हरियाणा के जींद जिले में स्थित संगतपुरा गांव की 26 वर्षीय निशानेबाज नीरू ढांडा ने जापान के आइची, नागोया में आयोजित एशियाई खेलों में असाधारण प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए हैं। घर की तंगहाली, सीलन भरी दीवारों और सीमित संसाधनों के बावजूद इस एथलीट ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराया। सबसे खास बात यह रही कि जब नीरू जापान में सोने पर अचूक निशाना लगा रही थीं, तब उनकी मां सुदेश को इस ऐतिहासिक क्षण की भनक तक नहीं थी, क्योंकि उनके घर पर टेलीविजन तक मौजूद नहीं है।
राशन डिपो पर मिली ऐतिहासिक जीत की सूचना
नीरू के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण है और वे गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवनयापन करते हैं। जिस समय नीरू ने पदक पक्का किया, उस समय उनकी मां सुदेश सरकारी राशन डिपो पर गेहूं और राशन लेने के लिए कतार में खड़ी थीं। चंडीगढ़ से एक पत्रकार ने सीधे फोन करके उन्हें बेटी के चैंपियन बनने की जानकारी दी। पहले तो मां को लगा कि उनकी बेटी ने रजत पदक जीता होगा, लेकिन पत्रकार ने स्पष्ट किया कि नीरू ने इस बार सीधा स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। फोन पर यह खबर सुनते ही मां की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े और अत्यधिक उत्साह में वह राशन की पूरी बोरी खुद उठाकर घर ले आईं। उन्होंने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है।
अस्पताल से सीधे पोडियम तक का कठिन सफर
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता से ठीक पहले नीरू के सामने एक बहुत गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया था। जापान रवाना होने से कुछ दिन पूर्व वह डेंगू की चपेट में आ गईं और उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें लगभग 10 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहना पड़ा। भारतीय दल 16 सितंबर को ही जापान के लिए रवाना हो गया था, लेकिन नीरू बीमारी की वजह से उस दल के साथ नहीं जा सकीं। उन्होंने अपनी शारीरिक कमजोरी को मात दी और 21 सितंबर को जापान पहुंचकर सीधे रेंज में मोर्चा संभाला। इस अदम्य साहस का नतीजा यह रहा कि वह एशियाई खेलों में महिलाओं की व्यक्तिगत ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गईं।
तंगहाली से सेना में नायब सूबेदार बनने तक की यात्रा
नीरू के परिवार में मां के अलावा दो बहनें और एक भाई हैं, जिनमें से एक बहन का विवाह हो चुका है। उनके घर की दीवारें आज भी सीलन की मार झेल रही हैं और पलस्तर के ऊपर रंग-रोगन तक नहीं कराया जा सका है। वर्ष 2019 में 12वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी करने के बाद से ही नीरू ने खेलों में दिन-रात एक कर दिया था। उनकी इस कड़ी मेहनत और प्रतिभा के दम पर वर्ष 2025 में खेल कोटे के तहत उन्हें भारतीय सेना में नायब सूबेदार का पद मिला। नीरू मध्य प्रदेश स्थित भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के केंद्र से अभ्यास कर रही थीं और खेल के सफर के दौरान उन्हें सरकारी स्तर पर भी महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ।
गांव में जश्न और चूरमे के साथ स्वागत की तैयारी
नीरू की इस दोहरी स्वर्णिम सफलता के बाद उनके संगतपुरा स्थित पैतृक घर पर लगातार बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। पूरे क्षेत्र में उत्सव का माहौल है और ग्रामीण अपनी लाडली के वतन वापसी की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। मां सुदेश ने बताया कि जब नीरू अपने गांव लौटेगी, तो उसका पारंपरिक हरियाणवी रीति-रिवाजों के साथ जोरदार स्वागत किया जाएगा और उसके पसंदीदा चूरमे की दावत तैयार की जाएगी। इस उपलब्धि ने गुमनाम से गांव संगतपुरा को सीधे वैश्विक खेल मानचित्र पर ला खड़ा किया है।
मिक्स्ड टीम इवेंट में भी साधा स्वर्णिम निशाना
नीरू ने ट्रैप मिक्स्ड टीम स्पर्धा में कियानन चेनाई के साथ जोड़ी बनाकर भी स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। इस शानदार जीत पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने सोशल मीडिया पर संदेश जारी करते हुए दोनों खिलाड़ियों की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री ने लिखा कि म्हारी धाकड़ बेटी नीरू ने सोने-चांदी की बरसात कर दी है। उन्होंने कियानन चेनाई और नीरू के सटीक तालमेल, अचूक निशाने और असाधारण खेल को देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए दोनों निशानेबाजों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



















