देश के अलग-अलग हिस्सों में इन दिनों भारी-भरकम और विशालकाय ट्रकों की आवाजाही लोगों के बीच भारी कौतूहल और चर्चा का विषय बनी हुई है। उत्तर प्रदेश में इस समय बेल्जियम से आए एक भारी वेसल को ले जा रहे बड़े ट्रक की खासी चर्चा हो रही है, जिसे वाराणसी और आसपास के इलाकों से गुजारा जा रहा है। ठीक ऐसा ही एक बाहुबली ट्रेलर कुछ समय पहले हरियाणा के पानीपत में भी लाया गया था। इस भारी-भरकम वाहन को गुजरात से पानीपत की अपनी मंजिल तक पहुंचने में एक साल से अधिक का लंबा समय लग गया था। इन दोनों ही बड़े परिवहन अभियानों ने देश की सड़कों और लॉजिस्टिक्स की प्रणाली को सुर्खियों में ला दिया है।
गुजरात से पानीपत पहुंचा था 800 टन वजनी ट्रेलर
हरियाणा में जिस विशालकाय ट्रेलर को लाया गया था, उसका सफर काफी लंबा और चुनौतीपूर्ण रहा था। इस भारी-भरकम वाहन में करीब 400 टायर लगाए गए थे और इस पर लादे गए बॉयलर समेत पूरे सिस्टम का कुल वजन 800 टन यानी लगभग 8 लाख किलोग्राम था। हरियाणा की सड़कों पर यह भारी काफिला अक्तूबर 2024 में चर्चा का केंद्र बना था। इस बाहुबली ट्रक की सबसे रोचक बात यह थी कि इसके साथ करीब 250 लोगों का एक पूरा अमला चलता था, जिसका काम रास्ते को खाली कराना, जरूरी अनुमतियां लेना और रास्ते में आने वाले पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। यह भीमकाय ट्रक रोजाना केवल 15 से 20 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाता था। इस लंबी यात्रा के दौरान इस भारी ट्रेलर में लगे लगभग 200 टायर फट भी गए थे, जिन्हें दुरुस्त करने के लिए साथ चल रही तकनीकी सहायता टीम हमेशा मौजूद रहती थी।
किस तरह आगे बढ़ता था हरियाणा का यह विशाल काफिला
हरियाणा लाए गए इस बाहुबली ट्रक के संचालन की तकनीक बेहद जटिल और दिलचस्प थी। इस भारी-भरकम बॉयलर को सामान्य और समतल रास्तों पर शक्तिशाली ट्रेन पुलर खींचते थे। हालांकि जब काफिले को किसी पुल या चढ़ाई वाले रास्ते को पार करना होता था, तो उस दौरान चार से पांच अतिरिक्त पुलर और जोड़ दिए जाते थे। जानकारों के मुताबिक इसके एक पुलर में 500 हॉर्सपावर की ताकत होती थी, जिसका मतलब है कि पूरे सिस्टम में एक साथ 1500 से 2000 घोड़ों के बराबर की ताकत लगती थी। गुजरात से चला यह ट्रक लगभग 13 से 14 महीनों के सफर के बाद अपने गंतव्य पानीपत तक पहुंचा था। इस वाहन के रास्ते में आने वाली हर बाधा को हटाने के लिए एक खास टीम आगे चलती थी, जो बिजली के तारों, रेलवे फाटकों और अन्य अवरोधों को दूर करती थी। यह पूरी प्रक्रिया बिजली, सिंचाई और रेलवे जैसे विभिन्न विभागों से आधिकारिक अनुमति लेने के बाद ही आगे बढ़ती थी।
उत्तर प्रदेश के बेल्जियम वेसल और हरियाणा के ट्रक में अंतर
वर्तमान में उत्तर प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना ट्रक हरियाणा वाले वाहन के मुकाबले कम वजनी है। बेल्जियम से उत्तर प्रदेश लाया गया यह भारी-भरकम मशीनरी वाला वेसल करीब 200 टन वजन का है। इसे उत्तर प्रदेश में बलरामपुर चीनी मिल और एथेनॉल प्लांट के लिए लाया जा रहा है। इस विदेशी मशीन को पहले समुद्री मार्ग के जरिए ओडिशा के पारादीप पोर्ट तक पहुंचाया गया था और वहां से सड़क के रास्ते इसे उत्तर प्रदेश की सीमा में लाया गया है। इस भारी वाहन के आवागमन के कारण वाराणसी में तीन फुटओवर ब्रिज के कुछ हिस्सों को भी तोड़ना पड़ा है। लोगों के आकर्षण का केंद्र बना यह 308 पहियों वाला ट्रक जब बनारस की सीमा में दाखिल हुआ, तो चंदौली से बनारस तक का सफर तय करने में इसे भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। खराब रास्तों के कारण यह ट्रक केवल 48 घंटों में मात्र 48 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाया, जिसे आगे बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ी।



















