरणों का सिंदूर धारण करने से व्यक्ति को दिव्य सुरक्षा और आशीर्वाद मिलता है, जिससे सभी प्रकार की शंकाएं, वहम और विपत्तियां पूरी तरह शांत हो जाती हैं।
जीवों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से दूर रहने का संदेश
तांत्रिक अनुष्ठानों के नाम पर कुछ तत्वों द्वारा दिवाली की रात उल्लू के नाखून और उनके पंखों जैसी चीजों का इस्तेमाल किए जाने की भी बातें सामने आती हैं। महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने इस कुप्रथा की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि किसी भी मूक जीव को क्षति पहुंचाना या उसकी बलि देना पूरी तरह अनुचित और अधार्मिक कृत्य है। दिवाली का महापर्व लक्ष्मी पूजन, आध्यात्मिक उल्लास, आत्मिक प्रकाश और ईश्वरीय आराधना का पावन समय है। ऐसे शुभ अवसर पर किसी प्राणी को पीड़ा पहुंचाने के बजाय व्यक्ति को ईश्वर की सच्ची भक्ति और परोपकार में लीन होना चाहिए। त्योहार के पूरे समय सावधानी बरतें और अपने अंतःकरण में प्रभु राम के नाम का स्मरण बनाए रखें।



















