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ललितपुर से वैष्णो देवी की पदयात्रा पर निकले पांच किसान, देश की खुशहाली और तरक्की के लिए मांग रहे मन्नतहरियाणा
29 अग॰ 2026, 9:22 pm (51 मिनट पहले)· 2

ललितपुर से वैष्णो देवी की पदयात्रा पर निकले पांच किसान, देश की खुशहाली और तरक्की के लिए मांग रहे मन्नत

उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से पांच किसानों ने माता वैष्णो देवी के दरबार तक की करीब 1200 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा शुरू की है। ये किसान अपने लिए कुछ मांगने के बजाय देश की खुशहाली, आपसी भाईचारे और 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने की कामना कर रहे हैं।

अंबाला पहुंचने पर इन पांचों किसानों के संकल्प की चर्चा चारों तरफ हो रही है। आम तौर पर लोग माता के दरबार में अपने परिवार की सुख-समृद्धि, सेहत या बच्चों के भविष्य के लिए मन्नत मांगते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के ललितपुर से आए इन किसानों का उद्देश्य पूरी तरह से अलग है। इन किसानों ने अपने निजी स्वार्थ को छोड़कर पूरे देश की खुशहाली, नागरिकों के स्वस्थ जीवन, आपसी सौहार्द और देश की प्रगति की दुआ मांगने का बीड़ा उठाया है। करीब 1200 किलोमीटर की इस लंबी पैदल यात्रा पर निकले इन किसानों की दृढ़ इच्छाशक्ति के आगे उम्र की बाधाएं भी छोटी पड़ रही हैं। ये सभी किसान हर दिन 40 से 50 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर रहे हैं। इनमें से दो किसानों ने अपनी इस कठिन आस्था के तहत पूरे रास्ते नंगे पांव चलने का कठोर संकल्प लिया है। पैरों के नीचे तपती सड़कें और नुकीले रास्ते हैं, लेकिन इनके बुलंद हौसलों और माता रानी के जयकारों के आगे ये मुश्किलें बेअसर साबित हो रही हैं।

ललितपुर से शुरू हुआ 1200 किलोमीटर का सफर

यात्रा में शामिल किसान लक्ष्मण दास ने बताया कि वे करीब 12 दिन पहले उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से माता वैष्णो देवी के पवित्र धाम के लिए रवाना हुए थे। कुल 1200 किलोमीटर की इस यात्रा में वे रोजाना 40 से 50 किलोमीटर पैदल चल रहे हैं। पूरा दिन चलने के बाद ये लोग रात के वक्त रास्ते में पड़ने वाले किसी मंदिर, अन्य धार्मिक स्थल या किसी अन्य सुरक्षित ठिकाने पर विश्राम करते हैं। सुबह होते ही माता का झंडा थामकर वे दोबारा अपनी आगे की राह पर निकल पड़ते हैं। लक्ष्मण दास खेती-किसानी करके अपना और अपने परिवार का गुजारा करते हैं। घर से कदम निकालते वक्त उनके मन में अपने लिए किसी तरह की कोई निजी इच्छा नहीं थी। उनके दिल में बस एक ही बड़ी भावना थी कि माता रानी के चरणों में पहुंचकर उन्हें संपूर्ण देश और समाज के कल्याण के लिए प्रार्थना करनी है। देश में आए दिन बीमारियां बढ़ती जा रही हैं और सड़क हादसों जैसी दुखद घटनाएं अनगिनत परिवारों को उजाड़ रही हैं। इसलिए वे चाहते हैं कि देशवासियों को इन सभी परेशानियों से छुटकारा मिले और हर एक परिवार खुशहाली के साथ अपना जीवन जी सके।

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राह चलते लोगों का मिल रहा भरपूर सहयोग

