हरियाणा के भिवानी की 19 वर्षीय प्ले-स्कूल शिक्षिका मनीषा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की गुत्थी एक बार फिर सुलझाई जाएगी। पंचकूला स्थित विशेष अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दायर क्लोजर रिपोर्ट को पूरी तरह खारिज कर दिया है। परिजनों की ओर से दायर विरोध याचिका पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने इस पूरे प्रकरण की नए सिरे से निष्पक्ष जांच कराने का कड़ा निर्देश जारी किया है। अदालत के इस फैसले के बाद मामले की फाइल दोबारा जांच एजेंसी के पास भेजी जाएगी, जिससे पीड़िता के परिवार में इंसाफ मिलने की उम्मीद फिर से जाग उठी है।
सीबीआई की आत्महत्या थ्योरी को परिजनों ने दी चुनौती
जांच एजेंसी ने करीब डेढ़ साल तक इस संवेदनशील मामले की पड़ताल करने के बाद 12 अगस्त 2026 को पंचकूला की विशेष अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। अपनी रिपोर्ट में जांच एजेंसी ने शिक्षिका की मौत को आत्महत्या करार दिया था। मृतका के पिता संजय कुमार ने इस थ्योरी को सिरे से नकारते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। पिता संजय ने कहा कि अदालत के फैसले के बाद परिवार को दोबारा न्याय मिलने की किरण दिखाई दी है। परिजनों का आरोप है कि मामले से जुड़े अहम तथ्य खुदकुशी की ओर इशारा नहीं करते थे, इसके बावजूद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी गई थी।
वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी करेंगे नए सिरे से पड़ताल
अदालत में परिजनों का पक्ष रखने वाले वकील भगवान सिंह ने बताया कि विशेष अदालत का यह निर्णय परिवार और समाज दोनों के लिए राहत लेकर आया है। आदेश के तहत अब एक सीनियर आईपीएस अधिकारी की अगुवाई में मामले की नए सिरे से जांच की जाएगी। वकील ने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई व्यवस्था या सरकार के विरुद्ध नहीं है, बल्कि वे केवल निष्पक्ष न्याय चाहते हैं। उन्होंने हरियाणा सरकार और केंद्र सरकार से अपील की कि वे इस मामले में निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और मनीषा को न्याय दिलाने में पीड़ित परिवार का पूरा सहयोग करें।
लापता होने से लेकर खेत में शव मिलने तक का घटनाक्रम
यह दुखद घटना 11 अगस्त 2025 को शुरू हुई थी, जब 19 वर्षीय मनीषा भिवानी जिले के ढाणी लक्ष्मण गांव से अचानक संदिग्ध रूप से लापता हो गई थीं। इसके दो दिन बाद यानी 13 अगस्त 2025 को उनका शव सिंघानी गांव के खेतों में संदिग्ध हालत में बरामद हुआ था। शुरुआती चरण में स्थानीय पुलिस ने भी इसे खुदकुशी का मामला माना था, लेकिन परिजनों और स्थानीय लोगों के भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा गया था।
सबूतों और रिपोर्ट पर याचिका में खड़े किए गए थे गंभीर सवाल
अदालत में पिता संजय कुमार और उनके वकील एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह द्वारा दाखिल याचिका में सीबीआई जांच की खामियों को उजागर किया गया था। याचिका में कथित सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग की प्रामाणिकता, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट और घटनास्थल पर मिले भौतिक साक्ष्यों के विश्लेषण पर गंभीर सवाल खड़े किए गए थे। इन्हीं तकनीकी और परिस्थितिजन्य विसंगतियों को देखते हुए अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट को अमान्य ठहराया और आगे की विस्तृत जांच का रास्ता साफ किया।



















