गुरुग्राम के बहुचर्चित और हाई-प्रोफाइल मामले में टेक्नोलॉजी ट्रेनर विमल डागा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और साइबर सेल ने अपनी जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। डीएलएफ थाना क्षेत्र में एक महिला द्वारा दर्ज कराई गई गंभीर शिकायतों के आधार पर विमल डागा और LinuxWorld Informatics से जुड़े दो अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। इस सनसनीखेज प्रकरण की तफ्तीश अब स्थानीय पुलिस थाने से ऊपर उठकर डीसीपी और एसीपी स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों के हाथों में पहुंच चुकी है, जबकि गुरुग्राम का साइबर क्राइम विभाग भी इस पर पूरी नजर बनाए हुए है।
विवाह का झांसा और गंभीर आरोप
बीते महीने 29 जुलाई को डीएलएफ थाना में दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, महिला ने विमल डागा पर शादी का झूठा वादा करने और लगातार शोषण करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता के अनुसार, दोनों की मुलाकात साल 2017 में हुई थी और उस दौरान डागा ने खुद को अविवाहित बताया था। आरोप है कि शादी का भरोसा देकर आरोपी ने शारीरिक संबंध बनाए। इसके अलावा शिकायतकर्ता महिला ने बिना मर्जी के गर्भपात कराने, मारपीट करने और कई मौकों पर बलात्कार किए जाने का भी जिक्र किया है।
ब्लैकमेलिंग और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल
पुलिस में दी गई शिकायत के अनुसार, आरोपी ने महिला की निजी तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया या सार्वजनिक मंचों पर वायरल करने की धमकी देकर उसे लगातार ब्लैकमेल किया। इस पूरे प्रकरण में अब तक लगभग 70 लाख रुपये के लेन-देन और करीब 10.50 लाख रुपये के निजी कर्ज से जुड़े वित्तीय पहलू भी सामने आए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, अप्रैल 2025 में धमकाकर गुरुग्राम के एक होटल में बुलाए जाने और वहां जबरन शारीरिक संबंध बनाए जाने की बात भी शिकायत में शामिल है।
साइबर सेल की रडार पर वर्चुअल नंबर और एआई इस्तेमाल
जांच में यह बात भी सामने आई है कि आरोपी ने अपनी पहचान छुपाने और दबाव बनाने के लिए बड़ी संख्या में वर्चुअल मोबाइल नंबरों और अलग-अलग ईमेल आईडी का इस्तेमाल करते हुए धमकी भरे संदेश भेजे थे। गुरुग्राम के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ईस्ट को इस संबंध में इसी साल फरवरी 2026 में शिकायत प्राप्त हुई थी। पुलिस की शुरुआती तकनीकी जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जब आरोपी को यह भनक लगी कि पीड़िता कानूनी कार्रवाई करने वाली है, तो कथित रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेकर महिला के खिलाफ हनी-ट्रैप जैसी झूठी साजिशें और मामले तैयार करवाए गए, ताकि उसे बदनाम कर दबाया जा सके।
वरिष्ठ अधिकारियों के हाथ में जांच की बागडोर
मामले की नजाकत और गंभीरता को देखते हुए गुरुग्राम पुलिस के उच्चाधिकारियों ने इसकी सीधी कमान संभाल ली है। डीएलएफ थाना पुलिस के साथ-साथ साइबर क्राइम ईस्ट की विशेष टीम आरोपियों के मोबाइल फोन, ईमेल कम्युनिकेशंस, क्लाउड अकाउंट्स और अन्य सभी डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर उनकी फॉरेंसिक जांच कर रही है। पुलिस दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे मामले की आधिकारिक जांच सहायक उप-निरीक्षक सरोज को सौंपी गई है, जो सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।



