एक अन्य किसान छोटू राम ने बताया कि वे कुल पांच लोग अपने घरों से माता का पावन झंडा और जरूरी सामान लेकर निकले हैं। जब तक वे इस लंबी यात्रा पर हैं, तब उनके परिवार के बाकी सदस्य घर पर रहकर खेती-किसानी की पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इस कठिन रास्ते पर जैसे-जैसे ये लोग आगे बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे इनकी अटूट आस्था को देखकर आम लोग भी मदद के लिए आगे आ रहे हैं। कोई इन्हें भरपेट भोजन कराता है, कोई पानी पूछता है तो कोई रात गुजारने के लिए सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराता है। कई लोग अपनी तरफ से इन्हें आर्थिक मदद भी प्रदान कर रहे हैं। इन किसानों का कहना है कि वे बेहद सीमित साधनों के साथ इस सफर पर निकले हैं और रास्ते में जैसी भी सुविधाएं मिल जाती हैं, उसी में माता का जयकारा लगाते हुए आगे बढ़ जाते हैं.

इन किसानों की सबसे बड़ी और खास इच्छा यही है कि देश में आपसी भाईचारा हमेशा कायम रहे और वर्ष 2047 तक भारत एक विकसित राष्ट्र बन सके। उनकी दिली ख्वाहिश है कि देश के छोटे बच्चे आगे बढ़ें, युवा वर्ग कड़ी मेहनत करे और पूरी दुनिया में भारत का नाम गर्व से ऊंचा हो। अपनी इस पदयात्रा के दौरान ये किसान रास्ते में मिलने वाले युवाओं को नशे की बुरी लत से दूर रहने का मजबूत संदेश भी दे रहे हैं। उनका साफ कहना है कि देश के युवा ही इस राष्ट्र की असली ताकत हैं। यदि आज का युवा नशे जैसी बुराइयों से दूर रहकर शिक्षा, परिश्रम और अच्छे संस्कारों के मार्ग को चुन लेगा, तो दुनिया की कोई भी ताकत इस देश को आगे बढ़ने से नहीं रोक पाएगी।

सवाल-जवाब

ये किसान कहां से यात्रा पर निकले हैं?
ये पांचों किसान उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से अपनी पदयात्रा पर निकले हैं।
ये किसान कहां जा रहे हैं?
ये सभी किसान माता वैष्णो देवी के दरबार की यात्रा पर जा रहे हैं।
यह पूरी यात्रा कितने किलोमीटर की है?
यह पूरी पैदल यात्रा लगभग 1200 किलोमीटर लंबी है।
ये किसान रोजाना कितना पैदल चलते हैं?
ये किसान हर दिन लगभग 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करते हैं।
इन किसानों की मुख्य मन्नत क्या है?
वे अपने लिए कुछ मांगने के बजाय देश की खुशहाली, अच्छे स्वास्थ्य, आपसी भाईचारे और 2047 तक भारत के विकसित राष्ट्र बनने की कामना कर रहे हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 मिनट पहले

ललितपुर से वैष्णो देवी तक किसानों की यह पदयात्रा सिर्फ आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक जुड़ाव और सामाजिक एकजुटता का एक मजबूत उदाहरण है। इस तरह के लंबे सफर में कानून-व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा जैसे पहलू बेहद अहम हो जाते हैं। जब लोग 1200 किलोमीटर तक नंगे पांव और सीमित साधनों के साथ राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरते हैं, तो स्थानीय प्रशासन और पुलिस के लिए उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाता है। इस यात्रा के दौरान जनता का मिल रहा सहयोग यह भी दिखाता है कि आम नागरिकों में सामाजिक सद्भाव के प्रति गहरी भावना है।

Rohan Verma@rohan-verma·38 मिनट पहले

ललितपुर से वैष्णो देवी तक की यह 1200 किलोमीटर लंबी पदयात्रा उत्तर प्रदेश के किसानों की अनूठी सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना को दर्शाती है। हालांकि, राष्ट्रीय राजमार्गों और व्यस्त ग्रामीण मार्गों पर रोजाना 40 से 50 किलोमीटर पैदल चलना यात्रियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है। खासकर जब दो किसान नंगे पांव यात्रा कर रहे हैं, तो हाइवे पर बढ़ते सड़क हादसों के बीच पुलिस और स्थानीय प्रशासन को उनके लिए विशेष सुरक्षा घेरा और मेडिकल सहायता सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि यह धार्मिक व सामाजिक सद्भाव का संदेश बिना किसी बाधा के पूरा हो सके।

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